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स्वर्णिम इतिहास

रामायण और महाभारत का कम समय आंकने में गांधीजी का यह दुराग्रह भी एक कारण

  हमारे देश के इतिहास में विकृतिकरण से अधिक इतिहास का विलोपीकरण किया गया है । इतिहास के विलोपीकरण की यह षड्यंत्रकारी योजना जानबूझकर यूरोपियन देशों के इतिहास लेखकों , मुस्लिम इतिहास लेखकों के साथ-साथ कम्युनिस्ट विचारधारा के लेखकों ने बनाई है । विलोपीकरण की इस प्रक्रिया को पूरा करने के दृष्टिकोण से इन लोगों […]

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एक बहुत ही महत्वपूर्ण गीत

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स्वर्णिम इतिहास

भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ : पुष्पक विमान से भी अलग कई प्रकार के विमान बनते थे भारत में

  भारत प्राचीन काल से ही वैज्ञानिक आविष्कारों के लिए जाना जाता रहा है। यहाँ पर व्योमयान अर्थात विमान दो प्रकार के बनाए जाते थे। ऋषि भारद्वाज ने अपने ग्रंथ ‘वृहदविमानभाष्य’ में ऐसे विमान के बारे में भी उल्लेख किया है जो एक साथ जल , थल और नभ में उड़ान भर सकता था या […]

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स्वर्णिम इतिहास

है गौरवशाली इतिहास हमारा : हिंदुत्व का पराक्रमी सम्राट पृथ्वीराज चौहान और वीरांगना श्यामली

  पृथ्वीराज चौहान भारतीय त्याग, तपस्या, साधना और पौरूष का प्रतीक है। वह अपने गुणावगुणों से तत्कालीन हिंदू राजाओं में से कई के लिए ईर्ष्या और द्वेष का कारण बन गया था। कई इतिहासकारों ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान के एक से अधिक विवाहों के होने का उल्लेख किया है। अत: थोड़ी सी असावधानी से एक […]

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स्वर्णिम इतिहास

क्यों लिखा गया महाभारत जैसा महत्वपूर्ण ग्रंथ ?

महाभारत जैसा महान ग्रंथ क्यों लिखा गया ? इसका महत्व क्या है ? इसका अर्थ क्या है ? यह प्रश्न अक्सर आपके मन मस्तिष्क में उठते रहते होंगे । यदि इन् प्रश्नों का उत्तर खोजा जाए तो महाभारत के अन्त में महाभारत का महत्व और उपसंहार करते हुए इस पर प्रकाश डाला गया है। जिसमें […]

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इतिहास के पन्नों से

द्रोपदी के पांच नहीं एक पति था

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भारतीय संस्कृति

भारत के शिक्षित ही उजाड़ रहे हैं भारत को

  जो पढ़ा हुआ है उसके विषय में माना जाता है कि वह ‘बढ़ा’ हुआ देशप्रेमी है। वह ‘बढ़ा’ तो है, किंतु विचारणीय बात यह है कि वह किस क्षेत्र में बढ़ गया ? जो उसके लिए सर्वथा वर्जित और त्याज्य था वह उसकी ओर क्यों और कैसे चला गया ? क्या हमने कभी इस […]

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धर्म-अध्यात्म

नमस्ते की सही मुद्रा और उसका रहस्य

भारत का राष्ट्रीय अभिवादन ‘नमस्ते’ है। नमस्ते की सही मुद्रा है -व्यक्ति के दोनों हाथों का छाती के सामने आकर दूसरे व्यक्ति के लिए जुट जाना और उसी समय व्यक्ति के मस्तक का झुक जाना। ‘नमस्ते’ की यह मुद्रा जहां ‘नमस्ते’ करने वाले की शालीनता और विनम्रता को झलकाती है-वहीं उसके अहंकारशून्य व्यवहार की भी […]

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धर्म-अध्यात्म

एक पहलवान और उसके शिष्य

एक उस्ताद अपने कई शिष्यों को एक साथ पहलवानी के दांव-पेंच सिखाया करते थे। उन्होंने अपने एक प्रिय शिष्य को कुश्ती के सारे दांव-पेंच सिखा दिये। जिससे वह अच्छे-अच्छे पहलवानों को कुश्ती में पटकने लगा। उससे कुश्ती लडऩे का साहस अब हर किसी का नहीं होता था। अपने सामने से पहलवानों को इस प्रकार भागता […]

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स्वर्णिम इतिहास

सोमनाथ मंदिर के लिए बलिदान देने वाले वे वीर बलिदानी : जिनके लिए न दीप जले न फूल चढ़े

सोमनाथ मंदिर के लिए बलिदान देने वाले वे बलिदानी : जिनके लिए न फूल चढ़े न दीप चले सोमनाथ मंदिर की जीत को महमूद गजनवी के पक्ष में कुछ इस प्रकार दिखाया जाता है कि जैसे उसके जाते ही पाला उसी के पक्ष में हो गया था । वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं था […]

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