पशु प्रवृत्ति चर रहीं, जीवन रूपी खेत। चंदन कोयला बन रहा, चेत सके तो चेत॥1255॥ व्याख्या:- चंदन के वृक्ष की यह विशेषता है कि वह जहां उगता है, वहां के आस-पास के वृक्षों में भी अपनी जैसी खुशबू पैदा कर देता है। चंदन की नायाब खुशबू के कारण चंदन की लकड़ी बड़ी महँगी बिकती है।कल्पना […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
अब जिस-जिस गुण से जिस-जिस गति को जीव प्राप्त होता है उस-उस को आगे 11 श्लोकों के द्वारा लिखते हैं- देवत्वं सात्त्विका यान्ति मनुष्यत्वञ्च राजसाः। तिर्यक्त्वं तामसा नित्यमित्येषा त्रिविधा गतिः।।१।। से इन्द्रियाणां प्रसंगेन धर्मस्यासेवनेन च। पापान् संयान्ति संसारान् अविद्वांसो नराधमाः।।११।। तक जो मनुष्य सात्त्विक हैं वे देव अर्थात् विद्वान्, जो रजोगुणी होते हैं वे मध्यम […]
दक्षिणी एशिया पर कुछ लिखने के पूर्व दक्षिण भारत में आबाद द्रविड़ जाति की उत्पत्ति का विवरण विस्तारपूर्वक हो जाना चाहिए। क्योंकि पाश्चात्यों और उनके द्वारा शिक्षा पाए हुए कतिपय एतद्देशीय विद्वानों का मत है कि भारतवर्ष के मूल निवासी कोल और द्रविड़ ही है। आर्य लोग तो यहां कहीं बाहर से आकर आबाद हुए […]
जुगनू का जुनून
जुगनू का जुनून कुछ भी नहीं कहा सूरज से कुछ भी नहीं सवेरे से । जुगनू स्वयं लड़ा करता है गहन तिमिर के घेरे से ।। जब निशीथ का गहरा तम हो कोई साथ न देता है । तब जुगनू का छोटा फेरा अंधकार हर लेता है ।। राजमहल जब ठुकरा दे तो आशा रैन […]
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में मुस्लिम भीड़ का कहर बरपा और कई लोगों को इसमें अपनी जान गँवानी पड़ी। इसी बीच मीडिया पोर्टल्स लगातार दंगाइयों के महिमामंडन में लगे रहे और पीड़ित हिन्दुओं की पीड़ा को नज़रअंदाज़ किया गया। क्योकि चैनल के पत्रकारों की मेज पर आतंकी सरगना ओसामा लादेन की […]
समाधान- यह वेदों पर आक्षेप करने वाले की बुद्धिहीनता और स्वाध्याय की कमी को दर्शाता हैं। वेद चार हैं। उनके प्रधान विषय और सन्देश को समझने से सरलता से यह समझा जा सकता है कि चरों वेद क्रम के अनुसार हैं। ऋग्वेद में विज्ञान की प्रधानता है। ब्रह्मा से लेकर तृणपर्यन्त पदार्थों का उसमें निरूपण […]
वेद ज्ञान का प्रकाश कैसे हुआ ?
✍🏻 लेखक – पदवाक्यप्रमाणज्ञ पण्डित ब्रह्मदत्तजी जिज्ञासु प्रस्तुति – 🌺 ‘अवत्सार’ इसके दो ही प्रकार हो सकते हैं, कि या तो जगदीश्वर ने आदि मनुष्यों वा ऋषियों को आजकल की भाँति बैठकर पढ़ाया वा लिखकर दे दिया या लिखा दिया हो, यह सब एक ही प्रकार कहा जा सकता है और ईश्वर के शरीरधारी होने […]
सत्यार्थ प्रकाश : एक अनुपम ग्रंथ
नवम समुल्लास राकेश आर्य बागपत (प्रश्न) मनुष्य और अन्य पशु आदि के शरीर में जीव एक सा है या भिन्न-भिन्न जाति के? (उत्तर) जीव एक से हैं परन्तु पाप पुण्य के योग से मलिन और पवित्र होते हैं। (प्रश्न) मनुष्य का जीव पशु आदि में और पशु आदि का मनुष्य के शरीर में और स्त्री […]
ओ३म् ============= संसार में जितने मनुष्य हैं व अतीत में हुए हैं वह सब किसी देश विशेष में जन्में थे। उनसे पूर्व उनके माता-पिता व पूर्वज वहां रहते थे। जन्म लेने वाली सन्तान का कर्तव्य होता है कि वह अपने जन्म देने वाले माता-पिता का आदर व सत्कार करे। मातृ देवो भव, पितृ देवो भव […]
एकात्म मानववाद के इस सरस प्रवाह ने स्वतंत्रता आंदोलन के काल में हमारे देशवासियों का मार्गदर्शन किया । इसी प्रकार तुर्क और मुगलों के शासनकाल में उनके अत्याचारों का सामना करने के लिए भी अदृश्य रूप में एकात्म मानववाद के इसी सरस प्रवाह ने हमारे देशवासियों के भीतर राष्ट्र भाव को प्रवाहित किये रखा । […]