यह संसार विभिन्न प्रकार के रोग-शोक व संतापों से ग्रस्त है। एक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के रोग से पीडि़त है। हर एक व्यक्ति के स्वास्थ्य पर उसके वैचारिक चिंतन का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा करता है। यदि व्यक्ति नकारात्मक सोच रखता है तो वह असहिष्णु, चिड़चिड़ा, क्रोधी होते-होते उच्च रक्तचाप व हृदयरोगी तक […]
Category: भारतीय संस्कृति
समाधान- यह वेदों पर आक्षेप करने वाले की बुद्धिहीनता और स्वाध्याय की कमी को दर्शाता हैं। वेद चार हैं। उनके प्रधान विषय और सन्देश को समझने से सरलता से यह समझा जा सकता है कि चरों वेद क्रम के अनुसार हैं। ऋग्वेद में विज्ञान की प्रधानता है। ब्रह्मा से लेकर तृणपर्यन्त पदार्थों का उसमें निरूपण […]
सत्यार्थ प्रकाश : एक अनुपम ग्रंथ
नवम समुल्लास राकेश आर्य बागपत (प्रश्न) मनुष्य और अन्य पशु आदि के शरीर में जीव एक सा है या भिन्न-भिन्न जाति के? (उत्तर) जीव एक से हैं परन्तु पाप पुण्य के योग से मलिन और पवित्र होते हैं। (प्रश्न) मनुष्य का जीव पशु आदि में और पशु आदि का मनुष्य के शरीर में और स्त्री […]
सगोत्र विवाह का निषेध क्यों ?
पं0 जगदेवसिंह सिद्धांती मनुष्य (चाहे पुरुष हो, चाहे स्त्री) में माता-पिता के रजःवीर्य के सम्बन्ध के कारण सन्तान रूप में शारीरिक रक्त आदि अंश अवश्य परम्परया पहुँचते हैं। यह आयुर्वेद का विशुद्ध वैज्ञानिक सिद्धान्त है। इस कारण समान रजः$वीर्य के मिलने में सन्तान में कुछ विशेषता उत्पन्न नहीं होती और भाई-बहिन आदि अनेक सम्बन्ध नष्ट […]
ओ३म् =========== वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून साधना उपासना सहित वृहद वेद पारायण यज्ञों का केन्द्र है। यहां पर योग शिविर एवं युवक-युवति शिविर लगाकर वेद प्रचार किया जाता है। वर्ष में दो बार मई एवं अक्टूबर माह में पांच दिवसीय वार्षिकोत्सव होता है जिसमें देश भर से लोग श्रद्धापूर्वक सम्मिलित होते हैं और यहां […]
ओ३म् ============ ऋषि दयानन्द जन्मभूमि न्यास, टंकारा-गुजरात में आयोजित ऋषि बोधोत्सव पर्व के प्रथम दिन दिनांक 20-2-2020 को प्रातः 8.30 बजे से न्यास की यज्ञशाला में सामवेद पारायण यज्ञ को जारी रखा गया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य रामदेव जी थे तथा यज्ञ में मंत्रोच्चार टंकारा गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने किया। यज्ञवेदि पर न्यास के सहयोगी […]
वैदिक संपत्ति : एक अनमोल निधि
गतांक से आगे… चिनियों के आदि पुरुष के विषय में प्रसिद्ध चीनी विद्वान् यांगत्साई ने सन् 1558 में एक ग्रंथ लिखा था। इस ग्रंथ को सन् 1776 में हूया नामी विद्वान् ने फिर सम्पादित किया।इस उसी पुस्तक का पादरी क्लार्क ने अनुवाद किया है।उसमें लिखा है कि ‘अत्यंत प्राचीन काल के मो०लो० ची० राज्य का […]
प्रस्तुति : ज्ञान प्रकाश वैदिक ***** वेद के इस मन्त्र में राम शब्द आया है। भद्रो भद्रया सचमान आगात्स्वसारं जारो अभ्येति पश्चात्। सुप्रकेतैर्द्युभिरग्निर्वितिष्ठन् रुशद्भिर्वर्णैरभि रामस्थात्।। 【सामवेद उत्तरार्चिक १२/५/३ (१५४८) ऋग्वेद १०/३/३] यहां ‘राम’ शब्द आया है। सायणाचार्य इसका अर्थ कहते हैं, ‘रामकृष्ण शार्वरतमः’ अर्थात राम कहते हैं रात के काले अंधेरे को। इससे मालूम होता […]
पूजनीय प्रभु हमारे – – – – -अध्याय 5 प्रकृति चलायमान है,संसार परिवर्तनशील है। यहां हर पल परिवर्तन हो रहा है। जीव का आश्रय यह परिवर्तनशील संसार नहीं हो सकता। पर इसके उपरांत भी उसे इसी संसार में आना पड़ता है,कर्मभोग भोगने के लिए। इस जीव का साथी तो नित्य प्रभो है,उस साथी से मिलने […]
ओ३म् ========== ईश्वरीय ज्ञान वेद में मनुष्यों को अग्निहोत्र यज्ञ करने की आज्ञा है। अग्निहोत्र यज्ञ में गोघृत व चार प्रकार के पदार्थों की आहुतियां यज्ञ में दी जाती हैं। यह चार पदार्थ गोघृत के अतिरिक्त सोमलता, गिलोय, गुग्गल, सूखे फल नारीयल, बादाम, काजू, छुआरे आदि ओषधियां, मिष्ट पदार्थ शक्कर तथा सुगन्धित द्रव्य केसर, कस्तूरी […]