चीन मामले पर प्रधानमंत्री मोदी के रक्षा कवच के रूप में सामने आए शरद पवार

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जब भारत की राजनीति पूर्णतया अस्तव्यस्तत हुई पड़ी है और राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थों से परे की सोचने मेंं सर्वथा अक्षम नजर आते हैं , तब कुछ ऐसे लोगों को देखकर सुखद आश्चर्यय होता है जो कई बार राष्ट्र हित को सर्व प्रथम रख कर राजनीति करने को प्राथमिकता देते हैंं और शरद पवार ऐसे ही राजनीतिज्ञों में से एक हैं ।

चीन मामले को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर हैं. ऐसे में कांग्रेस के सहयोगी एनसीपी प्रमुख शरद पवार चीन मामले पर मोदी सरकार के बचाव में खड़े दिखे हैं. चीन ही नहीं बल्कि मोदी सरकार को कांग्रेस ने जब-जब घेरने की कोशिश की है तो शरद पवार हर बार मोदी के रक्षा कवक्ष बनकर सामने खड़े नजर आए हैं.

लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 जवानों की शहादत को लेकर कांग्रेस सख्त तेवर अख्तियार किए हुए है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर हैं और एक के बाद एक सवाल खड़े कर रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस के सहयोगी एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने चीन मामले पर मोदी सरकार के बचाव और राहुल गांधी को ही आईना दिखाने का काम किया है. हालांकि, चीन ही नहीं बल्कि मोदी सरकार को कांग्रेस जब-जब घेरने की कोशिश की है तो शरद पवार हर बार मोदी के रक्षा कवच बनकर सामने खड़े नजर आए हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बारे में सच बोलें और अपनी जमीन वापस लेने के लिए कार्रवाई करें तो पूरा देश उनके साथ खड़ा होगा. इस पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, ‘हम नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था. चीन ने हमारी 45 हजार स्क्वेयर किमी जमीन पर कब्जा कर लिया था. यह जमीन अब भी चीन के पास है, लेकिन वर्तमान में मुझे नहीं पता कि चीन ने जमीन ली है या नहीं, मगर इस पर बात करते वक्त हमें इतिहास याद रखना चाहिए. राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए.’
पवार ने कहा कि यह किसी की नाकामी नहीं है. अगर गश्त करने के दौरान कोई (आपके क्षेत्र में) आता है, तो वे किसी भी समय आ सकते हैं. हम यह नहीं कह सकते कि यह दिल्ली में बैठे रक्षा मंत्री की नाकामी है. उन्होंने कहा कि मुझे अभी युद्ध की कोई आशंका नहीं दिखती है. चीन ने जाहिर तौर पर हिमाकत तो की है, लेकिन गलवान में भारतीय सेना ने जो भी निर्माण कार्य किया है वह अपनी सीमा में किया है.

चीन मामले को लेकर पिछले दिनों हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कई सवाल उठाए और कहा था कि अब भी देश एलएसी से जुड़े कई मुद्दों पर अंधेरे में है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल खड़े किए थे कि सैनिकों को बिना हथियार के किसने भेजा था. इस पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने नसीहत देते हुए कहा कि चीन सीमा पर सैनिक हथियार लेकर गए थे या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय समझौतों द्वारा तय होता है. हम को ऐसे संवेदनशील मुद्दों का सम्मान करना चाहिए.
बता दें कि राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी शरद पवार के बयान के गहरे राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. 2014 के बाद से कई बार ऐसे मौके आए हैं जब एनसीपी प्रमुख शरद पवार बीजेपी के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर खड़े नजर आए हैं. खासकर यह तब देखनो मिला है जब किसी मुद्दे पर मोदी सरकार को कांग्रेस ने घेरने की जबरदस्त कोशिश की हो.

 

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी भी एनसीपी प्रमुख शरद पवार को सार्वजनिक मंच से अपना गुरु बता चुके हैं. मोदी सरकार में ही शरद पवार पद्म विभूषण से भी नवाजे गए. शायद यही वजह भी है की जब भी मोदी किसी मुसीबत में होते हैं शरद पवार हमेशा उन्हें मदद के लिए तैयार रहते हैं. राफेल डील मामले पर उन्होंने मोदी सरकार को क्लील चिट दिया था तो सीएए पर सरकार के समर्थन में खड़ने नजर आए थे.

राफेल डील के मामले पर जब पूरा विपक्ष मोदी सरकार को घेरने में जुटा हुआ था. राहुल गांधी राफेल मामले को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमलावर थे. ऐसे में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने विपक्ष से अलग अपनी राजनीति लाइन खींचते हुए मोदी सरकार के लिए रक्षा कवच की भूमिका में नजर आए थे. शरद पवार ने राफेल पर मोदी सरकार को एक तरह से क्लीन चिट देते हुए कहा था कि लोगों को पीएम मोदी की नीयत पर कोई शक नहीं है. उन्होंने कहा था कि राफेल विमान खरीदारी के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करने की विपक्ष की मांग ठीक नहीं है.

राफेल पर बैकफुट पर चल रही बीजेपी के लिए पवार का बयान राहत देने का काम किया था. बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर कहा था है कि पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में सच बोल रहे हैं. शाह ने राहुल गांधी पर तंज करते हुए कहा कि उन्हें कम से कम अपने गठबंधन के पुराने सहयोगी रहे शरद पवार से ही बुद्धिमानी सीखनी चाहिए.

बता दें कि 2014 महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी बहुमत के आंकड़े से 18 सीट पीछे रह गई थी. नतीजों के तुरंत बाद एनसीपी ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का ऐलान कर दिया था. गुजरात चुनाव के वक्त जब कांग्रेस समेत विपक्ष बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने की तैयारी में थी, चुनाव से ठीक पहले एनसीपी ने कांग्रेस के साथ न जाने का फैसला किया. माना जाता है कि इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला.

वहीं, पिछले साल राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर चुनाव के दौरान ये खबर थी कि एनसीपी, विपक्ष की ओर से एनडीए के सामने अपना उम्मीदवार उतारेगी. लेकिन आखिरी मौके पर एनसीपी शरद पवार ने अपना उम्मीदवार उतरने से मना कर दिया था. इसी के बाद कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद को राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर के लिए अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन जीत नहीं सके. ऐसे कई मौके आए जब शरद पवार मोदी सरकार के साथ खड़े नजर आए.

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