वीरेन्द्र सेंगरनई दिल्ली। राजनीति में बढ़ते परिवारवाद को लेकर लंबे समय से बहस रही है। खास खतरा यही है कि बेशर्मी से इस प्रक्रिया के बढ़ते जाने से राजनीतिक दलों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विकास में लगातार बाधा आ रही है। लेकिन, मुश्किल यह है कि एक-एक करके अब प्राय: सभी दलों में यह ‘बीमारी’ […]
Month: May 2013
– डॉ. दीपक आचार्य9413306077 इंसान वही है जो कुछ भी कर्म करे, तो अपने बूते पर ही। जो लोग औरों के इशारों पर कुत्ते के पिल्लों, बंदरों और भालुओं की तरह नाचते हैं, तोतों की तरह एक ही एक राग अलापते हैं, कैसेट्स की तरह बजते रहते हैं, रोबोट की तरह काम करते हैं और […]
राकेश कुमार आर्यए.बी.पी. न्यूज नीलसन के सर्वे के अनुसार देश में लोकसभा चुनाव यदि आज की तारीख में होते हैं तो यूपीए का सूपड़ा साफ होना तय है। जबकि एन.डी.ए. सबसे बड़े गठबंधन के रूप में उभर रहा है। यू.पी.ए. की 136 सीटों के मुकाबले एन.डी.ए. को 206 सीटें मिल रही हैं, हालांकि एन.डी.ए. फिर […]
– डॉ. दीपक आचार्य9413306077 समाज और संसार में प्रभावोत्पादकता के लिए सबसे ज्यादा जरूरत होती है उस बात की जो व्यवहार में अपनायी जाती है। हम जो काम करते हैं उनके बारे में किसी को न भी बताएं तब भी लोग उन कामों का अपने आप अनुकरण करने में आनंद का अनुभव करते हैं।दूसरी ओर […]
कई लोग जब किसी एक सीमा में बँध जाते हैं तब वहाँ बिना किसी बंधन के हमेशा बँधे हुए नजर आते हैं। ये लोग व्यापक और विराट सोच वाले नहीं होते हैं बल्कि सीमित दायरों और संकीर्ण सोच के साथ पूरा जीवन जैसे-तैसे निकाल देते है। इन लोगों को अपने सीमित दायरों में ही रमे […]
कड़वे प्रवचन
मुनिश्री तरूणसागर तुम परिवार के किसी सदस्य को नही बदल सकते। तुम अपने को बदल सकते हो, यह तुम्हारा जन्म सिद्घ अधिकार है। पूरी दुनिया को चमड़े से ढकना तुम्हारे बस की बात नही है। अपने पैरों में जूते पहन लो और निकल पड़ो फिर पूरी दुनिया तुम्हारे लिए चमड़े से ढकी जैसी है। मंदिर […]
अमरीकी वैज्ञानिकों ने पुरुषों में गंजेपन के वैज्ञानिक कारण की खोज करने का दावा किया है। यह उम्मीद भी जताई गई है कि इस शोध से गंजेपन को रोकने का इलाज और यहां तक कि बाल को दोबारा उगाना भी संभव हो सकेगा।गंजे व्यक्ति और प्रयोगशाला में चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर […]
इंकलाब जिंदाबाद-3
शांता कुमारगतांक से आगे…असेम्बली में बम के इस धमाके ने लंदन समेत विश्व की जनता के भी कान खोल दिये। अभी ब्रिटिश सरकार की छाती पर सांडर्स वध के घाव भरे भी न थे कि इस नये आघात से उसका वक्षस्थल चीत्कार कर उठा। चारों ओर नाकाबंदी करके सभी टेलीफोन और तारें सरकार ने अपने […]
एक भाषा बीज की हत्या
क्या बीज में विभाजन संभव है? हर विवेकशील व्यक्ति इस प्रश्न का उत्तर यही देगा कि नही, बीज में विभाजन संभव नही है। बीज बीज है और यदि उसे तोड़ा गया तो वह टूटते ही व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए अच्छाई इसी में है कि बीज को तोड़ा ना जाए बल्कि उसे यथावत रखा जाए जिससे […]
1857 की क्रांति का गीत
हम हैं इसके मालिक, यह हिंदुस्तान हमारा।पाक वतन है कौम का, जन्नत से भी प्यारा।।यह है हमारी मिल्कियत, हिंदुस्तान हमारा।इसकी रूहानीयत से, रोशन है जग सारा।।कितना कदीम, कितना नईम सब दुनिया से न्यारा।करती है जर्खेज जिसे गंगों जमन की धारा।।ऊपर बर्फीला पर्वत पहरेदार हमारा।नीचे साहिल पर बजता सागर का नक्कारा।।इसकी खानें उगल रही हैं सोना […]