हिन्दू समाज पर जब भी कोई संकट आया है, आर्यसमाज ने आगे आकर हिन्दुओं का साथ दिया है : डॉ वागीश आर्य

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ओ३म्

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वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून के दिनांक 11-5-2022 से 15-5-2022 तक आयोजित पांच दिवसीय ग्रीष्मोत्सव के समापन आयोजन में आर्यजगत् के शीर्ष विद्वान डा. वागीश आर्य जी का सम्बोधन हुआ। उन्होंने अपना सम्बोधन एक वेदमन्त्र बोलकर आरम्भ किया। अपने सम्बोधन के आरम्भ में उन्होंने प्रश्न किया कि आर्य और हिन्दू शब्द में क्या अन्तर है? उन्होंने बताया कि हिन्दू शब्द के विरोधी विचारकों का कहना है कि यह शब्द विदेशियों ने हमें दिया है। हमारे प्राचीन शास्त्रों व ग्रन्थों में इस शब्द का उल्लेख नहीं है। दक्षिण भारत तथा काशी विश्वनाथ मन्दिर के मुख्य द्वारों पर भी आर्य शब्द का ही प्रयोग हुआ है। आचार्य वागीश जी ने प्रश्न किया कि दूसरे लोगों का दिया हुआ नाम हम क्यों स्वीकार करें? आचार्य वागीश जी ने बताया कि उनसे किसी ने एक बार प्रश्न किया कि वह अयोध्या में बनने वाले राम मन्दिर से प्रसन्न हैं? इसके उत्तर में आचार्य जी ने उन्हें कहा कि दो बातें हैं? प्रथम हैदराबाद में हिन्दू मन्दिर में पूजा करना बन्द कर दिया गया था। इसके विरोध में देश का कोई हिन्दू नेता या अन्य राजनैतिक नेता सामने नहीं आया था। इसके विरोध में आर्यसमाज आगे आया था। आर्यसमाज और इसके शीर्ष सगठन ने इस प्रतिबन्ध का विरोध किया और हैदराबाद राज्य की जेलों को आर्य सत्याग्रहियों से भर दिया था। आर्यों के नेता लौह पुरुष पं. नरेन्द्र जी की हड्डियों तोड़ दी गई थी। आर्यसमाज व इसके अनुयायियों ने हैदराबाद के सत्याग्रह में अनेक बलिदान दिये। आचार्य जी ने कहा कि राम मन्दिर कोर्ट के आदेश से बन रहा है। यह हिन्दुओं की शक्तियों से नहीं बन रहा है।

वैदिक विद्वान डा. वागीश आर्य जी ने कहा कि आर्यसमाज ने कभी किसी मूर्ति का भंजन नहीं किया। उन्होंने ईश्वर के सत्यस्वरूप एवं मूर्तिपूजा की चर्चा की। आचार्य जी ने कहा कि हिन्दू मन्दिर बनाते हैं इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है। हिन्दू समाज पर जब भी कोई संकट आया है, आर्यसमाज ने आगे आकर हिन्दुओं का साथ दिया है।

डा. वागीश आर्य जी ने कहा कि वह अयोध्या में राम मन्दिर बनने से प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश से मन्दिर बन रहा है। अयोध्या में राम मन्दिर हिन्दू अस्मिता का एक प्रतीक बनकर तैयार हो रहा है, यह एक अच्छी बात है। उन्होंने इसी क्रम में यह प्रश्न भी किया कि इस बात की क्या गारण्टी है कि 40-50 वर्ष बाद यह पुनः नहीं टूटेगा? आचार्य जी ने कहा कि अतीत में हिन्दुओं के मन्दिर टूटने के कारण क्या रहे, इस पर हिन्दुओं को विचार करना चाहिये।

शीर्ष वैदिक विद्वान आचार्य वागीश आर्य जी ने कहा कि ब्रह्माण्ड का केन्द्र यज्ञ है। यज्ञ का केन्द्र है देव पूजा, संगतिकरण तथा दान। आचार्य जी ने कहा कि जब-जब संगतिकरण बिगड़ता है तब-तब राष्ट्र बिगड़ता है। देश पराधीन होने के कागार पर पहुंच जाता है। आचार्य जी ने कहा कि हमें पता होना चाहिये कि हम बीमार क्यों हुए? हमें अपनी समझ व सूझ-बूझ को जाग्रत करना चाहिये। आचार्य जी ने बताया कि उनकी यूरोपयात्रा में एक बार कुछ भारतीय लोग मिले। उन बन्धुओं से परस्पर चर्चा हुई। उनमे से एक युवक ने खालिस्तान की चर्चा करते हुए हिन्दुओं पर असहज करने वाले कुछ कमेन्ट्स किए। आचार्य जी ने उन्हें कहा कि आप हिन्दुओं के ही वंशज हो। इस विषय पर आचार्य जी ने विस्तार से प्रकाश डाला। हिन्दुओं ने अपना एक एक बच्चा सिख गुरुओं को हिन्दुओं व धर्म की रक्षा के लिए दिया था। एक अन्य विषय को आरम्भ करते हुए आचार्य जी ने श्रोताओं से पूछा कि क्या आप हिन्दुओं से इतर मतों के अनुयायियों के बीच में रहते हुए हिन्दू बने रह सकते हो? आचार्य जी ने बताया कि एक बार कुछ लोगों द्वारा एक सिख कैलेण्डर बनाया और उसे प्रमाणित व स्वीकृत कराने के लिए सिख विद्वानों व गुरुओं से मिले। एक वरिष्ठ सिख विद्वान गुरू ने उस कैलेण्डर को अस्वीकार करते हुए बताया कि हिन्दुओं का नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होता है और यह पूर्ण वैज्ञानिक है। उन्होंने उस कैलण्डर को अस्वीकार कर दिया। अपने विचारों के समर्थन में सिख विद्वान द्वारा कहे गये शब्दों को भी आचार्य जी ने श्रोताओं को बताया। इसके बाद आचार्य जी ने श्रोताओं से पूछा कि यदि संसार में हिन्दू नहीं रहेंगे तो क्या हम लोग आर्यसमाजी रह पायेंगे? आचार्य जी ने बताया कि रामकृष्ण मिशन एक अल्पसंख्यक बन गई है। उन्होंने कहा कि यदि हिन्दू समाज नहीं रहेगा तो आर्यसमाज का अस्तित्व भी नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि यदि हिन्दू समाज आर्यसमाज का विरोध करेगा तो वह अपने मन्दिरों को टूटने से नहीं बचा सकेगा। आचार्य जी ने अपने सम्बोधन में हिन्दूसमाज की कुरीतियों आदि का भी उल्लेख किया।

आचार्य डा. वागीश आर्य जी ने आगे कहा कि आर्यसमाज के लोग वेदों की मान्यताओं व विचारधारा को धारण कर ही आर्य होंगे, अन्यथा वह समान्य रूप से हिन्दू होंगे। उन्होंने कहा कि विवाह तो आर्यसमाज के लोग भी अपने-अपने समाज में करते हैं। इस लिए हम सामान्यरूप से हिन्दू समाज के ही अंग है। आचार्य जी ने सिद्धान्त के आधार पर कहा कि यदि लड़ाई लड़नी पड़ जाये और विजयी होना हो तो उस लड़ाई को कृष्ण जी की तरह से लड़ना चाहिये। शीर्ष वैदिक विद्वान आचार्य डा. वागीश आर्य जी ने श्रोताओं को आर्यसमाजी हिन्दू और सामान्य हिन्दू में अन्तर को भी बताया। अपनी वाणी को विराम देते हुए आचार्य जी ने किसी कवि की वाणी में कहा कि ‘जिन्हें फिक्र है मरहम की उन्हें हम काफिर समझते हैं’।

वैदिक साधन आश्रम तपोवन के ग्रीष्म उत्सव में आचार्य आशीष दर्शनाचार्य, पण्डित उमेशचन्द्र कुलश्रेष्ठ जी सहित स्वामी योगेश्वरानन्द सरस्वती, डा. अन्नपूर्णा जी, डा. रूपकिशोर शास्त्री जी आदि अनेक विद्वानों के व्याख्यान हुए। पं. कुलदीप आर्य, पं. रूवेल सिंह आर्य तथा श्री रमेशचन्द्र स्नेही जी के भजन व गीत भी हुए। अनेक विद्वानों का सम्मान किया गया। आर्यकवि वीरेन्द्र कुमार राजपूत जी के ऋग्वेद के काव्यार्थ के प्रथम दशांश का लोकार्पण भी गौरवपूर्वक किया गया। इन्हीं के साथ आश्रम का ग्रीष्मोत्सव सफलतापूर्वक सोल्लास सम्पन्न हुआ।

-मनमोहन कुमार आर्य
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वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून के दिनांक 11-5-2022 से 15-5-2022 तक आयोजित पांच दिवसीय ग्रीष्मोत्सव के समापन आयोजन में आर्यजगत् के शीर्ष विद्वान डा. वागीश आर्य जी का सम्बोधन हुआ। उन्होंने अपना सम्बोधन एक वेदमन्त्र बोलकर आरम्भ किया। अपने सम्बोधन के आरम्भ में उन्होंने प्रश्न किया कि आर्य और हिन्दू शब्द में क्या अन्तर है? उन्होंने बताया कि हिन्दू शब्द के विरोधी विचारकों का कहना है कि यह शब्द विदेशियों ने हमें दिया है। हमारे प्राचीन शास्त्रों व ग्रन्थों में इस शब्द का उल्लेख नहीं है। दक्षिण भारत तथा काशी विश्वनाथ मन्दिर के मुख्य द्वारों पर भी आर्य शब्द का ही प्रयोग हुआ है। आचार्य वागीश जी ने प्रश्न किया कि दूसरे लोगों का दिया हुआ नाम हम क्यों स्वीकार करें? आचार्य वागीश जी ने बताया कि उनसे किसी ने एक बार प्रश्न किया कि वह अयोध्या में बनने वाले राम मन्दिर से प्रसन्न हैं? इसके उत्तर में आचार्य जी ने उन्हें कहा कि दो बातें हैं? प्रथम हैदराबाद में हिन्दू मन्दिर में पूजा करना बन्द कर दिया गया था। इसके विरोध में देश का कोई हिन्दू नेता या अन्य राजनैतिक नेता सामने नहीं आया था। इसके विरोध में आर्यसमाज आगे आया था। आर्यसमाज और इसके शीर्ष सगठन ने इस प्रतिबन्ध का विरोध किया और हैदराबाद राज्य की जेलों को आर्य सत्याग्रहियों से भर दिया था। आर्यों के नेता लौह पुरुष पं. नरेन्द्र जी की हड्डियों तोड़ दी गई थी। आर्यसमाज व इसके अनुयायियों ने हैदराबाद के सत्याग्रह में अनेक बलिदान दिये। आचार्य जी ने कहा कि राम मन्दिर कोर्ट के आदेश से बन रहा है। यह हिन्दुओं की शक्तियों से नहीं बन रहा है।

वैदिक विद्वान डा. वागीश आर्य जी ने कहा कि आर्यसमाज ने कभी किसी मूर्ति का भंजन नहीं किया। उन्होंने ईश्वर के सत्यस्वरूप एवं मूर्तिपूजा की चर्चा की। आचार्य जी ने कहा कि हिन्दू मन्दिर बनाते हैं इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है। हिन्दू समाज पर जब भी कोई संकट आया है, आर्यसमाज ने आगे आकर हिन्दुओं का साथ दिया है।

डा. वागीश आर्य जी ने कहा कि वह अयोध्या में राम मन्दिर बनने से प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश से मन्दिर बन रहा है। अयोध्या में राम मन्दिर हिन्दू अस्मिता का एक प्रतीक बनकर तैयार हो रहा है, यह एक अच्छी बात है। उन्होंने इसी क्रम में यह प्रश्न भी किया कि इस बात की क्या गारण्टी है कि 40-50 वर्ष बाद यह पुनः नहीं टूटेगा? आचार्य जी ने कहा कि अतीत में हिन्दुओं के मन्दिर टूटने के कारण क्या रहे, इस पर हिन्दुओं को विचार करना चाहिये।

शीर्ष वैदिक विद्वान आचार्य वागीश आर्य जी ने कहा कि ब्रह्माण्ड का केन्द्र यज्ञ है। यज्ञ का केन्द्र है देव पूजा, संगतिकरण तथा दान। आचार्य जी ने कहा कि जब-जब संगतिकरण बिगड़ता है तब-तब राष्ट्र बिगड़ता है। देश पराधीन होने के कागार पर पहुंच जाता है। आचार्य जी ने कहा कि हमें पता होना चाहिये कि हम बीमार क्यों हुए? हमें अपनी समझ व सूझ-बूझ को जाग्रत करना चाहिये। आचार्य जी ने बताया कि उनकी यूरोपयात्रा में एक बार कुछ भारतीय लोग मिले। उन बन्धुओं से परस्पर चर्चा हुई। उनमे से एक युवक ने खालिस्तान की चर्चा करते हुए हिन्दुओं पर असहज करने वाले कुछ कमेन्ट्स किए। आचार्य जी ने उन्हें कहा कि आप हिन्दुओं के ही वंशज हो। इस विषय पर आचार्य जी ने विस्तार से प्रकाश डाला। हिन्दुओं ने अपना एक एक बच्चा सिख गुरुओं को हिन्दुओं व धर्म की रक्षा के लिए दिया था। एक अन्य विषय को आरम्भ करते हुए आचार्य जी ने श्रोताओं से पूछा कि क्या आप हिन्दुओं से इतर मतों के अनुयायियों के बीच में रहते हुए हिन्दू बने रह सकते हो? आचार्य जी ने बताया कि एक बार कुछ लोगों द्वारा एक सिख कैलेण्डर बनाया और उसे प्रमाणित व स्वीकृत कराने के लिए सिख विद्वानों व गुरुओं से मिले। एक वरिष्ठ सिख विद्वान गुरू ने उस कैलेण्डर को अस्वीकार करते हुए बताया कि हिन्दुओं का नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होता है और यह पूर्ण वैज्ञानिक है। उन्होंने उस कैलण्डर को अस्वीकार कर दिया। अपने विचारों के समर्थन में सिख विद्वान द्वारा कहे गये शब्दों को भी आचार्य जी ने श्रोताओं को बताया। इसके बाद आचार्य जी ने श्रोताओं से पूछा कि यदि संसार में हिन्दू नहीं रहेंगे तो क्या हम लोग आर्यसमाजी रह पायेंगे? आचार्य जी ने बताया कि रामकृष्ण मिशन एक अल्पसंख्यक बन गई है। उन्होंने कहा कि यदि हिन्दू समाज नहीं रहेगा तो आर्यसमाज का अस्तित्व भी नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि यदि हिन्दू समाज आर्यसमाज का विरोध करेगा तो वह अपने मन्दिरों को टूटने से नहीं बचा सकेगा। आचार्य जी ने अपने सम्बोधन में हिन्दूसमाज की कुरीतियों आदि का भी उल्लेख किया।

आचार्य डा. वागीश आर्य जी ने आगे कहा कि आर्यसमाज के लोग वेदों की मान्यताओं व विचारधारा को धारण कर ही आर्य होंगे, अन्यथा वह समान्य रूप से हिन्दू होंगे। उन्होंने कहा कि विवाह तो आर्यसमाज के लोग भी अपने-अपने समाज में करते हैं। इस लिए हम सामान्यरूप से हिन्दू समाज के ही अंग है। आचार्य जी ने सिद्धान्त के आधार पर कहा कि यदि लड़ाई लड़नी पड़ जाये और विजयी होना हो तो उस लड़ाई को कृष्ण जी की तरह से लड़ना चाहिये। शीर्ष वैदिक विद्वान आचार्य डा. वागीश आर्य जी ने श्रोताओं को आर्यसमाजी हिन्दू और सामान्य हिन्दू में अन्तर को भी बताया। अपनी वाणी को विराम देते हुए आचार्य जी ने किसी कवि की वाणी में कहा कि ‘जिन्हें फिक्र है मरहम की उन्हें हम काफिर समझते हैं’।

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-मनमोहन कुमार आर्य

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