पंजाब के घटनाक्रम से चौकस हुई कांग्रेस : राजस्थान में सचिन पायलट को संभालने के लिए मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

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रमेश सर्राफ धमोरा 

राजस्थान कांग्रेस में शुरू हुए संकट के दौरान आलाकमान ने पायलट के पक्ष को अनसुना कर गहलोत के दबाव में सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से तथा उनके समर्थक दो मंत्रियों महाराजा विश्वेंद्र सिंह व रमेश मीणा को कैबिनेट मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था।

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों एक बड़ी खबर निकल कर आ रही हैं। राजस्थान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट की एक सप्ताह में दो बार कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से राजस्थान की राजनीति को लेकर लंबी चर्चा हुई है। इस खबर के बाद राजस्थान में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश के कई बड़े नेता इन दिनों दिल्ली जाकर कांग्रेस आलाकमान से मिलकर फीडबैक दे रहे हैं। पंजाब के बाद अब राजस्थान की राजनीति में भी बड़ा बदलाव होता नजर आ रहा है। राजस्थान में काफी समय से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के मध्य मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान चल रही है। इसी कारण पिछले वर्ष सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ बगावत कर 22 विधायकों को लेकर एक महीने तक गुरुग्राम में डेरा डाला था।

उस वक्त कांग्रेस आलाकमान ने पायलट के पक्ष को अनसुना कर गहलोत के दबाव में सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से तथा उनके समर्थक दो मंत्रियों महाराजा विश्वेंद्र सिंह व रमेश मीणा को कैबिनेट मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था। उस समय पायलट की बगावत से डर कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों को एक महीने तक जयपुर, जैसलमेर के होटलों में बाड़ेबंदी कर बंद रखा था। तब मुख्यमंत्री गहलोत कांग्रेस आलाकमान को यह समझाने में सफल रहे थे कि सचिन पायलट ने अंदरखाने भाजपा से मिलकर उनकी सरकार को अस्थिर करने का कुटिल प्रयास किया है जिसकी सजा उसको मिलनी चाहिए। इसी कारण पार्टी आलाकमान ने पायलट व उनके समर्थकों को पदों से हटा दिया था।
लंबे समय तक गहलोत के विरोध में रहने के बावजूद सचिन पायलट द्वारा पार्टी नहीं छोड़ने और पार्टी के खिलाफ कुछ भी नहीं बोलने के कारण कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने मध्यस्तथा कर सचिन पायलट की बगावत को समाप्त करवा कर उनको फिर से पार्टी की मुख्यधारा में शामिल करवाया था। उस समय प्रियंका गांधी के प्रयासों से कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सचिन पायलट को आश्वस्त किया गया था कि उनके द्वारा गहलोत को लेकर की गई शिकायतों का सही मंच पर समुचित समाधान करवाया जाएगा। उसी श्रृंखला में राजस्थान के लिए कांग्रेस आलाकमान ने अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल व अजय माकन की एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
उक्त समिति को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सचिन पायलट के पक्ष को सुनकर दोनों नेताओं के मध्य सामंजस्य स्थापित करवाना व दोनों के मध्य उपजे मतभेद को समाप्त करवाने का काम सौंपा गया था। मगर अचानक ही अहमद पटेल की कोरोना से मौत हो जाने के कारण समिति लंबे समय तक निष्क्रिय बनी रही। अपनी उपेक्षा के बावजूद पायलट ने पार्टी लाइन नहीं छोड़ी। अंततः कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल व प्रदेश प्रभारी महासचिव अजय माकन को जयपुर भेज कर गहलोत व पायलट विवाद को समाप्त करवाने की दिशा में फिर से पहल की।

केसी वेणुगोपाल व अजय माकन ने जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट सहित विभिन्न नेताओं से लंबी चर्चा कर दोनों नेताओं के मध्य व्याप्त मतभेदों को समाप्त करवाने के लिए फीडबैक लिया। लेकिन कोई सर्वसम्मत फार्मूला नहीं बन पाया। इसी दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनकी पत्नी सुनीता गहलोत कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गये। जिसके चलते मुख्यमंत्री को लंबे समय तक एकांतवास में रहना पड़ा। उसके बाद उन्होंने कोरोना बाद की समस्या को लेकर लोगों से मिलना बंद कर मुख्यमंत्री आवास से ही राज कार्य संपादित करना शुरू किया।
इसी दौरान एक बार फिर प्रदेश प्रभारी महासचिव अजय माकन ने जयपुर आकर कांग्रेस व राज्य सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सभी निर्दलीय विधायकों से रूबरू मुलाकात की। जयपुर कांग्रेस कार्यालय में माकन ने लगातार तीन दिन तक विधायकों व पार्टी पदाधिकारियों से वन टू वन मिलकर उनकी व्यक्तिगत राय जानी। इस रायशुमारी में प्रदेश के कई मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर भारी रोष देखा गया। कई विधायकों ने तो माकन से यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री से मिलना तो दूर की बात है। यहां तो मंत्रियों तक से मिलना ही दूभर हो रहा है। ऐसे में आम आदमी की सुनवाई कैसे होगी।
जयपुर में की गयी रायशुमारी के बाद अजय माकन ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर सोनिया गांधी को सौंपी। माकन द्वारा दी गई रिपोर्ट के बाद कांग्रेस आलाकमान ने तय किया कि राजस्थान में ऐसे मंत्रियों को हटा कर संगठन में भेज दिया जाएगा जिनके खिलाफ विधायकों में रोष देखने को मिला है। स्वच्छ छवि के नए लोगों को मंत्री बनाया जाएगा। जिससे लोगों में पार्टी के प्रति व्याप्त हो रही एंटी इनकंबेंसी को खत्म कर आम जनता में एक अच्छा संदेश दिया जा सके। इसी दौरान तय हुआ कि पायलट समर्थक 6 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा तथा कुछ विधायकों व अन्य वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न आयोग, मंडल, बोर्ड में नियुक्त किया जाएगा। उसके बाद कांग्रेस के जिला व ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति होगी। मगर इसी दौरान अशोक गहलोत को हार्ट संबंधित तकलीफ होने के कारण उनका ऑपरेशन करना पड़ा। जिससे कांग्रेस में होने वाला संभावित फेरबदल रुक गया।
पंजाब के बाद अब राजस्थान को लेकर भी कांग्रेस आलाकमान सख्त रुख अपना रहा है। प्रदेश प्रभारी महासचिव अजय माकन भी कह चुके हैं कि स्वास्थ्य लाभ करने के बाद अशोक गहलोत जिस दिन दिल्ली जाएंगे उसके अगले ही दिन सरकार व संगठन में संभावित फेरबदल व नियुक्तियां होनी शुरू हो जाएंगी। कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान को लेकर पूरा ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री गहलोत के अस्वस्थ होने के कारण फेरबदल की पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।
कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट की भूमिका भी तय कर दी है। जिसकी घोषणा प्रदेश में परिवर्तन के बाद किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। कांग्रेस आलाकमान को इस बात का अच्छी तरह पता है कि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते अगले विधानसभा चुनाव में जीत पाना बहुत मुश्किल है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सचिन पायलट को ऐसी भूमिका दी जाए जिससे लोगों का रुझान फिर से कांग्रेस की तरफ हो सके।
राहुल गांधी अच्छी तरह से जानते हैं कि राजस्थान में सबसे अधिक लोकप्रिय व भीड़ खींचने वाले नेता सचिन पायलट ही हैं। ऐसे में यदि पायलट को लंबे समय तक मुख्यधारा से दूर रखा गया तो उसका खामियाजा पार्टी को सत्ता गंवा कर उठाना पड़ सकता है। इसीलिए पार्टी आलाकमान अगले कुछ दिनों में सचिन पायलट व उनके समर्थक विधायकों व कार्यकर्ताओं को उचित मान-सम्मान देने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।

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