जरूरी नही है कि काल सर्प दोष आपको नुकसान ही  कर रहा हो

प० राजेश कुमार शर्मा

मैने अनेक जातको कि कुन्डलियों में देखा है कि कुछ जातको को कालसर्प दोष के योग के साथ साथ जातक कि कुन्डली मे पंचमहापुरूष राजयोग मे से कोई एक अथवा एक से अधिक योग विद्यमान हो तो भी कालसर्प योग प्राय प्रभावहीन हो जाता है अशुभ प्रभावो मे न्यूनता आ जाती है

— यदि लग्नचक्र मे सिंहासन योग अथवा इसके समान कोई अन्य राजयोग हो व तीनो त्रिकोनो के स्वामी परस्पर एक दुसरे से सम्बद्ध हो तो भी कालसर्पयोग का अशुभ प्रभाव नही होता अनेक राजयोगो की परिभाषा का उल्लेख  डा० वी बी रमन ने अपनी पुस्तक  ती सौ महत्वपूर्ण योग मे स्पष्ट उल्लेख किया है कालसर्प योग के अशुभता का प्रभाव इन महापुरूषो पर नही पडा जबकि इनकी कुन्डली मे कालसर्प योग विराजमान है। स्मिता पाटिल ,रामविलास पासवान , सचिन तेन्दुलकर , श्री महेश योगी, जवाहर लाल नेहरू, अरूण नेहरू, हर्षद मेहता, मुरारी बापू,सरदार बल्भभाई पटेल,अशोक कुमार, आदि  इन लोगो ने प्रगति के उच्च मुकाम को छुआ है

शिवरात्री पर भोले शंकर कि पूजा अर्चना करे परन्तु कालसर्प योग का हम उपाय कर रहे है यह सकंलप ले कर न करे जरूरी नही है कि काल सर्प दोष आपको नुकसान हि कर रहा हो । दशा अर्न्तर दशा के कारण भी परेशानिया आ सकती है

जीवन पर इस प्रकार असर करता है कालसर्पयोग

जीवन पर इस प्रकार असर करता है कालसर्पयोग किसी भी जन्मकुंडली में राहु और केतु ग्रह एक-दुसरे के सामने स्थित होते है। राहु और केतु किसी भी काम में रुकावटें डालते है। इसलिए ये कुडली के जिस भाव में बैठते हैं। उस भाव से संबंधित रुकावटे देते है।

कालसर्पयोग 12 प्रकार के होते हैं। जानते किस भाव में कालसर्पयोग बनने के क्या फल होते हैं।

  1. अनंत कालसर्पयोग- पहले भाव में राहु और सातवां भाव में केतु होता है। इन दोनों ग्रहों के बीच में बाकी ग्रहों के आ जाने से अंनतकालसर्पयोग बनता है। प्रथम भाव स्वयं का व सप्तम भाव जीवनसाथी का होता है। जिसके कारण जीवनसाथी से मनमुटाव की स्थिति बनती है। वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव देता है।

2 कुलिक कालसर्प योग- कुंडली के दूसरे घर में राहु और आंठवे घर में केतु के बीच में सभी ग्र्रहों के आ जाने से कुलिक कालसर्पयोग बनता है। यह पैतृक सम्पत्ति पाने में दिक्कतें खड़ी करता है। ऐसी सम्पत्ति के पीछे कानूनी चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

3 वासुकी कालसर्प योग- तीसरे घर में राहु और नवें घर में केतु के होने से छोटे भाई- बहन का सुख नसीब नहीं होता है। कई सारे काम बनते-बनते रह जाते हैं।

4 शंखपाल कालसर्प योग – जन्मकुंडली के चैथे घर में राहु और दसवें घर में केतु होने से कालसर्पयोग बनता है। इस योग में घर से संबधित कोई न कोई परेशानी झेलना पड़ सकती है। जीवन में सुख बहुत मुश्किल से नसीब होता है।

  1. पद्म कालसर्प योग- कुंडली के पंचम भाव में राहु एवं एकादश में केतु के मध्य में सारे ग्रह आ जाने के कारण कालसर्पयोग बनता हैं। यह भाव संतान से संबधित दिक्कत दे सकता है। शिक्षा पूरी होने में दिक्कतें खड़ी करता है।

6 महापद्म कालसर्प योग- कुंडली के छठे घर में राहु और बारहवे घर में केतु के बीच में सारे ग्रह होने पर महापद्म कालसर्पयोग बनता है। इस योग में जातक पैसा बचा नहीं पाता है। शत्रुओं से परेशानी भुगतता है।

7 तक्षक कालसर्प योग- कुंडली के सातवें घर में केतु और सप्तम भाव में राहु के बीच में सारे ग्रह स्थित होने पर कालसर्पयोग बनता है। इस योग में जीवनसाथी से लंबे समय तक के लिए दूरी देने वाला होता है।

9 शंखचूड़ कालसर्प योग- नवे घर में राहु और तृतीय घर में केतु के बीच में सारे ग्रह होने से शंखचूड़ कालसर्पयोग बनता है। भाग्य का अच्छा फल नसीब नहीं होता है। छोटे भाई से मनचाहा व्यवहार नहीं मिलता है।

10.घातक कालसर्प योग- दसवें घर में राहु और चैथे घर में केतु के बीच में सारे ग्रह होने पर घातक कालसर्पयोग बनता है। इस योग में माता -पिता से मनचाहा सुख नसीब नहीं होता है।

11 विषधर कालसर्प योग- ग्यारहवे घर में केतु और पांचवे घर में राहु होने पर विषधर कालसर्पयोग बनता है। इस योग मे कमाई मन मुताबिक नहीं होती है। बड़े भाईयों से तकलीफ उठानी पड़ सकती है।

12 शेषनाग कालसर्प योग- राहु बारहवें घर में और केतु छठे घर में हो तो शेषनाग कालसर्पयोग बनता है। इस योग में अपने धन को दूसरे के लिए खर्च करने वाला स्वभाव होता है। दूसरों के लिए काम करने की आदत होती है। जिसके कारण स्वयं परिवार के लिए परेशानी का सबब बनते हैं।

मैने अनेक जातको कि कुन्डलियों में देखा है कि कुछ जातको को कालसर्प दोष के योग के साथ साथ जातक कि कुन्डली मे पंचमहापुरूष राजयोग मे से कोई एक अथवा एक से अधिक योग विद्यमान हो तो भी कालसर्प योग प्राय प्रभावहीन हो जाता है अशुभ प्रभावो मे न्यूनता आ जाती है

— यदि लग्नचक्र मे सिंहासन योग अथवा इसके समान कोई अन्य राजयोग हो व तीनो त्रिकोनो के स्वामी परस्पर एक दुसरे से सम्बद्ध हो तो भी कालसर्पयोग का अशुभ प्रभाव नही होता अनेक राजयोगो की परिभाषा का उल्लेख  डा० वी बी रमन ने अपनी पुस्तक  ती सौ महत्वपूर्ण योग मे स्पष्ट उल्लेख किया है कालसर्प योग के अशुभता का प्रभाव इन महापुरूषो पर नही पडा जबकि इनकी कुन्डली मे कालसर्प योग विराजमान है। स्मिता पाटिल ,रामविलास पासवान , सचिन तेन्दुलकर , श्री महेश योगी, जवाहर लाल नेहरू, अरूण नेहरू, हर्षद मेहता, मुरारी बापू,सरदार बल्भभाई पटेल,अशोक कुमार, आदि  इन लोगो ने प्रगति के उच्च मुकाम को छुआ है

शिवरात्री पर भोले शंकर कि पूजा अर्चना करे परन्तु कालसर्प योग का हम उपाय कर रहे है यह सकंलप ले कर न करे जरूरी नही है कि काल सर्प दोष आपको नुकसान हि कर रहा हो । दशा अर्न्तर दशा के कारण भी परेशानिया आ सकती है

जीवन पर इस प्रकार असर करता है कालसर्पयोग

जीवन पर इस प्रकार असर करता है कालसर्पयोग किसी भी जन्मकुंडली में राहु और केतु ग्रह एक-दुसरे के सामने स्थित होते है। राहु और केतु किसी भी काम में रुकावटें डालते है। इसलिए ये कुडली के जिस भाव में बैठते हैं। उस भाव से संबंधित रुकावटे देते है।

कालसर्पयोग 12 प्रकार के होते हैं। जानते किस भाव में कालसर्पयोग बनने के क्या फल होते हैं।

  1. अनंत कालसर्पयोग- पहले भाव में राहु और सातवां भाव में केतु होता है। इन दोनों ग्रहों के बीच में बाकी ग्रहों के आ जाने से अंनतकालसर्पयोग बनता है। प्रथम भाव स्वयं का व सप्तम भाव जीवनसाथी का होता है। जिसके कारण जीवनसाथी से मनमुटाव की स्थिति बनती है। वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव देता है।

2 कुलिक कालसर्प योग- कुंडली के दूसरे घर में राहु और आंठवे घर में केतु के बीच में सभी ग्र्रहों के आ जाने से कुलिक कालसर्पयोग बनता है। यह पैतृक सम्पत्ति पाने में दिक्कतें खड़ी करता है। ऐसी सम्पत्ति के पीछे कानूनी चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

3 वासुकी कालसर्प योग- तीसरे घर में राहु और नवें घर में केतु के होने से छोटे भाई- बहन का सुख नसीब नहीं होता है। कई सारे काम बनते-बनते रह जाते हैं।

4 शंखपाल कालसर्प योग – जन्मकुंडली के चैथे घर में राहु और दसवें घर में केतु होने से कालसर्पयोग बनता है। इस योग में घर से संबधित कोई न कोई परेशानी झेलना पड़ सकती है। जीवन में सुख बहुत मुश्किल से नसीब होता है।

  1. पद्म कालसर्प योग- कुंडली के पंचम भाव में राहु एवं एकादश में केतु के मध्य में सारे ग्रह आ जाने के कारण कालसर्पयोग बनता हैं। यह भाव संतान से संबधित दिक्कत दे सकता है। शिक्षा पूरी होने में दिक्कतें खड़ी करता है।

6 महापद्म कालसर्प योग- कुंडली के छठे घर में राहु और बारहवे घर में केतु के बीच में सारे ग्रह होने पर महापद्म कालसर्पयोग बनता है। इस योग में जातक पैसा बचा नहीं पाता है। शत्रुओं से परेशानी भुगतता है।

7 तक्षक कालसर्प योग- कुंडली के सातवें घर में केतु और सप्तम भाव में राहु के बीच में सारे ग्रह स्थित होने पर कालसर्पयोग बनता है। इस योग में जीवनसाथी से लंबे समय तक के लिए दूरी देने वाला होता है।

9 शंखचूड़ कालसर्प योग- नवे घर में राहु और तृतीय घर में केतु के बीच में सारे ग्रह होने से शंखचूड़ कालसर्पयोग बनता है। भाग्य का अच्छा फल नसीब नहीं होता है। छोटे भाई से मनचाहा व्यवहार नहीं मिलता है।

10.घातक कालसर्प योग- दसवें घर में राहु और चैथे घर में केतु के बीच में सारे ग्रह होने पर घातक कालसर्पयोग बनता है। इस योग में माता -पिता से मनचाहा सुख नसीब नहीं होता है।

11 विषधर कालसर्प योग- ग्यारहवे घर में केतु और पांचवे घर में राहु होने पर विषधर कालसर्पयोग बनता है। इस योग मे कमाई मन मुताबिक नहीं होती है। बड़े भाईयों से तकलीफ उठानी पड़ सकती है।

12 शेषनाग कालसर्प योग- राहु बारहवें घर में और केतु छठे घर में हो तो शेषनाग कालसर्पयोग बनता है। इस योग में अपने धन को दूसरे के लिए खर्च करने वाला स्वभाव होता है। दूसरों के लिए काम करने की आदत होती है। जिसके कारण स्वयं परिवार के लिए परेशानी का सबब बनते हैं।

Comment:

kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
hellocasino giriş
betgaranti
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Kolaybet giriş
grandpashabet giriş
kolaybet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti 2026
betgaranti giriş
betgaranti 2026
betgaranti 2026
betgaranti giriş
betgaranti 2026
Kolaybet 2026
Kolaybet Giriş
Kolaybet Yeni Giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betgaranti
kolaybet giriş
kolaybet güncel giriş
kolaybet 2026
kolaybet