स्थित बुद्धि हो नहीं सकता संसार उसका जो कामनाओं से युक्त है। वही जीत सकता संसार को जो कामनाओं से मुक्त है।। दिन आपाधापी में बिताना और रात में षड़यंत्र रचना। लक्षण नहीं ये वीर के – यूँ ही किसी पर व्यंग्य कसना ।। सदा सम्मान दूसरों का करे – वही वीर बुद्धियुक्त है … […]
गीता मेरे गीतों में… कविता 14