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इतिहास के पन्नों से

जो हिंदुओं के गौरवशाली इतिहास को नहीं जानते, समय लिखेगा उनका भी इतिहास

दिनेश चंद्र त्यागी

आज भी विश्व में लगभग 110 करोड़ हिंदू किस प्रकार जीवित बचे रह गए । इन्हें भी काल के विकराल गाल में समा जाने के अनेक प्रयत्न जो पहले किए गए थे , आज भी किए जा रहे हैं । मलयेशिया युगांडा , केन्या , नेपाल , श्रीलंका, बर्मा ,पाकिस्तान , बांग्लादेश और न जाने कितने देशों में और साथ ही स्वयं भारत के जम्मू-कश्मीर , नागालैंड , मिजोरम , मेघालय , त्रिपुरा ,अरुणाचल, मणिपुर , उड़ीसा , झारखंड आदि सभी प्रदेशों में हिंदुओं के विलीनीकरण के नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं ।

विश्व के 209 देशों में एकमात्र नेपाल ही वह देश था जिसके संविधान में हिंदू राष्ट्र होने का स्तर प्रदान किया गया था। परंतु वह भी माओवादी आंदोलन के दबाव में समाप्त कर दिया गया है । नेपाल नरेश को भी देश निकाला देने , महल से बाहर करने , राज संपदा पर सरकारी अधिकार करने की सभी व्यवस्थाएं तेजी से क्रियान्वित की गई । इसलिए अनेक लेख व पुस्तकें विद्वान लेखकों ने प्रकाशित किए हैं । जिनमें लिखा गया है कि आगामी 50 वर्षों अथवा कुछ अधिक में हिंदू समाप्त हो जाएंगे । वह या तो ईसाई मुसलमान बना लिया जाएंगे या मार डाले जाएंगे । जनसंख्या के आंकड़े जब 18 81 में तैयार किए गए थे तब उस समय भी एक पुस्तक लिखी गई थी – ” हिंदू एक मरणोन्मुख जाति है “- इसके उत्तर में तब स्वामी श्रद्धानंद ( महात्मा मुंशीराम) ने लिखा था :- ‘ हिंदू संगठन : हिंदुओं का सुरक्षा कवच ।

हिंदुओं की पराजय का काला इतिहास पढ़ने लिखने वाले कृपया यह भी विचार करें , जिसे स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने लिखा — ‘ भयानक आक्रमणों के बाद भी हम हिंदू जीवित रहे , क्योंकि हम जीवित रहने योग्य थे । ‘ यहां प्रस्तुत है इतिहास के कुछ अध्याय जिन पर पाठक ग्रंथ अवश्य विचार करें :–

1 — ( क ) सन 712 में मोहम्मद बिन कासिम ने पूरे सिंध प्रांत को लूटा और फिर सिंध को इस्लामी राज्य बना डाला । यह इतिहास का एक पृष्ठ है । जिसे अवश्य पढ़ना चाहिए ।

1– ( ख ) परंतु इसके 2 वर्ष बाद ही सिंध पर मेवाड़ नरेश बप्पा रावल ने आक्रमण किया और कासिम के इस्लामी राज्य को कब्र में सुला दिया । 468 वर्ष तक फिर सिंध में हिंदू राज्य स्थित बना रहा। महाराणा प्रताप के 800 वर्ष से अधिक पहले उनके पूर्वज थे महाराणा बप्पा रावल । इस इतिहास का विंसेंट स्मिथ जैसे प्रख्यात इतिहासकार ने भी उल्लेख किया है। इन्हीं बप्पा रावल ने बसाई थी रावलपिंडी ।

2 – ( क ) महमूद गजनवी ने जितनी बार भारत को लूटा वह शर्मनाक है । हिंदू पराजय का यह इतिहास अवश्य पठनीय है ।

2 (ख ) गजनबी के समय ही उसका बहनोई सालार मसूद गाजी काशी आदि स्थानों को लूटने आया , तब उसे किसने कब्र में सुलाया और देवीपाटन सरीखे अनेक हिंदू प्रतिष्ठानों को हिंदू राजा सुहेलदेव ने किस प्रकार बचाया ? – उस इतिहास को भी कभी पढ़ लेना चाहिए । गजनवी को राजपूताना के जाट वीरों ने किस प्रकार लूटा और क्या पाठ पढ़ाया कि वह फिर कभी वापस इधर नहीं लौट सका । इतिहास का यह भी तो एक पृष्ठहै ।

3 – ( क ) मोहम्मद गौरी को 16 बार युद्ध में पराजित करने वाले पृथ्वीराज चौहान 17 वीं बार उससे पराजित हुए , क्यों और कैसे ? पढ़िए प्रसिद्ध इतिहासकार के एस लाल की पुस्तक The legacy of Muslim Rule in India ” में तराइन का युद्ध गौरी ने जीता और 1206 में दिल्ली की गद्दी पर कुतुबुद्दीन ऐबक बैठा । उसके पूर्व और पश्चात भी 1000 के बाद से सन 2000 तक इतिहास की एक भी शताब्दी ऐसी नहीं थी जिसमें युद्ध के मैदान में संघर्ष की राह पर बलिदानों की अगणित श्रंखला कभी टूट चुकी हो । जगद्गुरु रामानुजाचार्य , जगतगुरु रामानंदाचार्य की परंपरा सन 1000 से 1400 के बीच में स्थापित हुई । जिसमें करोड़ों हिंदुओं को अपने धर्म पर टिके रहने का अमोघ मंत्र प्रदान किया आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित दशनाम आखाडा व्यवस्था इसके लगभग डेढ़ सहस्राब्दी पहले ही समाप्त स्थापित हो चुकी थी.।

4 (क)सिकंदर ने भारत पर ईसा पूर्व 326 मैं अपना पहला आक्रमण किया और उसने राजा को हराया ।इस इतिहास को अवश्य पढ़ें। परन्तु संसार पर विजय प्राप्त करते हुए भारत पर आक्रमण करने वाले सिकंदर को यहां ऐसा विष बुझा तीर सीने में लगा कि वापस जाते हुए रास्ते में ही वह मर गया और यूनान वापस नहीं पहुंच सका । वास्तव में पुरु को पराजित नहीं किया जा सका था । इसलिए सिकंदर वापस लौट रहा था , तब मालव व क्षुद्रकों से हुए युद्ध में वह भीषण रूप से घायल हुआ था।

( लेखक अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और ‘उगता भारत’ के कार्यकारी संपादक हैं)

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