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भारत के अनेक क्षेत्र ऐसे रहे हैं जिन पर मुस्लिम शासन एक दिन भी स्थापित नहीं रहा : डॉ राकेश कुमार आर्य

महरौनी(ललितपुर)..महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वावधान में विगत 2 वर्षों से संचालित मंत्री आर्यरत्न शिक्षक लखनलाल आर्य द्वारा आयोजित आर्यों का महाकुंभ के मुख्य वक्ता सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि भारत के वास्तविक इतिहास को विलुप्त करके जो इतिहास में पढ़ाया गया है वह षड्यंत्रकारियों के पापों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हमें मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित ‘भारत हजारों वर्षों की पराधीनता का एक औपनिवेशिक भ्रमजाल’ के उपरोक्त शोध ग्रंथ का ऋणी होना चाहिए। जिससे पता चलता है कि भारत के अनेक क्षेत्र ऐसे रहे हैं जिन पर विदेशी शासन एक दिन भी स्थापित नहीं हुआ। अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जिन पर अंग्रेजों ने केवल 90 या 91 वर्ष ही शासन किया। इसके उपरांत भी हमारे देश पर मुगलों का 800 वर्ष का शासन जबरन थोप दिया जाता है और अंग्रेजों का शासन संपूर्ण भारत वर्ष पर 200 वर्ष तक दिखला दिया जाता है। यह पूर्णतया गलत है ।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड विदेशी शासन के अधीन 1818 के बाद आया। जब अंग्रेजों का शासन यहां पर स्थापित हुआ। इससे पहले यह क्षेत्र मुस्लिमों के क्षेत्र में कभी नहीं रहा। इसी प्रकार गोंडवाना का क्षेत्र भी मुस्लिम शासन से मुक्त रहा। यहां भी बुंदेलखंड की तरह 1818 में ही अंग्रेजों का शासन स्थापित हुआ। ग्वालियर क्षेत्र में महाकौशल, इंदौर, रीवा, झांसी ये सारी रियासतें मुस्लिम काल में अपनी स्वतंत्रता को बचाए रखने में सफल रही । एक दिन भी कोई रियासत में किसी मुस्लिम सुल्तान या बादशाह के अधीन नहीं रही।
डॉक्टर आर्य ने कहा कि मालवा 1301 ईस्वी से 1731 ईस्वी तक मुस्लिम शासन के अधीन रहा। 88 वर्ष स्वतंत्र रहने के पश्चात यह क्षेत्र 1819 में एक बार फिर ब्रिटिश शासन के अधीन चला गया। उन्होंने कहा कि भरतपुर क्षेत्र में कुल 11 राज्यक्षेत्र भी अपनी स्वतंत्रता बचाए रखने में सफल रहे, परंतु अंग्रेजों के शासनकाल में 1826 से यह अंग्रेजो के अधीन चला गया। इसी प्रकार नैगांव हमीरपुर, धौलपुर, बांसवाड़ा ,सिरोही, डूंगरपुर, करौली, किशनगढ़, पालनपुर, प्रतापगढ़ ,शाहपुर की रियासतें भी कभी मुस्लिम शासन के अधीन नहीं रही। यद्यपि 18 57 के पश्चात यह ब्रिटिश शासन के अधीन अवश्य रहे। टोंक क्षेत्र में 1819 से 1948 तक मुस्लिम शासन रहा ।
कालिंजर में 1545 – 1856 तक मुस्लिम शासन रहा । अलवर, जयपुर ,आमेर, जोधपुर, मारवाड़, जैसलमेर ,बीकानेर, उदयपुर, मेवाड़ ,चित्तौड़ यह सारे राज्य भी अपना स्वतंत्र संघर्ष स्वतंत्रता संघर्ष चलाते रहे और एक दिन भी मुस्लिम शासन के अधीन नहीं रहे। जयपुर 1728 में बसाया गया था। इससे पहले यह कभी किसी मुस्लिम शासन के अधीन नहीं रहा। 1857 के पश्चात यह सभी राज्य अंग्रेजों के अधीन चले गए। कोटा बूंदी, गुजरात के 20 प्रमुख राज्य ,महाराष्ट्र के 15 प्रमुख राज्य भी अपनी स्वतंत्रता बचाए रखने में सफल रहे।
आर्य ने कहा कि हैदराबाद 1589 से लेकर 1948 तक मुस्लिम शासन के अधीन रहा। उन्होंने बताया कि विजयनगर मुस्लिम शासन के अधीन कभी नहीं रहा। इसी प्रकार आंध्रप्रदेश भी कभी मुस्लिम शासन के अधीन नहीं रहा।
कार्यक्रम में कमला हंस, ईश्वर देवी, अदिति आर्या और दया आर्या हरियाणा ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। व्याख्यान में अनिल नरूला दिल्ली,प्रेम सचदेवा दिल्ली,युद्धवीर आर्य,भोगी प्रसाद म्यांमार,चंद्र कांता आर्या,प्रो डॉ वेद प्रकाश शर्मा बरेली,परमानंद सोनी आर्य भोपाल,सुमन लता सेन शिक्षिका,आराधना सिंह शिक्षिका,रामसेवक निरंजन शिक्षक,रामकुमार सेन अजान,महेश खटीक शिक्षक,अवधेश प्रताप सिंह बैंस,पारसमणी पुरोहित,अवध बिहारी तिवारी केंद्रीय शिक्षक,विवेक सिंह शिक्षक गाजीपुर,सहित सम्पूर्ण विश्व से आर्य जन जुड़ रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन मंत्री आर्यरत्न शिक्षक लखन लाल आर्य एवम आभार प्रधान पुरुषोत्तम मुनि वानप्रस्थ ने किया।
कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि भारत के इतिहास का गौरवपूर्ण पक्ष यथाशीघ्र देश के सभी विद्यालयों में लागू कराया जाए। जिससे कि आने वाली पीढ़ी भारत के गौरवपूर्ण अतीत से जुड़ सकें।

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