नचिकेता और यमराज संवाद की व्याख्या* भाग 1

images (60)

Dr D K Garg ,

अक्सर शोक सभा में पंडित या कथावाचक नचिकेता और यमराज की कथा सुनाते हैं,इस कथा की वास्तविकता क्या है,इस पर विचार करते हैं।

संवाद कथा क्या है : नचिकेता और यमराज के बीच हुए संवाद का उल्लेख हमें कठोपनिषद में मिलता है। इस संवाद कथा के अनुसार नचिकेता के पिता जब विश्वजीत यज्ञ के बाद बूढ़ी एवं बीमार गायों को ब्राह्मणों को दान में देने लगे तो नचिकेता ने अपने पिता से पूछा कि आप मुझे दान में किसे देंगे? तब नचिकेता के पिता क्रोध से भरकर बोले कि मैं तुम्हें यमराज को दान में दूंगा। चूंकि ये शब्द यज्ञ के समय कहे गए थे, अतः नचिकेता को यमराज के पास जाना ही पड़ा। यमराज अपने महल से बाहर थे, इस कारण नचिकेता ने तीन दिन एवं तीन रातों तक यमराज के महल के बाहर प्रतीक्षा की।
तीन दिन बाद जब यमराज आए तो उन्होंने इस धीरज भरी प्रतीक्षा से प्रसन्न होकर नचिकेता से तीन वरदान मांगने को कहा।
नचिकेता ने —
1.पहले वरदान में कहा कि जब वह घर वापस पहुंचे तो उसके पिता उसे स्वीकार करें एवं उसके पिता का क्रोध शांत हो।
2 दूसरे वरदान में नचिकेता ने जानना चाहा कि क्या देवी-देवता स्वर्ग में अजर एवं अमर रहते हैं और निर्भय होकर विचरण करते हैं!
इसके उत्तर में तब यमराज ने नचिकेता को अग्नि ज्ञान दिया, जिसे नचिकेताग्नि भी कहते हैं।

नचिकेताग्नि की विस्तृत व्याख्या

जब व्यक्ति ब्रह्मचारी से गृहस्थ में प्रवेश करता है दो दोनों आश्रमों के बीच को सन्धि गुजरता है और उसके बाद गृहस्थ से वानप्रस्थ में प्रवेश करता है तो एक और सन्धि से गुजरता है वानप्रस्थ से संन्यास में प्रवेश करता है तब वानप्रस्थ- संन्यास की सन्धि से गुजरता है इन तीन संधियों में से गुजरना , इन्हें पार करना ही तीन कर्म हैं |

जो इन तीनों सन्धियों से नहीं गुजरता वह किसी न किसी आश्रम में अटक जाता है इस प्रकार प्रत्येक सन्धि में से गुजरने से एक एक स्वर्ग-साधक अग्नि उत्पन्न होती है | अग्नि उत्पन्न ही सन्धि से (दो वस्तुओं के मेल से) होती है एक सन्धि के बाद एक एक नचिकेत अग्नि प्रगट होती है जो मनुष्य को स्वर्ग अर्थात् अमृत की ओर ले जाती है | तीनों संधियों से गुजर कर त्रि-नचिकेत-अग्नि की साधना होती है | इन तीनों से गुजरने को ही ब्रह्म यज्ञ कहते हैं | जो व्यक्ति दिव्य गुणों से युक्त, स्तुति के योग्य ब्रह्म यज्ञ को जान जाता है उसके विषय में निश्चय कर लेता है वह अत्यन्त शांति को प्राप्त होता है |
ब्रह्म का अर्थ है महान् होना , बढ़ना, अपना विस्तार करना | जीवन को संकुचित करने का नाम ब्रह्मयज्ञ नहीं है | चारों आश्रमों से गुजरना ही वास्तविक ब्रह्म यज्ञ है उसी से व्यक्ति महान् होता है क्यों कि वह तीन अग्नियों में तपता है |
3. तीसरे वरदान में नचिकेता ने पूछा कि ‘हे यमराज, सुना है कि आत्मा अजर-अमर है। मृत्यु एवं जीवन का चक्र चलता रहता है। लेकिन आत्मा न कभी जन्म लेती है और न ही कभी मरती है।’ नचिकेता ने पूछा कि इस मृत्यु एवं जन्म का रहस्य क्या है? क्या इस चक्र से बाहर आने का कोई उपाय है?

तब यमराज ने कहा कि यह प्रश्न मत पूछो, मैं तुम्हें अपार धन, संपदा, राज्य इत्यादि इस प्रश्न के बदले दे दूंगा। लेकिन नचिकेता अडिग रहे और तब यमराज ने नचिकेता को आत्मज्ञान दिया। नचिकेता द्वारा प्राप्त किया गया आत्मज्ञान आज भी प्रासंगिक और विश्व प्रसिद्ध है। सत्य हमेशा प्रासंगिक ही होता है।

विस्तृत व्याख्या — आत्मा अजर-अमर है

जीवात्मा के विकास की चार अवस्थाएं हैं।
• जीवात्मा ‘हंस’ है, ‘वसु’ है, ‘होता’ है, ‘अतिथि’ है।
जब जीवात्मा उत्तरोत्तर विकास करता जाता है तव ये अवस्थाएं प्राप्त होती जाती हैं। जीवात्मा जब हंस की तरह जीवन व्यतीत करता है, जैसे हंस पानी में रहकर पानी में नहीं भीगता है उसी प्रकार से जीवात्मा संसार में रहकर संसार में लिप्त न हो यह पहली विकसित अवस्था है। इस तरह का अभ्यास करने वाले को कहा जाता है कि वह नर देह में वास कर रहा है, इससे नीचा तो पशु समान है, यह ब्रह्मचर्य की अवस्था है।

• इसके बाद दूसरी अवस्था आती है ‘वसु’ की अवस्था। यह वो अवस्था है जब मनुष्य वसु की तरह अपना जीवन व्यतीत करता है, अर्थात् स्वयं भी वसता है तथा दूसरों को भी बसाता है, दूसरों की हर संभव मदद करता है वह मानो नर देह से उत्तम शरीर में वास कर रहा है, इसे वर देह भी कहते हैं। यह गृहस्थ की अवस्था है।
• तीसरी विकसित अवस्था ‘होता’ की आती है। जिस प्रकार से हवन करते समय सामग्री को हवन में अर्पित किया जाता है, इसी प्रकार से जब मनुष्य अपने आप को समाज के लिए अर्पित कर दे। अब उसका अपना कुछ नहीं है, अपना सर्वस्व दूसरों के उपकार के लिए समर्पित करने लगे। वह प्रत्येक वस्तु को अपना न समझ कर परमात्मा की समझता है और त्याग भावना अपनाकर जीवन जीता है।। यह ऋत देह अवस्था भी कहलाती है। ऋत अर्थात निरपेक्ष सत्य। इस अवस्था में वह समझ जाता है कि संसार के विषय ऋत नहीं हैं, सिर्फ परमात्मा ही ऋत है, निरपेक्ष सत्य वही परमात्मा है। इस अवस्था को वानप्रस्थ की अवस्था भी कहते हैं।
• इससे और अधिक विकसित चौथी अवस्था ‘अथिति’ है। जब मनुष्य इस देह के वास को अथिति की तरह समझने लग जाता है। अब मनुष्य अपने ज्ञानरूपी धन से समाज का घूम-घूम कर उपकार करता है कहीं भी स्थायी रूप से नहीं रहता और पूर्ण रूप से परमात्मा को समर्पित हो जाता है, वह अत्यंत ऊँचा उठ जाता है, इसे व्योमदेह भी कहते हैं। वास्तव में यह अवस्था संन्यास की अवस्था है।
इस प्रकार से जो अपनी आत्मा को रथी और देह को रथ समझकर तथा जीवन को आश्रमों की यात्रा मानकर इस यात्रा को निभाता है, वह ‘ज्ञानात्मा’ से ‘महानात्मा’ और फिर ‘महानात्मा’ से — ‘शान्तात्मा’ हो जाता है। उसी में तीनों नचिकेत अग्नियां प्रदीप्त होती हैं, और वही ‘ब्रह्मयज्ञ’ के वास्तविक अर्थ को समझता है।
इस उपनिषद में एक गूढ़ ज्ञान की बातो को एक कथानक का रूप देकर समझाया गया है और जिसका भावार्थ सत्य और समझना जरुरी है ।
इसलिए कथा के मूल भाव पर ध्यान देना जरुरी है न की काल्पनिक व्यक्ति की खोज करने और किसी अन्य कथा से जोड़ने का कोई प्रयास ना किया जाय।
इस कथा में दो मुख्य पात्र है – १ नचिकेता २ यमराज

यहाँ नचिकेता का अर्थ है जिज्ञासु और यमराज का अर्थ है -मृत्यु के देवता; धर्मराज यानि वो जिसको यम ,नियम ,धर्म आदि का पूर्ण ज्ञान हो यानि यम राज ,जिसके ज्ञान क्षेत्र इतना विशाल हो की उसको धारण करने से कोई भी व्यक्ति मृत्यु से अमरता की ओर जा सकता है। इसलिए इसमें एक जिज्ञासु दुसरे विद्वान से प्रश्न करता है।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş