गतांक से आगे….. वेदों का यह हाल नहीं है। वेद किन्हीं रिवाजों के बाद नहीं बने, प्रत्युत उन्होंने ही आवश्यक रिवाजों को जन्म दिया है। यज्ञोपवीत के लिए वेद इतना ही आवश्यक समझते हैं कि दूसरे कुल में जाने पर विद्या प्रारम्भ करने पर ओर मनुष्य पशरीर के अन्तिम धेय के प्राप्त करनेवाले व्रत को […]