प्रवीण गुगनानी भारत जैसे विशाल राष्ट्र मैं विवाद और विषय आते जाते रहते है और इनका उलझना सुलझना भी एक सामान्य प्रक्रिया है किन्तु जिस प्रकार से पिछले वर्षों मैं संस्कृति से जुड़े विषयों पर सरकार का रुख प्रगतिवादी होने के नाम पर भारतीयता और हिन्दुत्व का विरोधी होता जा रहा है वह एक बड़ी […]
Category: महत्वपूर्ण लेख
शक्कर की मिठास में कड़वाहट
सतीश सिंहमिठास में कड़वाहट घोलने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। उत्पाद शुल्क फिलहाल तो नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन महज इसकी चर्चा मात्र से बीते सप्ताह में इसके वायदा भाव में 2.5 प्रतिशत और हाजिर भाव में 1 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। तत्पश्चात उत्तर प्रदेश में शक्कर का भाव (मिल कीमत) तकरीबन […]
आशीष वशिष्ठदेश के आम आदमी की बात आखिरकर कौन करेगा ये यक्ष प्रश्न है। राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता या फिर मीडिया। आम आदमी किसी की प्राथमिकता नहीं है। अगर देश के किसी कोने से आम आदमी के लिए आवाज उठती है तो उसमें स्वार्थ की चासनी लिपटी होती है। नि:स्वार्थ भाव से कोई […]
बी.पी. गौतमविशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा में लगे जवानों और उन पर किये जा रहे खर्च का मुद्दा उच्चतम न्यायलय तक पहुँच गया है। विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों को सुरक्षा देनी चाहिए या नहीं, इस पर बहस भी छिड़ गई है। कोई कह रहा है कि सुरक्षा देनी चाहिए, तो किसी का […]
वैलेंटाइन डे विकृति
डा. मधु सूदन(1) वह उत्सव समाज में समन्वयता, सामंजस्य, सुसंवादिता, या भाईचारा बढाने वाला हो।(2) ऊंच-नीच या अलगता का भाव प्रोत्साहित करनेवाला ना हो।(3) समाज के अधिकाधिक सदस्यों का उत्थान करने वाला हो।(4) समाज के सभी स्तरों को स्पर्श करने की क्षमता रखता हो।(5) सांस्कृतिक परम्पराओं से जुडने की क्षमता रखता हो ।व्हॅलंटाईन डे, इनमें […]
धाराशायी हो रहे मीडियाई सैनिक
विकास गुप्ताभारतीय मीडिया का समग्र ढांचा कहीं न कहीं पाश्चात्य मीडिया के अनुसरण पर आधारित है। इतिहास गवाह हैए मीडिया शब्द को वैश्विक स्तर के अनेक पत्रकारों ने खून.पसीने से सींचा है। प्रख्यात द टाईम्स ने एक सिद्धान्त बनाया था कि समाचार पत्र भण्डाफोड़ से जीवित रहते हैं। द टाईम्स को सरकार की आवाज कहा […]
मनीराम शर्मादेश की आजादी के समय हमारे पूर्वजों के मन में बड़ी उमंगें थी और उन्होंने अपने और आने वाली पीढिय़ों के लिए सुन्दर सपने संजोये थे। आज़ादी से लोगों को आशाएं बंधी थी कि वे अपनी चुनी गयी सरकारों के माध्यम से खुशहाली और विकास का उपभोग करेंगे । देश में कुछ विकास तो […]
रेल बजट 2013-2014
केंद्रीय रेल मंत्राी ने राजस्थान के भीलवाड़ा में कोच कारखाना, बीकानेर में बड़ी लाईनों के माल डिब्बों की ओवरहॉलिंग और जयपुर में एक्जीक्यूटिव लाउॅंज के साथ हीप्रदेश को दी और कई सौगातेंनई दिल्ली, 26 फरवरी, 2013। केंद्रीय रेल मंत्राी श्री पवन कुमार बंसल ने मंगलवार को संसद में रेल बजट प्रस्तुत करते हुए रेल आधारित […]
शेष नारायण सिंहआरएसएस और बीजेपी से सहानुभूति रखने वाले टीवी चैनलों ने मीटिंग की खबर को दिन भर इस तजऱ् में पेश किया कि जैसे उस मीटिंग के बाद देश का इतिहास बदल जायेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मीटिंग में शामिल लोगों ने बताया कि बीजेपी के नेता आर एस एस-बीजेपी के सावरकरवादी हिंदुत्व […]
शाकाहारी क्यों बनें?
क्योंकि मांस खाने से दया, करूणा, सहानुभूति, प्रेम अपनत्व एवं श्रद्घाभक्ति आदि मानवीय गुणों का अंत हो जाता है। मानव दानव बनकर विचरता है। मांसाहरी का पेट एक मुर्दा घर (शमशान घाट) की तरह होता है। क्योंकि मांस वस्तुत: सड़ी हुई चीज है। जब तक जीव शरीर में रहता है उसमें दुर्गंध नही आती। परंतु […]