दलितों और नारी जाति के सच्चे हितैषी थे स्वामी श्रद्धानंद

स्वामी श्रद्धानंद
  • डॉ विवेक आर्य

22 फरवरी 2025 को स्वामी श्रद्धानंद जी का जन्म दिवस दिवस था। आप पराधीन भारत के सबसे बड़े समाज सुधारकों में से एक थे। आपका जन्म पंजाब के जालंधर के तलवान नामक स्थान पर हुआ था। आपका सन्यास पूर्व नाम मुंशीराम था। आप सामाजिक परिस्थितियों को देखकर नास्तिक बन गए थे। बरेली में स्वामी दयानन्द जी के वचनामृत का पान कर आपके अँधेरे जीवन में उजाला हुआ एवं आप नास्तिक से घोर आस्तिक बन गए। आप आर्यसमाज के सदस्य बन गए एवं सक्रिय रूप से भाग लेने लगे।

आपके समक्ष बाल विधवाओं की समस्या एक चुनौती के रूप में आई। एक सज्जन की पुत्री छोटी आयु में बाल विधवा हो गई थी। वो उसका पुनर्विवाह करना चाहते थे। उस दौर में प्राचीन रूढ़िवादिता एवं अन्धविश्वास के चलते बाल विवाह किये जाते थे एवं बीमारी आदि के कारण पति की असमय मृत्यु हो जाने कारण देश में लाखों विधवाएं आजीवन नारकीय जीवन जीने को विवश थी। उस बच्चीं के पिता ने मुंशीराम जी से कहा कि मैं अपनी सुपुत्री को ऐसे हालातों में नहीं देख सकता। आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक स्वामी दयानन्द द्वारा अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश में बाल विवाह एवं पुरुषों के लिए बहुविवाह का निषेध किया गया था वहीं विधवाओं के पुनर्विवाह का विधान बताया गया था। यह उस काल में सामाजिक क्रांति करने जैसा था। स्वामी जी के आदेश को सर्वोपरि मानते हुए मुंशीराम जी ने उस बाल विधवा के पुनर्विवाह का निर्णय लिया। जब उक्त सज्जन की बिरादरी वालों को उनके इस निर्णय का ज्ञात हुआ तो उन्होंने उनका विरोध करना आरम्भ कर दिया। मुंशीराम जी ने डरे , न डिगे अपितु उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती दे दी और पर्वत के समान अपने निर्णय पर अडिग रहें। परिणाम स्वरुप 1890 के दशक में उत्तर भारत के पंजाब में विधवा पुनर्विवाह आरम्भ हुए एवं देखते ही देखते हज़ारों बच्चियों का जीवन सदा के लिए सुखमय हो गया। इस जागरण का श्रेय मुंशीराम जी और आर्यसमाज को जाता हैं।

स्त्रियों के शिक्षा दूसरी सबसे बड़ी चुनौती थी। स्वामी दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश में लिखते हैं कि नारियों के लिए आजीवन चूल्हा-चौका करना ही जीवन का उद्देश्य नहीं हैं। नारियों को पढ़ लिखकर प्राचीन काल की विदुषी गार्गी, मैत्रयी के समान बनना चाहिए और समाज हित करना चाहिये। स्वामी जी ने नारी के लिए गुरुकुल खुलवाकर शिक्षा का प्रबंध करने का विधान लिखा और यह भी कहा कि जो परिवार अपने बच्चों को शिक्षा से वंचित रखें उसे राजा दंड देने का विधान करें। यह वह दौर था जब समाज में रूढ़िवादिता के कारण नारी को अनपढ़ रखा जाता था और छोटी आयु में उनका विवाह कर दिया जाता था। मुंशीराम जी ने जब नारी जाति की इस शोचनीय अवस्था को देखा तो उन्हें बड़ा कष्ट हुआ। आपने अपने सम्बन्धी लाला देवराज जी के साथ मिलकर उत्तर भारत की सबसे पहली कन्याओं की शिक्षा के लिए समर्पित संस्था जांलधर कन्या महाविद्यालय की स्थापना की थीं। आरम्भ में यह संस्था 3 बार खुलकर बंद हुई। अनेक विरोधों एवं कष्टों का सामना करते हुए यह संस्था चल पड़ी। यहाँ पढ़ने वाली लड़कियां मंच से वेद मन्त्रों का पाठ करती और अस्त्र-शस्त्र चलाती तो दर्शक प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। इस संस्था का प्रभाव यह हुआ कि सम्पूर्ण उत्तर भारत में स्थान स्थान पर अनेकों कन्या पाठशाला, गुरुकुल आदि आर्य समाज ही नहीं अपितु अनेक संस्थाओं द्वारा खोले गए जिससे पुरे देश में नारी शिक्षा क्रांति का उद्घोष हुआ। बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओ का नारा आज से 130 वर्ष पूर्व इस प्रकार से आर्यसमाज द्वारा जमीनी स्तर पर कार्य करके प्रारम्भ हुआ था। इसी कड़ी में मुंशीराम जी द्वारा लड़कों की शिक्षा के लिए गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना 1902 में वैदिक शिक्षा दीक्षा के लिए की गई थीं। गुरुकुल कांगड़ी में धनी हो या निर्धन, सवर्ण हो या अछूत, उत्तर भारतीय हो या दक्षिण भारतीय सभी को एक जैसी सुविधा, एक जैसी शिक्षा, एक जैसे संस्कार दिए जाते थे। जो विधान स्वामी दयानन्द ने सत्यार्थ प्रकाश में लिखा था। उसी का अनुपालन किया गया था। इसी संस्था की एक अन्य शाखा कन्या गुरुकुल देहरादून नारी शिक्षा के लिए स्थापित किया गया था।

मुंशीराम जी सन्यास ग्रहण कर स्वामी श्रद्धानन्द बन गए। आप अब राष्ट्रीय स्तर के नेता बन गए थे। आपका ध्यान में देश के 6 करोड़ अछूत समझे जाने वाले दलित भाइयों की ओर गया। रूढ़िवादी समाज उनके साथ छुआछूत का व्यवहार करता था। उन्हें सार्वजानिक कुँए से पानी भरने की मनाही थीं। उनके बच्चों को उस विद्यालय में शिक्षा का अधिकार प्राप्त नहीं था, जहाँ पर सवर्ण समझे जाने वाले लोगों के बच्चें पढ़ते हो। उन्हें सवर्ण समाज के सदस्यों के साथ एक स्थान पर बैठकर भोजन करने का प्रावधान नहीं था। उन्हें समान धार्मिक अधिकार प्राप्त नहीं थे। स्वामी जी उस समय कांग्रेस के सदस्य बन चुके थे। आपने कांग्रेस के मंच से दलितों के उद्धार का निश्चय किया एवं महात्मा गाँधी जी को इस कार्य के लिए कांग्रेस द्वारा विशेष कोष बनाने का सुझाव दिया। आपने यह भी कहा कि यह नियम बनाया जाये कि हर कांग्रेस के कार्यकर्ता के घर पर अछूत को सेवक के रूप में रखा जाएँ और उसके साथ बिना किसी भेदभाव के व्यवहार किया जाएँ। ऐसे विद्यालय खोले जाएँ जहाँ पर सभी वर्गों के बच्चों को एक साथ बिना भेदभाव के शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार हो। स्वामी जी के इस प्रयास को कांग्रेस से विशेष सहयोग नहीं मिला। इससे स्वामी जी ने कांग्रेस से त्याग पत्र दे दिया। आपने जात्तिगत भेदभाव को मिटाने के लिए अपनी सुपुत्री का विवाह जातिगत बंधन तोड़कर किया था। इसके लिए आपको अपनी बिरादरी का विरोध भी सहन करना पड़ा। पर आप अपने निर्णय पर अडिग रहें।

उन्हीं दिनों सिखों के गुरु का बाग़ मोर्चा के आंदोलन में स्वामी जी आर्यसमाज के शीर्घ नेता के रूप में भाग लेते हैं। उन्हें छ: महीने का कारावास होता हैं। जेल के अनुभव आपने ‘बंदी घर के विचित्र अनुभव’ के नाम से अपनी पुस्तक के रूप में लिखे हैं। जेल से छूटकर स्वामी जी ने ‘दलितोद्धार’ एवं ‘ब्रह्मचर्य प्रचार’ को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। दिल्ली के दलित भाई जातिगत अत्याचारों से पीड़ित थे। आपने घोषणा कर दी कि आप दलित भाइयों के साथ दिल्ली के सार्वजानिक कुओं से पानी भरेंगे। आपका रूढ़िवादियों और मतान्ध लोगों ने विरोध किया। आप जुलूस लेकर सार्वजानिक कुओं से पानी भरते हैं। जुलूस पर पथरबाजी होती हैं। पुलिस के हस्तक्षेप के पश्चात शांति कायम होती हैं। स्वामी जी ने यह प्रयास देश की राजधानी दिल्ली में 1926 में किया था जबकि डॉ अम्बेडकर जी द्वारा महाड का जल सत्याग्रह इस घटना के एक वर्ष पश्चात 20 मार्च 1927 में किया गया था। स्वामी जी के प्रयासों से मंदिरों के द्वार अछूतों के लिए खुल गए। आर्यसमाज द्वारा स्वामी जी के नेतृत्व में दलितों को यज्ञोपवीत संस्कार, वेदादि धार्मिक ग्रंथ पढ़ने का अधिकार, यज्ञ करने का अधिकार दिया गया। सार्वजानिक कुओं से भेदभाव समाप्त हो गया। दलितों के बच्चों को विद्यालयों में दाखिला मिलने लगा। आर्यसमाज ने अनेकों सहभोज आयोजित किये। जहाँ पर अछूत के हाथ से सवर्णों को भोजन परोस कर छुआछूत का नाश किया जाता था। पराधीन भारत में यह जान जागरण एक विशेष क्रांति थी, जिसका श्रेय स्वामी श्रद्धानन्द और आर्यसमाज को जाता हैं। इसीलिए डॉ अम्बेडकर ने स्वामी जी को दलितों का सच्चा हितैषी लिखा हैं।

स्वामी जी हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। आप भारत के एकमात्र वैदिक सन्यासी थे। जिन्होंने जामा मस्जिद के मिम्बर से वेद मन्त्रों का पाठ कर हिन्दू मुस्लिम एकता पर बल दिया था। समाज सुधार के आपके आदर्शों को कुछ मतान्ध लोग समझ नहीं पाएं एवं एक षड़यत्र के अंतर्गत 23 दिसम्बर 1926 को आपकी हत्या हो गई। आप अपने बलिदान से सदा के लिए अमर हो गए। देश और समाज हित में आपके द्वारा किये गए कार्य को इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। एक आदर्श नेता, संगठनकर्ता, समाज सुधारक, गुरुकुल शिक्षा क्रांति के प्रणेता, स्वदेशी और स्वतंत्रता के पक्षधर, सर्वस्व अर्पण करने वाले, मानव मात्र के सच्चे समाज सुधारक, महान व्यक्तित्व को आने वाली पीढ़ियां आपसे सदा प्रेरणा लेती रहेगी।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
onwin giriş
onwin giriş
kolaybet
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
marsbahis giriş
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betkanyon
betkanyon
sahabet giriş
betkanyon giriş
betkanyon giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
onwin
onwin
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betkanyon
Betgaranti Giriş
holiganbet
holiganbet
sahabet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet giriş
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
onwin giriş
onwin giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
onwin giriş
sahabet giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
bettilt giriş