(के.एस. तूफान – विभूति फीचर्स) साहित्य समाज का दर्पण है। जिस प्रकार का समाज होगा, साहित्य भी उसी प्रकार रचा जाएगा। दलित चेतना का काल हम रामायणकाल से ही मान सकते हैं, हालांकि उस समय दलितों के पक्ष में कोई खास नहीं लिखा गया और जो लिखा भी गया, वह आज की भांति न तो […]