ऋषि दयानंद बोधोत्सव पर हमारी टंकारा यात्रा की संक्षिप्त रिपोर्ट

ओ३म्

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हमने ऋषि बोधोत्सव के अवसर पर टंकारा यात्रा का कार्यक्रम बनाया था। हमारे 6 अन्य मित्र व सहयोगी भी हमारे साथ इस यात्रा में गये व लौटे। हम रविवार 16 फरवरी, 2020 को प्रातः रेलगाड़ी से चले थे। 17 फरवरी, 2020 को सायं हम द्वारका पहुंचे थे। यहां सायं एवं अगले दिन आधा दिन द्वारिका के पर्यटन से जुड़े अनेक स्थलों का भ्रमण किया व देखा। इसी दिन अपरान्ह हम सोमनाथ मन्दिर की यात्रा के लिये बस द्वारा निकले। लगभग 250 किमी. की दूरी तय कर हम 18-2-2020 की रात्रि को सोमनाथ मन्दिर पहुंच गये। वहां बाहर से भव्य मन्दिर के दर्शन किये तथा रात्रि विश्राम किया। मन्दिर प्रांगण क्षेत्र में निर्मित व स्थापित देश के यशस्वी प्रथम उपप्रधान मंत्री एवं गृहमन्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य एवं आकर्षक मूर्ति को भी देखा। वहीं सोमनाथ मन्दिर न्यास द्वारा संचालित भोजनालय में घर जैसा भोजन किया। रात्रि विश्राम किया तथा अगले दिन पुनः मन्दिर व उसके परिसर में स्थापित अनेक कलाकृतियों सहित मन्दिर के पीछे समुद्र को निहारा। वहां मन को एक विशेष प्रकार की प्रसन्नता व ईश्वर की बनाई दिव्य कलाकृति समुद्र को देखकर ईश्वर की महिमा का अनुभव किया। सोमनाथ मन्दिर के पास ही समुद्र के किनारे पर्यटक एकत्रित होकर वहां समुद्र जल में खड़े होकर समुद्र की लहरों को निहारते व उनके आने पर पैरों के नीचे से जो रेत खिसकती है, उसका शब्दों में अवर्णनीय सुखद व विशेष अनुभव करते हैं। वहां अनेक प्रकार की वस्तुओं की दुकानें हैं जिसमें समुद्र से निकलने वाले शंख आदि पदार्थ व अन्य वस्तुयें मिलती हैं। लोग खरीदारी करते हैं। हमने भी कुछ वस्तुयें खरीदीं।

सोमनाथ मन्दिर से चलकर हम होटल और उसके बाद वीरावल स्टेशन से ऋषि दयानन्द की जन्मभूमि टंकारा की यात्रा पर राजकोट रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से एक गाड़ी द्वारा सभी सात लोग लगभग 50 किमी. दूर ऋषि दयानन्द जन्मभूमि न्यास, टंकारा परिसर में पहुंचे। वहां हमें न्यास के मुख्य सहयोगी श्री पन्नालाल जी मिले। उन्होंने हमारे निवास की सुविधाजनक व्यवस्था की। हम उनकी इस कृपा के लिए स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं और श्री पन्नालाल जी के इस सद्व्यवहार की प्रशंसा करते हैं। ईश्वर उनको भौतिक एवं आध्यात्मिक सभी प्रकार की उन्नति प्रदान करे।

आश्रम में हम 20 से 22 फरवरी, 2020 तक रहे। यहां आयोजित प्रायः सभी कार्यक्रमों में उपस्थित रहे तथा अनेक विद्वानों एवं लोगों से भी मिले। हमने उस शिव मन्दिर को भी देखा जहां ऋषि दयानन्द जी को बोध हुआ था। ऋषि दयानन्द की जन्मभूमि व जन्म-कक्ष के दर्शनों सहित जन्मभूमि में निर्मित दर्शक-दीर्घा को निहारा। आर्यसमाज टंकारा के वार्षिकोत्सव के आयोजन में भी हम उपस्थित रहे। टंकारा में बहने वाली डेमी नदी का एक वीडियो बनाया और उसे फेसबुक पर प्रसारित किया। ‘ऋषि बोध-शिव मन्दिर’ गये, उसका एक वीडियो बनाया तथा उसे भी फेस बुक के माध्यम से प्रसारित किया। ऋषि जन्म-भूमि न्यास में भोजन व आवास की सन्तोषजनक एवं प्रशंसनीय व्यवस्था की गई थी। हमें टंकारा जाकर ऋषि दयानन्द द्वारा जीवन में उठाये कष्टों को अनुभव करने का प्रयत्न करना चाहिये और कष्ट सहन करने का प्रयत्न भी करना चाहिये। इससे हमें अपने जीवन में लाभ होगा, ऐसा हम अनुभव करते हैं। ऋषि दयानन्द के अनुयायियों को अपना जीवन ऋषि के समान ही त्यागपूर्ण व तपस्वी बनाना चाहिये। ऐसा करने पर अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं।

टंकारा उत्सव में इस वर्ष गुजरात के राज्यपाल महोदय आचार्य देवव्रत जी तथा मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी पधारे थे और उन्होंने ऋषि जन्म-स्थान को अतीव भव्य बनाने की प्रेरणा, आश्वासन, पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाया। यह भी कहा कि जितना धन आवश्यक होगा उससे भी अधिक धन उपलब्ध कराया जायेगा। प्रधानमंत्री मोदी जी भी टंकारा में ऋषि दयानन्द जी का भव्य स्मारक बनाना चाहते हैं। ऐसा स्मारक जो अद्वितीय हो। राज्यपाल महोदय ने मोदी जी से अपनी भेंट के आधार पर यह जानकारी सभा में श्रोताओं को दी। हम दोनो राज्याधिकारियों के भाषण अलग से प्रस्तुत करेंगे। हमें टंकारा परिसर में आर्य विद्वान श्री विनय विद्यालंकार जी का प्रेरक उद्बोधन सुनने का दो बार अवसर मिला। महाशय धर्मपाल, एमडीएच के दर्शन भी किये। हीरो ग्रुप के स्वामी श्री योगेश मुंजाल जी के भी दर्शन किये। श्रीमती सुकीर्ति माथुर एवं श्री अविरल माथुर जी के अनेक भजनों को सुना व उनकी आडियों रिकार्डिंग की। टंकारा बोधोत्सव में श्री सत्यपाल पथिक जी सहित अनेक ऋषिभक्तों से हम मिले। वहां की पाकशाला में स्वादिष्ट भोजन किया। टंकारा में श्रद्धालुओं को प्रातः चाय व दुग्ध दोनों पेय उपलब्ध कराये जाते हैं। हमने इन सबका लाभ लिया। कुल मिलाकर हमारी टंकारा यात्रा का यह संक्षिप्त विवरण है। विस्तृत विवरण आगामी लेखों में देने का प्रयास रहेगा।

टंकारा से हम 21 फरवरी, 2020 की रात्रि को राजकोट स्टेशन पहुंचे। यहां से रेलगाड़ी से चलकर 22 फरवरी को प्रातः वडोदरा पहुंच गये। यहां से हम 90 किमी. दूर उस स्थान केवडिया गये जहां भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने देश के सर्वोपरि नेता तथा अद्वितीय राष्ट्र-नायक सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की विश्व की सबसे ऊंची, विशाल, भव्य, अद्वितीय, आकर्षक तथा नयनाभिराम मूर्ति बनवाई है। यहां सभी प्रकार की विश्व स्तरीय सुविधायें उपलब्ध होती हैं। इन सब सुविधाओं व साधनों को देखकर लगता है कि मोदी जी के कार्यकाल में देश ने उन्नति की ऊंचाईयों को छुआ है। मूर्ति के विषय में हम उसे अति भव्य, अति सुन्दर, अति प्रशंसनीय, मूर्ति का सुख अवर्णनीय, गौरवशाली आदि अनेक विशेषणों से सम्बोधित कर सकते हैं। हम अपने दूरदर्शी व विकासपुरुष श्री नरेन्द्र मोदी जी की उनके दूरदर्शी वा विजनरी कार्यों के लिये सम्मानपूर्वक प्रशंसा करते हैं। ईश्वर उनको स्वस्थ रखे और वह यशस्वी हों। उनसे देश का गौरव बढ़े। वह देश से देश के शत्रुओं को समूल समाप्त करने में समर्थ हों। देश बलशाली व यशस्वी बने। देश के शत्रुओं के लिये वह परमेश्वर का रुद्र रूप सिद्ध हों।

हमारी यात्रा का यह संक्षिप्त वृतान्त है। विस्तृत विवरण शीघ्र प्रस्तुत करेंगे। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

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