बुरे और अतार्किक विचारों का मानव जीवन पर प्रभाव

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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

हम अपने मन में चल रहे अविवेकपूर्ण व अतार्किक विचारों से परेशान रहते हैं जिसका हमारे दैनिक जीवन और कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।ये विचार सफल व्यक्ति को असफल व्यक्ति से अलग करते हैं। ये विचार सभी क्लेशों और युद्दों की जड़ हैं क्योंकि अचेतन एवं अतार्किक विचारधारा ही सभी युद्धों को जन्म देती है।ऐसे 7 अतार्किक व अचेतन विचारों को एक बार गौर से पढ़िए तो सही, आप पाएंगे कि इनमें हमारी बहुत सी दिक्कतों का हल छुपा है। ये मिथ की तरह हैं, जिनके बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है। 
1.यदि कोई मेरी आलोचना कर रहा है तो मुझमें अवश्य कोई दोष होगा।लोग एक-दूसरे की अनेक कारणों से आलोचना करते हैं। यदि कोई आपकी आलोचना कर रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपमें वाकई कोई दोष या कमी है। आलोचना का एक पक्ष यह भी हो सकता है कि आपके आलोचक आपसे कुछ भिन्न विचार रखते हों. यदि ऐसा है तो यह भी संभव है कि उनके विचार वाकई बेहतर और शानदार हों। यह तो आपको मानना ही पड़ेगा कि बिना किसी मत-वैभिन्य के यह दुनिया बड़ी अजीब जगह बन जायेगी।
 2. मुझे अपनी ख़ुशी के लिए अपने शुभचिंतकों की सुझाई राह पर चलना चाहिए।बहुत से लोगों को जीवन में कभी-न-कभी ऐसा विचार आता है हांलांकि यह विचार तब घातक बन जाता है जब यह मन के सुप्त कोनों में जाकर अटक जाता है और विचलित करता रहता है।यह तय है कि आप हर किसी को हर समय खुश नहीं कर सकते इसलिए ऐसा करने का प्रयास करने में कोई सार नहीं है। यदि आप खुश रहते हों या खुश रहना चाहते हों तो अपने ही दिल की सुनें. दूसरों के हिसाब से ज़िंदगी जीने में कोई तुक नहीं है पर आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आपके क्रियाकलापों से किसी को कष्ट न हो। दूसरों की बातों पर ध्यान देना अच्छी बात है पर उन्हें खुश और संतुष्ट करने के लिए यदि आप हद से ज्यादा प्रयास करेंगे तो आपको ही तकलीफ होगी।
 3. यदि मुझे किसी काम को कर लेने में यकीन नहीं होगा तो मैं उसे शुरू ही नहीं करूंगा।इस विचार से भी बहुत से लोग ग्रस्त दिखते हैं। जीवन में नई चीज़ें करते रहना बढ़ने और विकसित होने का सबसे आजमाया हुआ तरीका है. इससे व्यक्ति को न केवल दूसरों के बारे में बल्कि स्वयं को भी जानने का अवसर मिलता है। हर आदमी हर काम में माहिर नहीं हो सकता पर इसका मतलब यह नहीं है कि आपको केवल वही काम हाथ में लेने चाहिए जो आप पहले कभी कर चुके हैं।वैसे भी, आपने हर काम कभी-न-कभी तो पहली बार किया ही था।
 4. यदि मेरी जिंदगी मेरे मुताबिक नहीं चली तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है।मैं कुछ कहूं? सारी गलती आपकी है. इससे आप बुरे शख्स नहीं बन जाते और इससे यह भी साबित नहीं होता कि आप असफल व्यक्ति हैं।आपका अपने विचारों पर नियंत्रण है इसलिए अपने कर्मों के लिए भी आप ही जवाबदेह हैं।आपके विचार और कर्म ही आपके जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।यदि आप अपने जीवन में चल रही गड़बड़ियों के लिए दूसरों को उत्तरदायी ठहराएंगे तो मैं यह समझूंगा कि आपका जीवन वाकई दूसरों के हाथों में ही था। उनके हाथों से अपना जीवन वापस ले लें और अपने विचारों एवं कर्मों के प्रति जवाबदेह बनें।
 5. मैं सभी लोगों से कमतर हूँ। ऐसा आपको लगता है पर यह सच नहीं है। आपमें वे काबिलियत हैं जिन्हें कोई छू भी नहीं सकता और दूसरों में वे योग्यताएं हैं जिन्हें आप नहीं पा सकते. ये दोनों ही बातें सच हैं। अपनी शक्तियों और योग्यताओं को पहचानने से आपमें आत्मविश्वास आएगा और दूसरों की सामर्थ्य और कुशलताओं को पहचानने से उनके भीतर आत्मविश्वास जगेगा।आप किसी से भी कमतर नहीं हैं पर ऐसे बहुत से काम हो सकते हैं जिन्हें दूसरे लोग वाकई कई कारणों से आपसे बेहतर कर सकते हों इसलिए अपने दिल को छोटा न करें और स्वयं को विकसित करने के लिए सदैव प्रयासरत रहें।
 6. मुझमें ज़रूर कोई कमी होगी तभी मुझे ठुकरा दिया गया।यह किसी बात का हद से ज्यादा सामान्यीकरण कर देने जैसा है और ऐसा उन लोगों के साथ अक्सर होता है जो किसी के साथ प्रेम-संबंध बनाना चाहते हैं।एक या दो बार ऐसा हो जाता है तो उन्हें लगने लगता है कि ऐसा हमेशा होता रहेगा और उन्हें कभी सच्चा प्यार नहीं मिल पायेगा। प्यार के मसले में लोग सामनेवाले को कई कारणों से ठुकरा देते हैं और ऐसा हर कोई करता है। इससे यह साबित नहीं होता कि आप प्यार के लायक नहीं हैं बल्कि यह कि आपका उस व्यक्ति के विचारों या उम्मीदों से मेल नहीं बैठता, बस इतना ही।
 7.यदि मैं खुश रहूँगा तो मेरी खुशियों को नज़र लग जायेगी। यह बहुत ही बेवकूफी भरी बात है. आपकी ज़िंदगी को भी खुशियों की दरकार है। आपका अतीत बीत चुका है।यदि आपके अतीत के काले साए अभी भी आपकी खुशियों के आड़े आ रहे हों तो आपको इस बारे में किसी अनुभवी और ज्ञानी व्यक्ति से खुलकर बात करनी चाहिए। अपने वर्तमान और भविष्य को अतीत की कालिख से दूर रखें अन्यथा आपका भावी जीवन उनसे दूषित हो जाएगा और आप कभी भी खुश नहीं रह पायेंगे। कोई भी व्यक्ति किसी की खुशियों को नज़र नहीं लगा सकता। इन अचेतन विचारों से कैसे उबरें? यह बहुत आसान है।जब भी आपके मन में कोई अचेतन या अतार्किक विचार आये तो आप उसे लपक लें और अपनी विचार प्रक्रिया का अन्वेषण करते हुए उसमें कुछ मामूली फेरबदल कर दें।
इसी तरह के और भी अचेतन व अतार्किक विचार हो सकते हैं जिनकी हमें पहचान करनी है और समय रहते ही उन्हें सकारात्मक विचार से बदल देना है।मुझे आशा है कि आपको अपने जीवन में बदलाव लाने के कुछ सूत्र अवश्य मिले होगे।कोई भी बदलाव सहज नहीं होता बल्कि उसके लिए सतत प्रयासरत रहना पड़ता है। यदि लिखी बातों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के बाद आप उन्हें अपने जीवन में उतरने का प्रयास करेंगे तो आपको कुछ सफलता ज़रूर मिलगी।

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