डॉ. ओमप्रकाश पाहुजा लईया, मुजफ्फरगढ़, पाकिस्तान बंटवारे के समय मैं छह साल का था। गांव में एक अज्ञात भय व्याप्त था। शाम होते ही वह दरवाजा बंद कर दिया जाता था। मुझे याद है, हमारे घर की छत पर बड़े- बड़े कड़ाहों में तेल गरम करने की व्यवस्था की गई थी, ताकि मुसलमान अगर घर […]