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आर्थिकी/व्यापार

भारत में पूंजी की बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए करने होंगे नवोन्मेष उपाय

केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2024-25 तक 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के आकार का बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा में प्राप्त करने के लिए, भारत में आर्थिक विकास की दर को 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष के ऊपर ले जाने की आवश्यकता होगी एवं आर्थिक विकास […]

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आर्थिकी/व्यापार कृषि जगत

समृद्ध किसान, जिय हो ! सियान के लाल

दृढ़ निश्चय, सही दिशा में किए गए परिश्रम कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण भाव अनुशासन सतत प्रयासों से क्या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता? व्यक्ति व्यक्तिगत उन्नति के साथ साथ सामूहिक समृद्धि का भी संवाहक बन जाता है| इन्हीं मानवीय गुणों से कोई भी व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के जीवन में आशा सफलता का संचार […]

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आर्थिकी/व्यापार

मुद्रा स्फीति को लम्बे समय तक सह्यता स्तर पर बनाए रखना केंद्र सरकार की एक बड़ी सफलता है

मुद्रा स्फीति का तेज़ी से बढ़ना, समाज के हर वर्ग, विशेष रूप से समाज के ग़रीब एवं निचले तबके तथा मध्यम वर्ग के लोगों को आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक विपरीत रूप में प्रभावित करता है। क्योंकि, इस वर्ग की आय, जो कि एक निश्चित सीमा में ही रहती है, का एक बहुत बड़ा भाग उनके […]

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आर्थिकी/व्यापार इतिहास के पन्नों से

हम क्या थे, क्या हो गए और क्या होंगे अभी

इतिहास की अगर हम बात करें तो जब भारत में औद्योगिकरण शुरू हुआ तो लगभग 1860-70 में सबसे पहले मारवाड़ के सिंघानिया परिवार इसी ओर अग्रसर हुए। सन् 1921 से लेकर 1937 तक उनके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों का लोकार्पण किया। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न भागों मे मारवाडियों द्वारा सभी बड़े-बड़े उद्योग स्थापित […]

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आर्थिकी/व्यापार

राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियों में तालमेल से तेज़ होगी विकास की दर

वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए संसद में दिनांक 1 फ़रवरी 2021 को प्रस्तुत किए गए बजट के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 5 फ़रवरी 2021 को मौद्रिक नीति की घोषणा की है। इस वर्ष राजकोषीय नीति को विस्तारवादी बनाया गया है ताकि आर्थिक विकास को गति दी जा सके। केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष […]

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आर्थिकी/व्यापार

बजट भी अपने आप में विशेष बजट ही सिद्ध होगा

1 फ़रवरी 2021 को भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए संसद में बजट पेश किया। यह बजट कई विपरीत परिस्थितियों में पेश किया गया है। कोरोना महामारी के चलते वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार की अर्थप्राप्ति में बहुत कमी रही है। कोरोना महामारी के समय पूरे विश्व में […]

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आर्थिकी/व्यापार

स्टार्टअप की दृष्टि से भारत बन गया है दुनिया का तीसरा देश

केंद्र सरकार द्वारा बनायी गयी सरकारी नीतियों के चलते ही स्टार्ट-अप कम्पनियों को भारत में अपना व्यवसाय प्रारम्भ करने में आसानी हो रही है। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के विभिन्न मदों में हुए सुधार के चलते भी स्टार्ट-अप कम्पनियों की बहुत मदद हो रही है। भारत के लिए यह दशक भारतीय स्टार्ट-अप कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय […]

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आओ कुछ जाने आर्थिकी/व्यापार

प्राइवेट बैंकों का कर्जा और उत्पीड़न झेलते मध्यम वर्ग के लोग

रिजवान अंसारी बैंक कर्ज या साहूकारों से मिलने वाले ऋण के सिलसिले में आमतौर पर किसानों और मजदूरों की बदहाली पर चर्चा होती है। इन बहसों के शोर में प्राइवेट बैंक कर्ज के चलते उत्पीड़न झेल रहे मध्यम वर्ग की पुकारें कहीं दबती हुई दिख रही हैं। बैंकों के इस उत्पीड़न की गंभीरता का पता […]

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आर्थिकी/व्यापार

अर्थव्यवस्था के मज़बूत होते संकेतों के बीच भारतीय बैंकों के ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियों (एनपीए) में आई कमी

देश के लिए, भारतीय बैंकों के सम्बंध में, अंततः एक अच्छी ख़बर आई है। 30 सितम्बर 2020 को समाप्त अवधि में भारतीय बैंकों के ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियों में कमी दृष्टिगोचर हुई है। 31 मार्च 2018 को भारतीय बैंकों में ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियां 10.36 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर थीं, जो 30 सितम्बर 2020 को […]

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आर्थिकी/व्यापार

स्वाभाविक कर नीति और कर ढांचे से इतना डर क्यों?

-प्रो. कुुसुमलता केडिया इस सन्दर्भ में कतिपय तथ्यों को याद कर लेना उचित होगा। अभी जो करों का ढाँचा है, वह दुनियाभर में 100 साल पुराना है। भारत में इंग्लैंड द्वारा भारत में बनाए गए कानूनों की निरंतरता में अधिकांश नीतियाँ जारी रखी गई हैं। यद्यपि ये नीतियाँ इंग्लैंड द्वारा स्वयं अपने देश इंग्लैंड में […]

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