कविता — 4 जो मौन रहकर कर्म साधना में रखता विश्वास, पसीने से लथपथ काया में जीवन की है गहरी आस। कर्मशील जीवन है जिसका निश्छलता से भरे विचार, अन्नदाता वह हम सबका सदजीवन का देता आभास।। तपती है वसुधा गर्मी से , आग बरसाता है आकाश , लू के थपेड़े खाकर भी , खेत […]
आलू को पैदा करने वाला ,….