जो पढ़ा हुआ है उसके विषय में माना जाता है कि वह ‘बढ़ा’ हुआ देशप्रेमी है। वह ‘बढ़ा’ तो है, किंतु विचारणीय बात यह है कि वह किस क्षेत्र में बढ़ गया ? जो उसके लिए सर्वथा वर्जित और त्याज्य था वह उसकी ओर क्यों और कैसे चला गया ? क्या हमने कभी इस […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
जो पढ़ा हुआ है उसके विषय में माना जाता है कि वह ‘बढ़ा’ हुआ देशप्रेमी है। वह ‘बढ़ा’ तो है, किंतु विचारणीय बात यह है कि वह किस क्षेत्र में बढ़ गया ? जो उसके लिए सर्वथा वर्जित और त्याज्य था वह उसकी ओर क्यों और कैसे चला गया ? क्या हमने कभी इस […]
भारत का राष्ट्रीय अभिवादन ‘नमस्ते’ है। नमस्ते की सही मुद्रा है -व्यक्ति के दोनों हाथों का छाती के सामने आकर दूसरे व्यक्ति के लिए जुट जाना और उसी समय व्यक्ति के मस्तक का झुक जाना। ‘नमस्ते’ की यह मुद्रा जहां ‘नमस्ते’ करने वाले की शालीनता और विनम्रता को झलकाती है-वहीं उसके अहंकारशून्य व्यवहार की भी […]
एक उस्ताद अपने कई शिष्यों को एक साथ पहलवानी के दांव-पेंच सिखाया करते थे। उन्होंने अपने एक प्रिय शिष्य को कुश्ती के सारे दांव-पेंच सिखा दिये। जिससे वह अच्छे-अच्छे पहलवानों को कुश्ती में पटकने लगा। उससे कुश्ती लडऩे का साहस अब हर किसी का नहीं होता था। अपने सामने से पहलवानों को इस प्रकार भागता […]
सोमनाथ मंदिर के लिए बलिदान देने वाले वे बलिदानी : जिनके लिए न फूल चढ़े न दीप चले सोमनाथ मंदिर की जीत को महमूद गजनवी के पक्ष में कुछ इस प्रकार दिखाया जाता है कि जैसे उसके जाते ही पाला उसी के पक्ष में हो गया था । वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं था […]
विनम्रता वैदिक धर्म का एक प्रमुख गुण है। सारी विषम परिस्थितियों को अनुकूल करने में कई बार विनम्रता ही काम आती है। इसीलिए विनम्र बनाने के लिए विद्या देने की व्यवस्था की जाती है। विद्या बिना विनम्रता के कोई लाभ नहीं दे सकती और विनम्रता बिना विद्या के उपयुक्त लाभ नहीं दे सकती। कहा गया […]
यूनान देश के यवना लोगों का हिरैक्लीज’ नाम का एक देवता रहा है। जिसकी वह लंबे समय से पूजा करते रहे हैं । कौन था यह हिरैक्लीज ? यदि इस पर विचार किया जाए तो पता चलता है कि इस नाम का देवता विश्व के सबसे अधिक बलशाली व ज्ञान सम्पन्न श्रीकृष्ण जी ही थे। […]
एक व्यक्ति किसी महात्मा के पास गया। महात्मा जी की साधना की दूर-दूर तक चर्चा थी। उनके चेहरे के तेज को देखकर ही पता चल जाता था कि उनकी साधना बहुत ऊंची है। वह व्यक्ति भी तो उनकी उच्च साधना से प्रभावित होकर ही उनके पास पहुंचा था। उसे कुछ पूछना था, कुछ जानना […]
अत्यंत विषम सामाजिक परिस्थितियों के घेरे को तोड़कर भारतीय राजनीति में अपना महत्वपूर्ण और सम्मानित स्थान बनाना सचमुच डॉक्टर अंबेडकर के ही वश की बात थी । उन परिस्थितियों में उनके स्थान पर यदि कोई और होता तो इस स्थान और सम्मान को प्राप्त नहीं कर सकता था । उनके व्यक्तित्व का यह निराला गुण […]
आज सही 101 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं अमृतसर के जलियांवाला बाग के हत्याकाण्ड की घटना को । 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन ‘रौलट एक्ट’ के विरोध में अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के निकट जलियांवाला बाग में हजारों लोग एकत्र हुए थे। जिससे नाराज होकर जनरल डायर ने अपने अंग्रेज सैनिकों को निहत्थे […]
झांसी के अंतिम संघर्ष में महारानी की पीठ पर बंधा उनका बेटा दामोदर राव (असली नाम आनंद राव) सबको याद है. रानी की चिता जल जाने के बाद उस बेटे का क्या हुआ ? वो कोई कहानी का किरदार भर नहीं था, 1857 के विद्रोह की सबसे महत्वपूर्ण कहानी को जीने वाला राजकुमार था जिसने […]