यज्ञ के ब्रह्मा देव मुनि जी महाराज ने आर्य समाज की मान्यताओं के अनुसार तीसरे महायज्ञ पितृ यज्ञ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि तीसरा महायज्ञ पितृयज्ञ है। उन्होंने कहा कि इस के दो भेद हैं एक तर्पण और दूसरा श्राद्ध। तर्पण उसे कहते हैं कि जिस से कर्म से विद्वान रूप देव […]