गंदे लोगों का संसर्ग देता है

दरिद्रता और पाप

download (4)– डॉ. दीपक आचार्य

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जनसंख्या विस्फोट के मौजूदा दौर में इंसानों की ढेरों प्रजातियों का अस्तित्व बढ़ता जा रहा है। कुछ नई किस्म के लोगों की नई प्रजातियां जन्म ले रही हैं और कई सारे ऎसे हैं जिन्हें इंसानों की किसी प्रजाति में नहीं रखा जा सकता है। इन्हीं में एक किस्म उन लोगों की है जो मन-मस्तिष्क के मैले और तन के गंदे हैं, इनके शरीर तथा मुखमण्डल से गंदगी साफ-साफ झलकती  भी है।

कई लोगों के रहने का तरीका ही गंदा है, जमाने भर की गंदगी इन्हें पसंद होती है। कइयों के बाल बेवजह बढ़े हुए हैं और ज्यादातर बार इनका मुख बालों को इधर-उधर करने में ही लगा रहता है। अनचाहे बालों को हटाने की फुर्सत जिन्दगी भर नहीं मिल पाने से इनका झींतरिया दर्शन भालुओं को भी लजाता है। फिर ऊपर से गोल-मटोल शातिर आँखों को मोटे काँच की फ्रेम वाली खिड़की से जब ये सामने वाले की ओर जिस कुटिल निगाह से झाँकते हैं तब लगता है जैसे गिद्ध की तरह नोंच ही डालने वाले हैं।

कुछ ऎसे हैं जिनके बाल तो ठीक हैं मगर संवारे हुए कभी नहीं होते। शायद बरसों से बालों को तेल का स्पर्श तक नहीं मिला हुआ दिखता है। कइयों के नाखून बढ़े हुए होते हैं और जाने कितने पखवाड़ों का मैल इनके नाखूनों में जमा रहकर इनका सहचर बना हुआ होता है। कइयों का व्यवहार पशुओं से भी गया बीता है और जो इनके सामने जाता है ये भौं-भौं करने लगते हैं, बेवजह झल्लाते और चिल्लाते हैं। तब लगता है कि ये यदि श्वान होते तो उम्दा किस्म में शुमार हो ही जाते, और जो इनके सामने जाता उसे जरूर काट लेकर ही चैन लेते।

कई लोग पागलों की तरह व्यवहार करते हैं। इनमें आंशिक और आधे से लेकर पूरे पागल सभी शामिल हैं। यह जरूरी नहीं कि अनपढ़ या सामान्य आदमी ही ऎसी असामान्य हरकतें करते हैं बल्कि आजकल तो खूब पढ़े-लिखे और ऊँचे ओहदों पर बैठे हुए लोगों में ऎसी हरकतें करने वालों की तादाद खूब है। इन असामान्य व्यवहार और कर्कश बोलचाल के आदी लोगों की बनिस्पत अनपढ़ और सामान्य लोग ज्यादा सभ्य लगते हैं जो बोलने और अपने व्यवहार के तरीकोें का अर्थ अच्छी तरह समझते हैं और वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा इंसान को करना चाहिए।

हमारे आस-पास से लेकर दूर-दूर तक ऎसे लोगों का बाहुल्य आजकल आम बात है जिनकी बोलचाल और व्यवहार इंसानियत से मेल नहीं खाते। बड़े-बड़े लोग जल्दी पटरी से उतर जाते हैं और ऎसा व्यवहार करने लगते हैं जैसा कि नालायक और जाहिल लोग भी नहीं करते हैं। कई बड़े-बड़े लोग हमारे संपर्क में अक्सर आते रहते हैं जिन्हें देख कर लगता है कि अपने पद की गरिमा को मटियामेट करने के लिए इससे बुरा कोई और शख्स कभी नहीं मिल सकता था।

ऎसे लोगों का न स्वयं पर विश्वास होता है, न औरों पर विश्वास कर पाने का साहस। ऎसे लोग ताजिन्दगी अविश्वास और अंधेरों के बीच जैसे-तैसे जीते हुए अपयश प्राप्त करते हुए समय गुजारने को विवश होते हैं। इन्हें कोई भी अच्छा नहीं कहता बल्कि सारे सहकर्मी भी इनसे हैरान-परेशान ही रहते हैंं।

इस किस्म में बड़े-बड़े साहबोें से लेकर लोकप्रियों तक के नाम गिनाए जा सकते हैं जिनका जीवन सब कुछ होते हुए भी अपकीर्ति से साक्षात कराता है और वह भी इस कारण कि इनका व्यवहार घटिया होता है तथा वाणी की कर्कशता के तो कहने ही क्या। इस किस्म के लोग जहाँ भी रहते हैं वहाँ खुद भी असन्तुष्ट रहते हैं और दूसरों को भी तंग करते रहते हैं। इन लोगों की वजह से कलह और तनावों का माहौल पसरा रहता है ।

इस प्रजाति के लोग खुद भले कितने ही बड़े पद और कद पा जाएं, ऎसे लोगों में बौद्धिक तत्व का अभाव रहता है और इनके कर्कश तथा हिंसक व्यवहार के कारण जो काम इनके जिम्मे होता है वह लम्बा खींचता चला जाता है, कभी समय पर पूरा नहीं होता। आदमियों की यह प्रजाति आजकल सामान्य तौर पर दर्शनीय हो गई है।  न किसी को ये पसंद आते हैं, न कोई इन्हें पसंद करता है।

मजबूरियों को छोड़ दिया जाए तो ऎसे विचित्र और असामान्य लोगों के पास जाने से भी लोग हिचकते हैं। आजकल ऎसे खूब लोग हमारे आस-पास के गलियारों में भी विद्यमान हैं जिन्हें देखना भी बुरा लगता है। ऎसे लोगों के पास जाने से अच्छे लोग कतराते हैं और इनसे दूरी बनाए रखना ही पसंद करते हैं।

यह प्रकृति का शाश्वत नियम है कि जो घृणित किस्म के लोग हैं वे अपनी घृणा को छिपाए रखने के लिए आडम्बर कुछ ज्यादा ही करते हैं और बेवजह लोगों को अपने पास जमा कर रखने के आदी होते हैं। बेचारे उन लोगों की मानसिकता कितनी विचित्र हो जाती है जिन्हें ऎसे गंदे लोगों से काम पड़ता है या उनके पास कुछ क्षण गुजारने को विवश होना पड़ता है।

ऎसे गंदे किस्म के लोगों का सान्निध्य अथवा किसी भी प्रकार संपर्क भी सामने वालों के लिए घातक होता है क्योंकि ऎसा व्यवहार करने वाले लोग घोर दरिद्री किस्म के होते हैं जो चाहते हुए भी अपने में कोई बदलाव नहीं ला सकते। ऎसे दरिद्रियों का संपर्क भी दरिद्रता और पाप देता है। ऎसे गंदे लोगों से दूरी ही बनाये रखें ताकि हमारा आभामण्डल दूषित न हो।

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