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उगता भारत न्यूज़

ओ३म् श्री वीरेन्द्र राजपूत जी द्वारा ऋग्वेद के सातवें मण्डल का काव्यानुवाद आरम्भ

(इससे पूर्व वह ऋग्वेद के छः मण्डल सहित सम्पूर्ण यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद का काव्यानुवाद कर चुके हैं।) श्री वीरेन्द्र राजपूत जी देहरादून में निवास करते हैं। उन्होंने ऋग्वेद के प्रथम छः मण्डलों सहित यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद का काव्यानुवाद किया है। उनका ऋग्वेद के पांच मण्डलों सहित अन्य तीन वेदों पर काव्यानुवाद प्रकाशित हो […]

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आज का चिंतन

ओ३म् “वैदिक धर्म की महत्वपूर्ण देन ईश्वर-जीव-प्रकृति के अनादित्व सहित सृष्टि के प्रवाह से अनादि होने का सिद्धान्त”

=========== हम इस पृथिवी पर रहते हैं। यह पृथिवी हमारे सौर मण्डल का एक ग्रह है। ऐसे अनन्त सौर्य मण्डल इस ब्रह्माण्ड में हैं। इस सृष्टि व ब्रह्माण्ड को किसने बनाया है? इसका समुचित उत्तर विश्व के वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है। वेद और वैदिक धर्म के अनुयायी ऋषि-मुनि व वैदिक साहित्य के अध्येता […]

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ओ३म् “वैदिक धर्म में ही ऋषियों व योगियों सहित राम एवं कृष्ण जैसे महान् पुरुषों को उत्पन्न करने की क्षमता है”

========== संसार में सबसे महान धर्म एवं संस्कृति कौन सी है? इसका हमें एक ही उत्तर मिलता है कि 1.96 अरब वर्ष पूर्व लोक-लोकान्तरों की रचना होने के बाद सृष्टि का आरम्भ हुआ था। तभी परमात्मा ने चार वेदों का आविर्भाव किया था। सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर प्रदत्त ज्ञान वेद ही वैदिक धर्म एवं […]

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ओ३म् -आर्यसमाज धामावाला, देहरादून का साप्ताहिक सत्संग- “अहंकार व्यक्ति का विनाश करता है।: आचार्य अनुज शास्त्री”

हमें आज दिनांक 14-1-2024 को आर्यसमाज-धामावाला, देहरादून के साप्ताहिक सत्संग में सम्मिलित होने का सुअवसर प्राप्त हुआ। हमारे सत्संग में पहुंचने पर आर्यसमाज के पुरोहित पं. विद्यापति शास्त्री जी आज से पं. देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय जी रचित ऋषि दयानन्द जी के जीवन-चरित का पाठ आरम्भ कर रहे थे। जीवनचरित का यह पाठ प्रत्येक सत्संग से पूर्व […]

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ओ३म् “वैदिक धर्म में ही ऋषियों व योगियों सहित राम एवं कृष्ण जैसे महान् पुरुषों को उत्पन्न करने की क्षमता है”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। संसार में सबसे महान धर्म एवं संस्कृति कौन सी है? इसका हमें एक ही उत्तर मिलता है कि 1.96 अरब वर्ष पूर्व लोक-लोकान्तरों की रचना होने के बाद सृष्टि का आरम्भ हुआ था। तभी परमात्मा ने चार वेदों का आविर्भाव किया था। सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर प्रदत्त ज्ञान वेद ही […]

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ओ३म् -धूमधाम से सम्पन्न हुआ आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जी का जन्मोत्सव कार्यक्रम- “आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री ओजस्वी वक्ता, यशस्वी लेखक एवं मूर्धन्य वैदिक विद्वान हैं: पद्मश्री डॉ. सुकामा आचार्या”

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के वैदिक विद्वान एवं मासिक ‘अध्यात्म-पथ पत्रिका’ के प्रधान संपादक आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जी के दिनांक 1 जनवरी, 2024 को जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में पद्मश्री डॉ. सुकामा आचार्या जी के ब्रह्मत्व एवं पावन सान्निध्य में आयुष्काम महायज्ञ एवं भक्ति सत्संग का भव्य आयोजन आर्यसमाज, बाहरी रिंगरोड, विकासपुरी, नई दिल्ली में अत्यन्त भव्यता एवं […]

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आज का चिंतन

ओ३म् “यदि ऋषि दयानन्द न आते तो क्या हो सकता था?”

========= ऋषि दयानन्द का जन्म 12 फरवरी, 1825 को गुजरात राज्य के मोरवी जिले के टंकारा कस्बे में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री कर्षनजी तिवारी था। जब उनकी आयु का चैदहवां वर्ष चल रहा था तो उन्होंने अपने शिवभक्त पिता के कहने पर शिवरात्रि का व्रत रखा था। शिवरात्रि को अपने कस्बे के […]

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ओ३म् “विश्व में वेदों के प्रचार का श्रेय ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज को है”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध के बाद वेदों का सत्यस्वरूप विस्मृत हो गया था। वेदों के सत्य अर्थों के विलुप्त होने के कारण ही संसार में मिथ्या अन्धविश्वास तथा पक्षपात व दोषपूर्ण सामाजिक व्यवस्थायें फैली हैं। इससे विद्या व ज्ञान में न्यूनता तथा अविद्या व अज्ञानयुक्त मान्यताओं में […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

ओ३म् “यदि ऋषि दयानन्द न आते?”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। ऋषि दयानन्द का जन्म 12 फरवरी, 1825 को गुजरात राज्य के मोरवी जिले के टंकारा कस्बे में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री कर्षनजी तिवारी था। जब उनकी आयु का चैदहवां वर्ष चल रहा था तो उन्होंने अपने शिवभक्त पिता के कहने पर शिवरात्रि का व्रत रखा था। शिवरात्रि को […]

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आज का चिंतन हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

ओ३म् “पिछले पांच हजार वर्षों में दयानन्द के समान ऋषि नहीं हुआ”

========= महाभारत का युद्ध पांच हजार वर्ष से कुछ वर्ष पहले हुआ था। महाभारत युद्ध के बाद भारत ज्ञान-विज्ञान सहित देश की अखण्डता व स्थिरता की दृष्टि से पतन को प्राप्त होता रहा। महाभारत काल के कुछ ही समय बाद ऋषि जैमिनी पर आकर देश से ऋषि परम्परा समाप्त हो गई थी। ऋषि परम्परा का […]

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