अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैवकुटुम्बकम् ॥ (महोपनिषद्, अध्याय ६, मंत्र ७१)अर्थ – “यह मेरा अपना है और यह नहीं है अर्थात यह पराया है, इस प्रकार की गणना छोटे चित्त (सञ्कुचित मन या संकीर्ण मानसिकता ) वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों के लिए तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है।” सचमुच भारत […]