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जब कंधे पर अस्थि कलश लाए थे मोदी


अनुराग मिश्रा

देश को आजाद कराने के लिए श्यामजी ने लंदन में इंडिया हाउस, ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ और ‘द इंडियन होम रूल सोसाइटी’ की स्थापना की थी। संस्कृत और शास्त्रों के प्रकांड विद्वान श्यामजी का 1930 में निधन हो गया था। उन्हें उम्मीद थी कि देश की आजादी के बाद उनकी अस्थियां स्वदेश पहुंचेंगी। 1947 में आजादी मिलने के 56 साल बाद तक परदेस में इस स्वतंत्रता सेनानी की अस्थियों को लेने कोई नहीं गया। आखिर में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जिनेवा से उनकी अस्थियों को स्वदेश लेकर आए थे।

​पीएम मोदी ने भी याद किया वो पल​

मोदी आर्काइव ने आज पीएम मोदी की उन तस्वीरों को शेयर करते हुए उस दिन का जिक्र किया है, जब मोदी अपने कंधे पर श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियों को लिए हुए थे। इसे रीशेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आज लिखा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियों को वापस लाना उनके जीवन के सबसे विशेष पलों में से एक था। देशभर के लोगों खासकर युवाओं में, इसने जो जोश और गर्व की अनुभूति कराई वह अकल्पनीय थी।

वो साल था 2003, मोदी स्विट्जरलैंड गए थे
22 अगस्त 2003 को मोदी ने स्विस सरकार से श्यामजी की अस्थियों को ग्रहण किया। वह अस्थियों को लेने खुद जिनेवा, स्विट्जरलैंड गए थे। वहां सेंट जॉर्ज सीमेट्री में अस्थियों को लेते मोदी की तस्वीरें भी हैं।
​गुजरात के 17 जिलों से होकर गुजरी वीरांजलि यात्रा

भारत आने पर मोदी ने एक भव्य वीरांजलि यात्रा आयोजित की थी और गुजरात के 17 जिलों से होकर इस महान स्वतंत्रता सेनानी की अस्थियों का कलश गुजरा। दक्षिण गुजरात, मध्य गुजरात से लेकर सौराष्ट्र तक लोगों ने सड़क के किनारे खड़े होकर श्यामजी को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। स्कूली छात्रों से लेकर बड़े-बुजुर्गों और महिलाओं ने वीर सेनानी को नमन किया। जिस वाहन में श्यामजी का अस्थिकलश रखा गया उसे विशेष रूप से सजाया गया था और उसे वीरांजलि-वाहिका नाम दिया गया। आखिर में उस महान स्वतंत्रता सेनानी की अंतिम इच्छा पूरी हुई। अस्थि कलश को मांडवी, कच्छ में वर्मा परिवार को सौंप दिया गया।

​मोदी ने बनवाया क्रांति तीर्थ​

महान स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा के जीवन और योगदान का सम्मान करने के लिए मोदी ने एक मेमोरियल बनाने के बारे में सोचा। ऐसे में क्रांति तीर्थ का विचार आया। 4 अक्टूबर 2009 को क्रांति तीर्थ की आधारशिला रखी गई और 13 दिसंबर 2010 को इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया।

लंदन में मोदी को मिला सम्मान

प्रधानमंत्री बनने के बाद 2015 में इनर टेंपल सोसाइटी लंदन ने पीएम मोदी को श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियों को स्वदेश ले जाने के लिए एक प्रमाणपत्र सौंपा। तत्कालीन ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन ने तब प्रजेंटेशन दिया था।

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