ओ३म् ========== मनुष्य के जीवन में सुख व दुःख की दो अवस्थायें होती हैं। सभी को सुख प्रिय तथा दुःख अप्रिय होता है। मुख्यतः हम जीवन भर वही कार्य करते हैं जिससे हमें सुखों की प्राप्ति तथा दुःखों की निवृत्ति होती हैं। जो प्रत्यक्ष दुःख होते हैं उनके निवारण के लिये तो सभी प्रयत्न करते […]