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प्रमुख समाचार/संपादकीय

स्वयं में पूरा अर्थशास्त्र है गाय

डा. भरत झुनझुनवाला गाय और भैंस के दूध की गुणवत्ता के अंतर को जनता तक पहुंचाना चाहिए। वर्तमान में उपलब्ध फैट की मात्रा के आधार पर दूध की खरीद होती है। फैट की होड़ में गाय पीछे रह जाती है। बच्चों को भैंस का दूध पिलाया जा रहा है और उनकी बुद्धि भी भैंस जैसी […]

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अन्य कविता

विकास है या पतन?

तू मौत का ढंग तो जानता है, पर जीवन की पहचान नही।हिंसा का बन व्याघ्र गया, जो कहता अपने को मानव यदि यही है उन्नत मानव, तो कैसा होगा दानव?करता अट्टाहास जीत पर, खून बहाकर भाई का। कितनी भक्ति की भगवान की, क्या किया काम भलाई का?शांत शुद्घ अंत:करण से, क्या कभी यह सोचकर देखा?निकट […]

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संपादकीय

बापू ने कहा -‘करो या मरो’

महात्मा गांधी की अहिंसा को लेकर आरंभ से ही वाद विवाद रहा है। इसमें कोई संदेह नही कि अहिंसा भारतीय संस्कृति का प्राणातत्व है। पर यह प्राणतत्व दूसरे प्राणियों की जीवन रक्षा के लिए हमारी ओर से दी गयी एक ऐसी गारंटी का नाम है, जिससे सब एक दूसरे के जीवन की रक्षा के संकल्प […]

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