बिखरे मोती संयम खूंटे से बाँधले, वाणी रूपी गाय, खुली छोड़ने पर तेरी, यस – खेती चर जाय।।1661।। भावार्थ :- जिनकी वाणी में प्राण और प्राण में प्राण होता है, संसार में ऐसे लोग बिरले ही होते हैं। वाणी माननीय व्यक्तित्व का सर्वश्रेष्ठ गहना है। सब गहने एक दिन अपनी चमक खो देते हैं किन्तु […]