अब इस पर विचार करते हैं कि जीवात्मा जो हमारे शरीर के अंदर रहती है उसका कर्तत्व क्या है? इस बिंदु पर विचार करने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि ईश्वर , जीव और प्रकृति तीनों की स्वतंत्र सत्ता होती है। यह हमारे लिए प्रसन्नता का विषय है कि हमारे ऋषियों , […]
Category: धर्म-अध्यात्म
इदन्नमम् की सार्थक जीवन शैली ही विश्वशांति और विश्व कल्याण की एकमात्र कसौटी है। अभी तक हमने इसी विषय पर पूर्व में भी कई बार अपने विचार स्पष्ट किये हैं। अब इस अध्याय में पुन: कुछ थोड़ा विस्तार से अपने विचार इस विषय पर रखे जा रहे हैं। भर्तृहरि जी संसार में तीन प्रकार के […]
क्या है दान का महत्व ?
तैत्तिरीयोपनिषद में महर्षि ने स्नातकों के दीक्षांत समारोह के अवसर पर बतायी जाने वाली कुछ ऐसी बातों का उल्लेख किया है जिनसे हमारा जीवन व्यवहार सुधर सकता है और साथ-साथ ही संसार में प्रेमपथ का विस्तार हो सकता है। वह स्नातक से कहते हैं :- श्रद्घया देयम्। अश्रद्वया देयम्। श्रियादेयम। हिृया देयम्। भियादेयम्। संविदा देयम्। […]
ओ३म्============मनुष्य अल्पज्ञ प्राणी है। सभी लोग प्रायः सरकारी व निजी स्कूलों-कालेजों में पढ़ते हैं। भारत एक सेकुलर देश है। यहां मनुष्यों के शाश्वत व सनातन धर्म विषयक सत्य बातों की भी उपेक्षा की जाती है। उसे स्कूलों में पढ़ाया व बताया नहीं जाता जिसका परिणाम यह हुआ है कि अधिकांश हिन्दू बन्धु धर्म विषयक ज्ञान […]
सुबुद्धपाठक वृंद ! मैंने अपने पिछले लेख में लिखा था कि मनुष्य ब्रह्म और काया को देख नहीं पाता। आज इससे आगे की चर्चा करता हूँ कि क्यों नहीं विमोचन या देख पाता ? हमें ध्यान रखना चाहिए कि शरीर में छिपे हुए चेतन एवं विभु दिखाई नहीं देते। लेकिन चेतन चेतना करता रहता है […]
खल संग कलह भल नहीं प्रीति
डा. विक्रम साराभाई के जीवन की घटना है। सन 1948 में अहमदाबाद के महात्मा गांधी विज्ञान संस्थान में दो विद्यार्थी प्रयोगशाला में प्रयोग कर रहे थे। तभी प्रयोग करते समय अधिक विद्युत प्रवाह हो जाने से यंत्र जल गया। दोनों विद्यार्थी यह देखकर डर गये। उन्हें लगा कि अब गुरू जी की डांट पड़ेगी। थोड़ी […]
संयत भाषा और संयत व्यवहार कैसे आए ?
संयत भाषा और संयत व्यवहार कैसे आये ? इसके लिए वेद ने कहा है :- स्वस्ति पन्थामनुचरेम् सूय्र्याचन्द्रमसाविव। पुनर्ददताअघ्नता जानता संगमेमहि।। (ऋ. 5/51/15) इस मंत्र में वेद कह रहा है कि जैसे सूर्य और चंद्रमा अपनी मर्यादा में रहते और मर्यादा पथ में ही भ्रमण करते हैं, कभी अपने मर्यादा पथ का उल्लंघन नही करते […]
बात सोरों की है। महर्षि दयानंद जी महाराज एक सभा में भाषण कर रहे थे। बहुत से लोग उनकी बात को दत्तचित्त होकर सुन रहे थे। बातें बड़ी सारगर्भित थीं, जो लोगों को अच्छी लगती जा रही थीं। तभी उस सभा में एक हट्टा-कट्टा पहलवान सा जाट आ धमका। वह जाट अपने कंधे पर एक […]
करना होगा जीवन की सार्थकता का बोध
अभी हमारे परिवार में एक दुखद घटना घटित हुई । मेरे ज्येष्ठ भ्राताश्री की पुत्रवधू को 7 माह के गर्भ काल में एक बच्चा ऑपरेशन से पैदा हुआ । वह बच्चा केवल 30 घंटे के बाद ही इस संसार को छोड़कर चला गया। उसका संपर्क , संबंध और संस्कार हमसे मात्र 30 घंटे का रहा […]
प्रेम में सृजन है, और प्रेम में परमार्थभाव भी है। कैसे ? अब यह प्रश्न है। इसके लिए महात्मा बुद्घ के जीवन के इन दो प्रसंगों पर तनिक विचार कीजिए। महात्मा बुद्घ एक घर में ठहरे हुए थे। एक व्यक्ति जो उनसे घृणा करता था, उनके पास आया और उसने आते ही उन पर थूक […]