आज देश में कई लोग ऐसे हैं जो सिखों के गुरुओं के नाम को कलंकित कर रहे हैं और पाकिस्तान या देश के दुश्मनों की शह पर एक नए देश खालिस्तान की मांग कर रहे हैं। अभी हाल ही में सिंघु बॉर्डर पर जो कुछ खालसा और खालिस्तान के नाम पर हुआ है, उसकी जितनी […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
आज देश में कई लोग ऐसे हैं जो सिखों के गुरुओं के नाम को कलंकित कर रहे हैं और पाकिस्तान या देश के दुश्मनों की शह पर एक नए देश खालिस्तान की मांग कर रहे हैं। अभी हाल ही में सिंघु बॉर्डर पर जो कुछ खालसा और खालिस्तान के नाम पर हुआ है, उसकी जितनी […]
‘प्रतिनिधि पंजाबी कहानियां’ की अनुवादक श्रीमती सावित्री चौधरी हैं। जिन्होंने अबसे पूर्व में अपनी कई ख्यातिलब्ध पुस्तकें लिखकर दर्जनों पुरस्कार प्राप्त किए हैं। अपनी इस पुस्तक में उन्होंने बड़ा डॉक्टर, रब अपने असली रूप में, जैथा ग्वाला, जूठे आम, सैहबी फिर भी अकेला था, मांग, सोलहवां साल, मीनू , उफ़ क्या है ?, काला बाप […]
‘सार सतसई’ पुस्तक डॉ शंकर लाल गुप्ता द्वारा लिखी गई है, जो कि एक बहुत ही संवेदनशील कवि के रूप में विख्यात हैं। इस पुस्तक में डॉ शंकर लाल गुप्त जी के द्वारा दोहों के रूप में अपने मन की बात को अभिव्यक्ति दी गई है। उन्होंने बहुत ही बेहतरीन ढंग से विभिन्न विषयों को […]
“भारतीय परंपराओं की वैज्ञानिकता” – नामक पुस्तक श्रीमती सुनीता बापना व श्रीमती कुसुम अग्रवाल के द्वारा लिखी गई है। यह पुस्तक भारतीय परंपराओं की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालती है ,जो कि इसके नाम से ही स्पष्ट हो जाता है। भारतीय परंपराओं के बारे में यह सच है कि वह चाहे आज कितनी ही और किसी […]
पुरातन काल के राष्ट्रों के आधुनिक नाम पूज्य महानंद जी , भगवन ! जिसको आपने अभी-अभी पातालपुरी कहा था वहां रावण पुत्र अहिरावण राज्य करते थे उसे आधुनिक काल में अमेरिका कहते हैं। और जिसको आपने सोमभूम नाम से पुकारा सोमकेतु राष्ट्र जो त्रेता काल में था उसे रूस कहते हैं। जिसको आपने इंद्रपुरी कहा […]
पुरातन काल के राष्ट्रों के आधुनिक नाम पूज्य महानंद जी , भगवन ! जिसको आपने अभी-अभी पातालपुरी कहा था वहां रावण पुत्र अहिरावण राज्य करते थे उसे आधुनिक काल में अमेरिका कहते हैं। और जिसको आपने सोमभूम नाम से पुकारा सोमकेतु राष्ट्र जो त्रेता काल में था उसे रूस कहते हैं। जिसको आपने इंद्रपुरी कहा […]
भारत की पुण्य भूमि के विषय में अरबी कवि लवी बिन अख्तर बिन तुरफ़ा ईसा से 1700 – 1800 वर्ष पूर्व कहता है – “हे भारत की प्रशंसित धरती ! तुम सचमुच सम्मान की पात्र हो। क्योंकि परमात्मा ने सच्चे ज्ञान अर्थात वेदों का प्रकाश यहीं पर किया था । ईश्वरीय ज्ञान कही जाने वाली […]
राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी सामाजिक सांस्कृतिक प्राणी के रूप में भारतीय मानस ने अपनी विकास यात्रा के अंतर्गत न केवल शारीरिक एवं जैविक विकास किया, अपितु बौद्धिक, सांवेगिक, सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित कीं। सांस्कृतिक दृष्टि से उसने अपनी एक आदर्श जीवनशैली को विकसित किया, जिसमें परस्परता, सहिष्णुता, प्रकृति के साथ […]
पुस्तक का नाम : सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा:भगवान श्रीराम लेखकीय निवेदन का शेष थाईलैंड का राज परिवार और श्री राम थाईलैंड के राज परिवार में आज तक भी लोग अपने नाम के साथ राम जोड़कर प्रसन्न होते हैं। वे समझते हैं कि जैसे श्रीराम ने दैवीय शक्तियों के माध्यम से शासन किया था […]
अंकित सिंह विजया राजे सिंधिया ने 1980 ने भाजपा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष से बनाया गया। जब पार्टी ने राम जन्मभूमि आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई तब विजया राजे सिंधिया ने भी इसको बखूबी आगे बढ़ाते रहीं। जनवरी 2001 में उनकी मृत्यु हो गई। जब […]