कल्पना पालखीवाला देखने में सर्वत्र परिचित, सर्वव्यापी एवं कभी ज्यादा संख्या में दिखाई पड़ने वाली घरेलू गौरैया, अब एक रहस्यमय पक्षी बन गई है और पूरे विश्व में तेजी से दुर्लभ होती जा रही है। फुर्तीली और चहलकदमी करने वाली घरेलू गौरैया को हमेशा शरदकालीन एवं शीतकालीन फसलों के दौरान, खेत-खलिहानों में अनेक छोटे-छोटे पक्षियों […]
Category: विविधा
सुरेश चिपलुनकर “रेडियो” का नाम आते ही एक रोमांटिक सा अहसास मन पर तारी हो जाता है, रेडियो से मेरे जुड़ाव की याद मुझे बहुत दूर यानी बचपन तक ले जाती है। आज भी मुझे अच्छी तरह से याद है कि सन 1975 में जब हमारा परिवार सीधी (मप्र में रीवा/चुरहट से आगे स्थित) में […]
तुम कश्मीर, हम अखंड भारत!!
पाकिस्तान के सेनापति जनरल राहिल शरीफ ने दावा किया है कि पाकिस्तान और कश्मीर को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। कश्मीर का मसला संयुक्तराष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार जनमतसंग्रह द्वारा हल किया जाना चाहिए। कश्मीर तो भारत विभाजन का अधूरा अध्याय है। जनरल शरीफ बेचारे क्या करें? उनकी मजबूरी है। अगर पाकिस्तान का […]
शैलेन्द्र चौहान पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टाकहोम (स्वीडन) में सन् 1972 में 05 से 16 जून तक विश्व भर के देशों का पहला अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया। इसे स्टाकहोम कान्फ्रेंस के नाम से […]
कल्पतरु विवेक रस्तोगी कल एक पोस्ट लिखी थी रेडियो पर दिये जा रहे भद्दे से कार्यक्रमों के बारे में, दरअसल रेडियो के बारे में लिखने बैठा था कुछ और पर लिख कुछ और ही गया। जब लिखने बैठो तो ऐसा ही होता है, खैर आज बात मैं करूँगा सही मुद्दे की, दो दिन पहले ऑफिस […]
ब्रजकिशोर सिंह मित्रों,आप बिहार को गरीब कहकर हँसी भले हीं उड़ा लें लेकिन इस बात से आप इंकार नहीं कर सकते कि बिहार के लोगों में जो राजनैतिक विवेक है वो कई पढ़े-लिखे और समृद्ध कहलानेवाले राज्यों के मतदाताओं में भी नहीं है। यही कारण है कि चाहे छठी सदी ईसा पूर्व के बौद्ध और […]
मैगी सिंवैया: भेड़चाल बंद करें
नेसले कंपनी के ‘मैगी’ नामक खाद्य पदार्थ (नूडल्स) पर हमारे कई राज्यों ने प्रतिबंध लगा दिया है। अन्य राज्य भी नेसले कंपनी के खाद्य पदार्थों की जांच करवा रहे हैं। एक सज्जन ने नेसले कंपनी पर तो मुकदमा चला ही दिया है। उन बेचारे फिल्मी सितारों को भी फंसा लिया है, जो ‘मैगी’ वगैरह के […]
साम्प्रदायिक राजनीति…
आज के समाचारो से ज्ञात हुआ है कि शब-ए-बरात (2.6.2015) पर मिलने आये मुसलमानों के एक शिष्ट मंडल को मोदी जी ने स्पष्ट कहा है कि “वह ऐसी राजनीति में विश्वास नहीं रखते जो लोगो को साम्प्रदायिक आधार पर बॉटती है और न ही वह कभी साम्प्रदायिक भाषा बोलेंगे।उन्होंने कहा कि […]
मांगलिकता एवं समृद्धि का प्रतीक है कलश
– ललित गर्ग भारतीय संस्कृति में विविध मांगलिक प्रतीकों का विशिष्ट महत्व है। विशेषतः हिन्दू धर्म में इन मांगलिक प्रतीकों का बहुत प्रचलन है। हर मांगलिक कार्य चाहे नया व्यापार, नववर्ष का आरंभ, गृह प्रवेश, दिवाली पूजन, यज्ञ, अनुष्ठान, विवाह, जन्म संस्कार आदि सभी में इन मांगलिक प्रतीकों का उपयोग होता है, इनके बिना कोई […]
न सूट-बूट, न सूटकेस चाहिए सूझ-बूझ!
नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी तू, तू-मैं-मैं करने की बजाय उपमाओं से काम ले रहे हैं। यदि एक कह रहा है कि यह सूट-बूट की सरकार है तो दूसरा कह रहा है यह आपकी सूटकेस की सरकार से तो अच्छी है। यानि सूट-बूट की सरकार और सूटकेस की सरकार आपस में चोंचे लड़ा रही है। […]