Categories
डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

सुभाष का राष्ट्रगान-‘‘भारत नाम सुभागा’’

पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने साहस का परिचय देते हुए केन्द्र की मोदी सरकार से भी पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विषय में स्पष्ट कर दिया है कि नेताजी 1945 के पश्चात भी जीवित रहे थे। उन्होंने ऐसी 64 फाइलों को जनता के सामने लाकर पटक दिया, जिनसे स्पष्ट होता है कि नेताजी की 1945 में विमान दुर्घटना में हुई मृत्यु केवल एक कहानी थी। वास्तव में उनकी मृत्यु को लेकर यह सब कुछ जो भी हुआ है या होता रहा है, वह इस देश के राजनीतिक तंत्र का सबसे बड़ा घोटाला है। हम लोकतंत्र का नाटक करते रहे और लोक से ही ‘छल’ करते रहे। ‘धर्मनिरपेक्ष लोकछलियां’ ने देश की सत्ता हथिया ली और देश के लिए सबने अपना धर्म घोषित किया कि ‘सुभाष का सच’ सामने ना आने देंगे।

जो कम्युनिस्ट सुभाष चंद्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा करते थे, उन्होंने पश्चिम बंगाल में देर तक शासन किया। उनके शासन का वाक्यसूत्र था कि इस देश के गौरवपूर्ण इतिहास को मिटाओ और अपनी मान्यताओं को इस देश पर थोप दो।’ उस ‘गौरवपूर्ण इतिहास मिटाओ अभियान’ में सुभाष चंद्र बोस का आना अनिवार्य था। क्योंकि सुभाष भारत की उस परंपरा के मानस पुत्र थे जिसे इस देश के स्वातंत्र्य संग्राम की मूल धारा कहा जा सकता है। निश्चय ही वह मूलधारा इस देश की क्रांतिकारी धारा थी। जिसका उद्देश्य विदेशियों को यथाशीघ्र इस देश की पावन भूमि से उठाकर फेंक देना था। वह पूर्ण स्वराज्य चाहते थे और स्वराज्य भी महर्षि दयानंद के सपनों का स्वराज्य। वह स्वराज्य जिसके लिए राजा दाहर (712 ई.) से लेकर सम्राट मिहिर भोज, राजा आनंदपाल, राजा भीमपाल, राजा जयपाल, राजा सुहेल सिंह सहित सम्राट पृथ्वीराज चौहान, राणा संग्राम सिंह, महाराणा प्रताप सिंह, छत्रपति शिवाजी, छत्रसाल, वीरबंदा बैरागी, गुरूतेगबहादुर, गुरू अर्जुन सिंह, सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे इत्यादि अनेकों महापुरूषों तक ने अपना बलिदान दिया था। एक षडय़ंत्र के अंतर्गत अंग्रेजों ने हमारे इन सभी बलिदानी महापुरूषों का बलिदानी और गौरवमयी इतिहास मिटाने का हरसंभव प्रयास किया। उन्हीं अंग्रेजों के मानस पुत्रों ने जब आगे चलकर दिल्ली और कलकत्ता संभाला तो उन्होंने भी अपने ‘आकाओं’ को यह विश्वास दिलाया कि जिस दिल्ली से उन्होंने इस देश पर पैंतीस वर्ष तक शासन करते हुए और उससे पहले कलकत्ता से शासन करते हुए भारत और भारतीयता को मिटाने का हरसंभव प्रयास किया, हम उस परंपरा को यथावत जारी रखेंगे।

इतिहास को और सुभाष को यदि इस दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाए कि सुभाष भारत की जिस बलिदानी परंपरा के मानसपुत्र थे उसे और सुभाष ने जिस परंपरा का निर्वाह कर इस देश को स्वतंत्रता की राह पर डालने का अप्रतिम और रोमांचकारी इतिहास रचा उसे मिटाने के कुचक्र में तो इस देश की हजार वर्षीय पूरी बलिदानी और क्रांतिकारी परंपरा को ही मिटा दिया गया है, तो ज्ञात होगा कि अभी तो एक सुभाष की मृत्यु का या उसके बलिदान का ही रहस्य खुला है, यहां तो कितने ही सुभाष अभी भी उपेक्षा की रद्दी की टोकरी में पड़े हैं। यहां उनकी मजारों पर नित्य कपड़ा फेरा जाता है, दीप जलाये जाते हैं प्रकाश किया जाता है, जो इस देश की बलिदानी परंपरा के बलिदानियों के ‘कफन’ चुराया करते थे।

सुभाष चंद्र बोस इस देश के इतिहास को और उसके मर्म को जानते थे। इसलिए वह इस देश के युवकों को तो अपने बलिदानी इतिहास से अवगत कराते ही थे साथ ही देश की नारियों को भी अपने देश की वीरांगनाओं का बलिदानी इतिहास पढ़ाना भी नही भूलते थे। उन्होंने आजाद हिंद फौज की ‘रानी झांसी रेजीमेंट’ को संबोधित करते हुए कहा था-

‘‘इतिहास हमें यह बताता है कि प्रत्येक साम्राज्य का पतन भी उसी प्रकार से होता है जिस प्रकार से उसका उदय तथा उत्थान होता है, और अब वह समय आ गया है कि ब्रिटिश साम्राज्य संसार के धरातल से अदृश्य हो जाए। हम अपनी आंखों से देखते हैं कि किस प्रकार यह साम्राज्य संसार के इस भाग से अदृश्य हो गया है। यह संसार के दूसरे भाग से भी अदृश्य हो जाएगा और भारतवर्ष से भी ……

यदि यहां पर अथवा कहीं और जगह कोई ऐसी नारी हो जो यह सोचती हो कि राइफल कंधे पर रखना एक ऐसा कार्य है जो कि स्त्रियों के लिए नही है, तो मैं उससे इतिहास के पृष्ठ पलटने को कहूंगा। सन 1857 के गदर में, जो कि भारत की आजादी का युद्घ था, बहादुर झांसी की रानी ने क्या किया? यह रानी लक्ष्मीबाई ही थी जिन्होंने खुली हुई नंगी तलवार को हाथ में लेकर घोड़े पर सवार होकर अपने सैनिकों का युद्घ क्षेत्र में नेतृत्व किया।’’

सुभाष चंद्र बोस के इस भाषण पर असंख्य हिंदू, मुस्लिम और सिक्ख लड़कियों ने ‘रानी लक्ष्मीबाई रेजीमेंट’ में अपना नाम लिखाया, और बिना सिर का मोल लिये जब समय आया तो इस देश पर बलिदान हो गयीं। आज इस देश को उन बलिदानी वीरांगनाओं के नाम तक ज्ञात नही हैं। जिन्होंने इस बाग को अपने खून से सींचा। इसलिए मैं कहता हूं कि न जाने कितने ‘सुभाषों’ को अभी खोजना होगा।

एक सुभाष ही ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने हमसे खून मांगा था, और बदले में आजादी देने का वचन दिया। उनका यह कार्य विश्व इतिहास में अनुपम था। साथ ही उस अहिंसावादी गांधी परंपरा के मुंह पर एक तमाचा भी था जो खून के नाम से ही डरती थी। सुभाष ने भारत की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। इससे गांधीवादी आंदोलन उस समय फीका पड़ गया था। यह कितनी अजब बात थी कि गांधीजी को लोग धन-जेवर देते थे, क्योंकि वह अपने लोगों से यही मांगते थे, और सुभाष को लोग अपना खून देते थे। क्योंकि वह धन-जेवर न मांगकर खून मांगते थे।

कारण कि सुभाष जानते थे कि आजादी विलासिता के साधनों से नही आती है, उसके लिए बलिदान चाहिए, क्योंकि आजादी की साधना रक्त से ही पूरी होती है। इसलिए सुभाष और गांधी की रणनीति में आकाश-पाताल का अंतर था। गांधी की कांग्रेस जिस राष्ट्रगान को अपने ‘अधिनायक’ अंग्रेजों के लिए गाती रही, उस जन-गण-मन अधिनायक जय हे’ को सुभाष इस देश के लिए सर्वथा अनुपयोगी और इस देश की बलिदानी परंपरा और इसकी माटी के सम्मान के विरूद्घ मानते थे। उनके विषय में यह तथ्य आज कितने लोगों को ज्ञात है कि उनका ‘राष्ट्रगान’ अलग था। जिसे हम पाठकों की सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं। वह राष्ट्रगान था-

सब सुख चैन की बरखा बरसे भारत भाग है जागा।
पंजाब, सिन्ध, गुजरात, मराठा, द्राविड़, उत्कल, बंगा।।
चंचल सागर, विन्ध्यहिमालय नीला जमुना गंगा,
तेरे नित गुन गायें, तुझ से जीवन पायें, सब तन पाये आशा।
सूरज बनकर जग में चमके भारत नाम सुभागा।।
जय हो, जय हो, जय हो, जय-जय-जय हो।
भारत नाम सुभागा।
सुबह सकारे पंख पक्षेरू तेरे ही गुनि गाये बास भरी
भरपूर हवायें हमारे जीवन में रस लायें,
सब मिलकर हिंद पुकारें जय आजाद हिंद के नारे
प्यारा देश हमारा।
सूरज बनकर जग में चमके भारत नाम सुभागा।
जय हो, जय हो, जय हो, जय-जय-जय-जय-जय हो।
भारत नाम सुभागा।
सबके दिल में प्रीत बसावे तेरी मीठी बानी।
हर सूबे के रहने वाले हर मजहब के प्राणी।
सब भेद फर्क मिटा सब गोद में तेरी आके,
गूंथे प्रेम की माला।
सूरज बनकर जग में चमके भारत नाम सुभागा।।
जय हो, जय हो, जय हो, जय-जय-जय-जय-जय हो।
भारत नाम सुभागा।

इस राष्ट्रगान में राष्ट्र की वंदना है, राष्ट्र का संकीर्तन है। अंग्रेजों के चाटुकारों को और आजादी के पश्चात इस देश के सत्ताधिकारी बने लोगों को इस राष्ट्र की वंदना से कोई सरोकार नही था इसलिए उन्होंने अपने ‘अधिनायक’ की वंदना जारी रखी और यह देश अपने सुभाष की ‘राष्ट्र वंदना’ को भूलकर पिछले सत्तर वर्षों से ‘अधिनायकी’ वंदना में लगा पड़ा है।

अब इस देश में सचमुच नई भोर हो रही है। इसका संकेत दिया है-ममता बैनर्जी ने नेताजी की मृत्यु संबंधी रहस्य से पर्दा उठाकर। उन्होंने एक ही झटके में यह सिद्घ कर दिया है कि पिछले सत्तर वर्ष से हमारे सामने इस प्रकरण में जितने भर भी आयोग गठित किये गये या जांच समितियां बैठायी गयीं वे सबके सब इस देश के साथ किये गये ‘छल’ थे। उन्होंने कहानियां लिखीं और अपने आकाओं को प्रसन्न करने के लिए उनकी मनपसंद रिपोर्ट दे दी। अभी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना शेष है।

इस दिशा में सारे देश की अपेक्षाएं और आशाएं अब प्रधानमंत्री मोदी की ओर है। यह फैजाबाद के ‘मौनी बाबा’ का सच सामने लायें और यदि वही सुभाष थे तो प्रभु राम की इस नगरी में राष्ट्रीय नही अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक स्मारक बने जो सुभाष के लिए समर्पित हो, उनकी पूरी जीवनी और उन रहस्यों को उस स्मारक के पत्थरों पर उकेरा जाये, जो इस देश की पीढिय़ों के लिए प्रेरणादायी हो सकते हैं। हो सकता है गांधीजी ने ‘हे राम!’ का अपना कथित अंतिम वाक्य इसलिए बोला हो कि रामजी की अयोध्या नगरी (फैजाबाद) में वास करने वाले सुभाष को प्रभु राम सुरक्षित रखें। हमारा ‘राम’ हमें अपनी नगरी में ही मिल जाये तो इससे बड़ी कोई बात नही हो सकती। उसके वनवास का समय अब पूर्ण हो चुका है। उसे ‘गुमनामी’ से उठाकर संसद के प्रांगण में एक विशाल मूत्र्ति के रूप में स्थापित किया जाना सारे देश की आवाज है। मोदी जी से अपेक्षा है कि वह देश के ‘मन की बात’ को अवश्य सुनेंगे।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betnano
betyap giriş
hititbet giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betnano
betnano
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
jojobet
jojobet
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet