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इतिहास के पन्नों से

नेहरू ने ब्रिटिश सत्ता से देश को मुक्त कराने वाले देश के नायकों का हक़ ही नहीं छीना, उन पर घोर अत्याचार भी किये

कांग्रेस के हाथ में १९४७ में देश की बागडोर इसलिए आई कि कांग्रेस ने १९४५ के केंद्रीय विधान सभा का चुनाव इस प्रतिज्ञा के साथ जीता था कि मुस्लिम लीग की माँग देश का विभाजन कभी नही स्वीकार करेगी।.गांधी जी की लाश पर ही पाकिस्तान बनेगा। कांग्रेस ने देश के हिंदू मतदाताओं से विश्वासघात करके बंटवारा कर पाकिस्तान को जन्म दिया और देश की सत्ता प्राप्त की। नेहरू ने लालक़िले से घोषणा की कि हमने देश को गांधी जी की अहिंसा के आंदोलन के माध्यम से स्वतंत्र कराया। सरासर झूठ बोला। जबकि सत्य यह था कि देश को स्वतंत्रता सुभाष बोस की आज़ाद हिन्द सेना के सशस्त्र आंदोलन के चलते मिली। यदि नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारी न होते तो कांग्रेस देश की स्वाधीनता का सौदा अंग्रेजों से कर चुकी होती। ब्रिटिश संसद में इंडिया इंडिपेंडेंस एक्ट पर बहस करते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने भारत को स्वाधीनता देने के बारे में ब्रिटेन की सैनिक कमज़ोरियों को बताया। उस समय उन्होंने कहा था कि भारत में ब्रिटिश सेना में काम कर रहे भारतीय सैनिक अब हमारे प्रति वफादार नहीं रहे हैं। वे अब ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ बागी हो गए हैं और कभी भी कोई भी बड़ी घटना घटित हो सकती है।

ब्रिटेन में अब वह ताक़त नहीं है जिससे वह इतनी बड़ी बगावत पर नियंत्रण स्थापित कर सके। प्रधानमंत्री एटली ने अपने भारत भ्रमण में और स्पष्ट किया कि सुभाष चंद्र बोस व उनकी भारतीय राष्ट्रीय सेना के आंदोलन ने ब्रिटिश सेना की ब्रिटेन के प्रति वफ़ादारी को कमजोर कर दिया। इसलिए हमें भारत को स्वाधीन करना पड़ा।

गांधी के आंदोलन का भारत को स्वाधीनता देने में कोई योगदान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि नेहरू ने देश की स्वाधीनता का जो इतिहास लिखवाया उसने सुभाष चंद्र बोस के इतने महत्वपूर्ण आंदोलन के लिए कुछ भी नहीं लिखवाया। भारत की जनता को अंधकार में रख कर कांग्रेस के नरम दल के नेता गांधी की कांग्रेस और गरम दल के नेताओं के बारे में ब्रिटिश सत्ता का अलग-अलग दृष्टिकोण था। क्रांतिकारियों को लेकर तो उनका दृष्टिकोण पूर्णतया भिन्न था।

गोखले कहते थे कि हम ब्रिटिश को भारत में रखकर उन्नति करेंगे। गरम दल के नेता तिलक कहते थे कि हम भारत को स्वतंत्र करेंगे। गरम दल के नेता तिलक को जल्द से मार देने के लिए उन्हें ब्रिटिश सरकार बर्मा के माण्डले जेल में कठिन सजा देते रहे जबकि नरम दल के नेताओं को महलों में रखते हैं। क्योकि ब्रिटिश सरकार को उनसे कोई डर नहीं था। कांग्रेस का प्रस्ताव चाहे पूर्ण स्वराज की लड़ाई लड़ने का होता है, पर नरम दल के नेता गांधी ने पूर्ण स्वराज की लड़ाई नहीं लड़ी। वो कभी तुर्की की लड़ाई लड़ते , कभी नमक की लड़ाई लड़ते थे। ताकि अंग्रेज यहाँ सुरक्षित रह सकें।अंग्रेज़ी राज को बनाये रखने के लिए गांधी नारा देते हैं – अंग्रेजों भारत छोड़ो, पर अपनी सेना यहाँ रखो। अंग्रेज अपनी सेना यहाँ रखेंगे तो भारत क्यों छोड़ेंगे। सुभाष चंद्र बोस ने वीर सावरकर के सैनिकीकरण के एक रेडियो संदेश में प्रशंसा करते हुए इस बात पर प्रसन्नता प्रकट की कि वह हिंदुओं का सैनिकीकरण करवा रहे हैं। वे ही प्रशिक्षित सैनिक भारतीय राष्ट्रीय सेना को को नई शक्ति प्रदान करेंगे।

हमारी सेना में सुभाष चंद्र बोस द्वारा भर्ती कराए गए 55000 सैनिक सम्मिलित हुए। नेहरू ने भारतीय सेना के सैनिकों को सुभाष बोस की तस्वीर रखने पर प्रतिबंध लगाया। ने सुबह बोस की वायुयान दुर्घटना में मृत्यु नहीं हुईं , उसके साक्षी सुभाष बोस के निजी डॉक्टर राव को जेल में रखा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के कारण जानने के लिए कई कमीशन बैठाए गए परंतु केवल इस बात को लेकर बैठाए गए कि सुभाष बोस वायुयान दुर्घटना में मारे गये। देश को आज़ाद हिन्द सेना देने वाले वीर सावरकर को नेहरू ने गांधी हत्या के बाद जान से मरवाने के लिए अपने आदमी भेज कर उन पर जान लेवा हमला करवाया। वीर सावरकर को मरवाने में असफल होने पर उन्हें गांधी हत्या कांड में फ़साया। जज आत्माचरण द्वारा दोष मुक्त छोड़ देने के बाद सरकार को आदेश दिया कि उनको इस हत्या कांड में किसने फँसाया ? इसकी जांच हो। परंतु कांग्रेस ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। आज संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस के गिरेबाँ पर यह बहुत बड़ा दाग है कि उसने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की और सही तथ्यों को सामने नहीं आने दिया।

– इंजीनियर श्याम सुंदर पोद्दार
महामंत्री वीर सावरकर फाउंडेशन

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