भारतीय इतिहास का प्रस्थान विन्दु था 2014

31 दिसंबर,2014,हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,कुछ वक्त ऐसे होते हैं जो बिना कोई हलचल मचाए ही इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं जबकि कुछ लम्हे ऐसे भी होते हैं जो इतिहास को ही बदल देते हैं। साल 2014 भी ऐसा ही साल था जिसमें न केवल भारत के इतिहास को बल्कि पूरी दुनिया के वर्तमान और भविष्य को बदलकर रख देने की क्षमता थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले पूरे भारत में निराशा-ही-निराशा का माहौल था और ऐसा लग रहा था जैसे भारत एशिया का नया मरीज बनने जा रहा है। केंद्र सरकार में रोज-रोज नए-नए घोटाले सामने आ रहे थे जो नित नए-नए रिकॉर्ड बना रहे थे। छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों ने हुआँ-हुआँ करके ऐसा माहौल बना दिया था जैसे कि हिन्दू धर्म में जन्म लेना ही अपराध हो। रजिया और डायना के लिए तो सरकार के पास एक-से-एक योजना थी लेकिन कहीं ज्यादा अभावों में जी रही राधा के लिए कुछ भी नहीं था।

मित्रों,फिर आया लोकसभा चुनाव,2014। लगभग पूरे भारत के हिन्दू एकजुट हो गए और पहली बार भारत में किसी हिन्दुवादी दल को लोकसभा में अपने बल पर बहुमत प्राप्त हुआ। भारत में रक्तहीन क्रांति हो गई जो बारास्ता ईवीएम संपन्न हुई। आज हम विलियम वर्ड्सवर्थ की तरह जिसने कभी फ्रांस की क्रांति के बारे में कहा था कि उस काल में जीवित होना ही बहुत बड़ी बात थी और युवा होना तो स्वर्गिक अनुभव था, की तरह कह सकते हैं कि उस चुनाव के समय भारत में होना ही बहुत बड़ी बात थी और मतदान करना तो स्वर्गिक अनुभव था। वर्ष 2014 की यह इकलौती यादगार घटना हो ऐसा भी नहीं है। भारत की जनता ने इस चुनाव के बाद भी विभिन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा को शानदार जीत देकर राज्यसभा में पार्टी के बहुमत की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है।

मित्रों,यद्यपि अभी केंद्र सरकार को सत्ता में आए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं लेकिन इस अल्पकाल में भी आज पूरी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है। एक बार फिर से स्वदेशी का जोर बढ़ने लगा है,भारत को दुनिया की फैक्ट्री बना डालने की दिशा में जोर-शोर से कोशिश हो रही है,सरकार में कहीं कोई घोटाला नहीं है,कानून का बोझ कम किया जा रहा है,देश के गणमान्य लोगों ने झाड़ू उठा लिए हैं,भारत दुनिया के सारे देशों के साथ आँखों में आँखें डालकर बात कर रहा है,पूंजी निवेश को आसान बनाया जा रहा है,नए उद्यमों की स्थापना को आसान बनाने के प्रयास काफी तेजी से और शिद्दत से किए जा रहे हैं,युवाओं को भिक्षा के स्थान पर शिक्षा और रोजगार देने के इंतजामों में सरकार लग गई है।

मित्रों,किसी भी एक साल में भारत की दशा और दिशा में इतना बदलाव नहीं आया जितना कि वर्ष 2014 में। इस मामले में यह साल निश्चित रूप से सन् 1947 और 1974 से भी ज्यादा क्रांतिकारी और परिवर्तनकारी रहा। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि इस क्रांति को अंजाम तक पहुँचाया स्वयं भारत की सवा सौ करोड़ जनता ने। अगर जनता जागरुक नहीं हुई होती तो एक तो क्या एक हजार नरेंद्र मोदी भी व्यवस्था तो क्या सत्ता तक को भी नहीं बदल पाते और आज भी देश में देशविरोधी,हिन्दूविरोधी तत्त्वों का शासन होता।

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