भारत के लोग अपने आप को सनातनधर्मी कहने और मानने में इसीलिए गर्व और गौरव की अनुभूति करते हैं कि उनका ज्ञान का खजाना शाश्वत है , सनातन है । वेदज्ञान जब सृष्टि दर सृष्टि चलता है तो इसका अर्थ यही है कि यह ज्ञान कभी समाप्त होने वाला नहीं है , यह कभी पुरातन […]
Category: भारतीय संस्कृति
ओ३म् =========== आर्यसमाज वेदों के मर्मज्ञ विद्वान ऋषि दयानन्द सरस्वती द्वारा दिनांक 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में स्थापित वह संस्था है जो आज प्रायः पूरे विश्व में जानी पहचानी होने सहित सक्रियरूप से कार्यरत है। आर्यसमाज की स्थापना से पूर्व ऋषि दयानन्द (1825-1883) ने देश के अनेक भागों में जाकर वेद की शिक्षाओं का […]
वेद विज्ञान और इतिहास
संस्कृत भाषा से भारत वासियों की दूरी बनाकर विदेशी लेखकों , विद्वानों , साहित्यकारों और इतिहासकारों को भारत और भारत के बारे में झूठी और भ्रामक धारणाएं स्थापित करने का अच्छा अवसर उपलब्ध हुआ । भारतवासियों ने अज्ञानता के कारण और पश्चिमी जगत के विद्वानों को ही विद्वान मानने की अपनी मूर्खता के कारण अपने […]
ओ३म् ============= मनुष्य जैसे जैसे वेदों से दूर होता रहा वैसे वैसे वह उतना ही अविद्या, अज्ञान व अन्धविश्वासों में फंसता चला गया। हम ईश्वर व वेद को मानने वाले आर्यावर्तीय आर्य व हिन्दू हैं। हमें अपने देश के अन्धविश्वासों तथा सामाजिक कुरीतियों का ज्ञान ऋषि दयानन्द ने कराया था। ऋषि दयानन्द को पढ़कर हम […]
आर्यावर्त शब्द हमारे भारत के प्राचीन गौरव को दर्शाने वाला बहुत ही पवित्र शब्द है । आर्यावर्त का शाब्दिक अर्थ है- ‘आर्यो आवर्तन्तेऽत्र’ अर्थात् ‘आर्य जहाँ सम्यक प्रकार से बसते हैं।’ आर्यावर्त का दूसरा अर्थ है- ‘पुण्यभूमि’। मनुस्मृति 2.22 में आर्यावर्त की परिभाषा इस प्रकार दी हुई है- आसमुद्रात्तु वै पूर्वादासमुद्रात्तु पश्चिमात्। तयोरेवान्तरं गिर्योरार्यावर्त विदुर्बुधा: […]
(विश्व महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर ) डॉ विवेक आर्य 7. शंका – क्या नारी को यज्ञ में ब्रह्मा बनने का अधिकार हैं? समाधान- यज्ञ में ब्रह्मा का पद सबसे ऊँचा होता है। ऐतरेय ब्राह्मण 5/33 के अनुसार ज्ञान, कर्म और उपासना तीनों विद्याओं के प्रतिपादक वेदों के पूर्ण ज्ञान से ही मनुष्य […]
ओ३म् ============== सृष्टि में मनुष्य जाति का आरम्भ वर्तमान समय से 1.96 अरब वर्ष पूर्व ईश्वर द्वारा सृष्टि रचना पूर्ण कर अमैथुनी सृष्टि में मनुष्य आदि सभी प्राणियों को उत्पन्न करने पर हुआ। सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा आदि को एक एक वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा […]
भारत के धर्म की यह अनूठी विशेषता रही है – मोक्ष प्राप्त करना। मोक्ष प्राप्ति की साधना जीवन को उन्नति और सदगति की ओर ढालने की साधना है। जो व्यक्ति इस साधना में लग जाता है वह संसार में रहकर कोई भी ऐसा उत्पात या अन्यायपूर्ण कृत्य नहीं करता जिससे दूसरों के जीवन का हनन […]
ओ३म् -नारी दिवस पर- ======== सृष्टि का आदि ग्रन्थ कौन सा है? इसका उत्तर है चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद सृष्टि के आदि ग्रन्थ है। इन ग्रन्थों की रचना कैसे व किससे हुई? इसका उत्तर है कि वेद परमात्मा का ज्ञान है जो उसने मनुष्य जाति के कल्याण के लिए सृष्टि के आरम्भ […]
ऋषि हरते हैं लोगों के संताप
मनुष्य अपने आप में स्थित (स्वस्थ-निर्भान्त और शांत) कैसे रहे ? – ऋषि लोग उसे इसका उपाय बताते हैं। इन ऋषियों के दर्शन के लिए लोग तरसते हैं और इनके मुखारबिन्द से निकले एक-एक शब्द को अपने लिए सहेज कर रखते हैं। हमारे यहां प्राचीनकाल में हमारे ऋषि पूर्वज अपने प्रवचनों से लोगों का कल्याण […]