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गोरों पर भारतीय मूल के ऋषि का राज

देश को दिवाली का एक और तोहफा,

उगता भारत ब्यूरो

इस बार दिवाली हर तरफ़ से ख़ुशहाली की रौनक़ लेकर आई है। दिवाली के एक दिन पहले विराट कोहली ने असंभव को संभव बनाते हुए अविस्मरणीय पारी खेली और पाकिस्तान को धूल चटाकर भारत को दिवाली का बड़ा तोहफ़ा दिया था। उधर दिवाली के दिन यानी सोमवार को ब्रिटेन में भारतीय मूल के ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री बनने की सुखद खबर आई।

सुखद इसलिए कि भारत पर दो सौ साल तक राज करने और हर कदम पर हमें दोयम दर्जे का मानने वाले अंग्रेजों के खुद के देश पर एक भारतीय मूल का व्यक्ति राज करने जा रहा है।

एक बार तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था, “भारत को आज़ाद किया गया तो सत्ता गुंडों और मुफ़्तख़ोरों के हाथ में चली जाएगी। सभी भारतीय नेता बेहद कमजोर और भूसे के पुतले जैसे साबित होंगे।” आज उन्हीं विंस्टन चर्चिल के देश में भारतीय मूल के ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।

मिस्र के पिरामिडों को छोड़ दिया जाए तो समय से कोई नहीं जीत सका है। जिन अंग्रेजों के राज में कभी सूरज नहीं डूबता था, आज आर्थिक मोर्चे पर खुद डूबे जा रहे हैं।… और भारत लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। इतना आगे कि अंग्रेज भी पीछे छूट गए।

ऋषि सुनक बेशक ब्रिटेन में ही जन्मे, लेकिन उनका परिवार पंजाब का रहने वाला है। ऋषि के माता-पिता पंजाब से वहाँ जा बसे थे। ऋषि सॉफ़्टवेयर कंपनी इन्फ़ोसिस के को-फ़ाउण्डर नारायण मूर्ति के दामाद हैं। सुनक, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जान्सन के मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री रह चुके हैं।

वित्तीय मामलों में उनकी विशेषज्ञता ही उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक ले आई है। आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह जूझ रहे ब्रिटेन को इस वक्त ऐसे नेता की ज़रूरत थी जो वित्तीय सुधार ला सके और अर्थ व्यवस्था को संभाल सके। यही वजह है कि ऋषि को प्रधानमंत्री पद तक पहुँचने में दो सौ सांसदों का समर्थन मिला, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी पेनी मॉरडॉन्ट केवल 26 सांसदों का समर्थन जुटा सकीं।

निश्चित ही यह दिन, यह ऐतिहासिक घटनाक्रम भारत के लिए उत्साहजनक तो है ही, उसके विश्व गुरु होने के सूत्र वाक्य को भी बल देता है। पहले लग रहा था कि गोरे, अपने यहाँ भारतीय मूल के किसी व्यक्ति को कम से कम प्रधानमंत्री की कुर्सी पर तो नहीं ही बैठाएँगे। लेकिन इस असंभव बात को संभव कर दिखाया ऋषि सुनक ने।

जब ग़ुलाम रहते हुए हम अंग्रेजों को अपने देश से भगाने की ताक़त रखते हैं तो आज़ाद भारत की ताक़त भला कितने गुना अधिक होगी। अंग्रेजों ने यह बात कभी मानी नहीं, लेकिन अब मानना ही पड़ा।
साभार

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