बागपत। (नीरज गुप्ता) महर्षि दयानंद के “वेदों की ओर लौटो” मिशन को आगे बढ़ाने के लिए आज की युवा पीढ़ी भी आगे आ रही है। इसी मिशन से जुड़े युवा बागपत के खट्टा गांव में बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए शिवरात्रि के पर्व को खट्टा गांव में […]
Category: पर्व – त्यौहार
बलिदान का प्रतीक भी है वसंत पंचमी
राकेश सैन वसंत पंचमी का दिन हमें पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद गौरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद गौरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। ऋतुराज बसंत, नाम लेते ही रोम-रोम पुलकित हो […]
बसन्त की मनभावन अनुभूतियां
बसंत की बकधुन: वसंत की भटकन वसंत पंचमी, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पाँचवी तिथि। भारत की छ: ऋतुओं वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर और हेमंत में वसंत ऋतु सिरमौर मानी गई है। वसंत माने पुराने पत्तों का अंत। यह नवोन्मेष की ऋतु है। ऋतुचक्र और पंचांग के फेर से अंतर पड़ता है लेकिन […]
वसन्त वसत है मन में मेरे….
वसन्त वसत है मन में मेरे बनके प्यारा राजा। वर्षा ऋतुओं की रानी है करती मन को ताजा।। राजा अपनी मुस्कुराहट से सबका मन हर लेता। रानी का द्रवित हृदय भी सबको वश में कर लेता।। दोनों की राह अलग सी है पर लक्ष्य नहीं है न्यारा। प्राणीमात्र के हितचिंतन में जीवन समर्पित सारा।। राजा […]
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल मदनोत्सव काम कुंठाओं से मुक्त होने का प्राचीन उत्सव है, जिसमें प्रेम को शारीरिक सुख से ज्यादा मन की भावना से जोड़ा गया है। मदनोत्सव पर पत्नी अपने पति को अति सुंदर मदन यानी कामदेव का प्रतिरूप मानकर उसकी पूजा करती है। बसंत ऋतु में प्रकृति नया श्रृंगार करती है। खेतों […]
कविता : नव वर्ष मंगलमय तुमको कहता
सत्य सनातन सर्वहितकारी आएगा जब चैत्र माह। नूतनता सर्वत्र दिखेगी हर्ष का होगा प्रवाह।। तब आप करेंगे अभिनंदन और मैं बोलूंगा नमन नमन। पसरेगी नूतनता कण-कण में मुस्काएंगे नयन नयन।। प्रतीक्षा करो उसकी बंधु अभी शरद यहां डोल रहा। अभी नूतनता का बोध नहीं अभी यहाँ पुरातन बोल रहा।। अभी इच्छा नहीं गले मिलन की […]
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं है अपनी ये तो रीत नहीं है अपना ये व्यवहार नहीं धरा ठिठुरती है सर्दी से आकाश में कोहरा गहरा है बाग़ बाज़ारों की सरहद पर सर्द हवा का पहरा है सूना है प्रकृति का आँगन कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं हर कोई […]
आँग्ल नववर्ष और भारतीय परंपरा
-मनमोहन कुमार आर्य आगामी 1 जनवरी, 2021 को हम नये आंग्ल वर्ष सन् 2021 में प्रवेश कर रहे हैं। इस अवसर पर लोग अपनी प्रसन्नता व्यक्त करने के लिये इसका उत्सव के रूप में स्वागत करते और एक दूसरे से मिलकर, फेसबुक, व्हटशप, इमेल आदि पर शुभकामनायें सन्देश अपने प्रिय जनों को प्रेषित करते हैं। […]
ईसा मसीह, बाइबल और क्रिश्चियनिटी
भारत भी ईसा के कथित अनुचरों के सेवा-कार्यों के छलावे से अभिशप्त होकर अलगाव की आंधी में जल रहा है. ऐसे में सेमेटिक परिवार के इस सबसे बड़े सदस्य और उनके लोगों के बारे में प्रारंभिक जानकारी होना हमारे लिये अनिवार्य आवश्यकता है. इसलिये ईसा, चर्च और बाईबल पर कुछ जानकारीपूर्ण आलेख लिख रहा हूँ. […]
ओ३म् ========= 📷 श्री राधेश्याम गोयल ‘ढाणीवाला’, नीचम का एक लेख22 दिसम्बर को ‘‘सूर्य मकर रेखा पर” पाणिनी कन्या गुरुकुल की आचार्या जी से व्हटशप पर प्रसारित होकर हमें प्राप्त हुआ है। इस लेख में लेखक की दो बातों का हम उद्धृत कर रहे हैं। 1- 22 दिसम्बर को पृथिवी पर मकर रेखा पर जब […]