‘डिस्क’ का है सफल इलाज के आयुर्वेदिक में, एलोपैथिक डाक्टर आसपास भी नहीं

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वै​द्य अनुराग सिंह राजपूत

स्लिप डिस्क की एक रोगिणी जो पूर्णत: बिस्तर पर थीं, कमर एवं पैरों में तीव्र वेदना, करवट लेना तो दूर, दर्द के कारण हिल तक नहीं पाती थी, रक्त शर्करा स्तर भी चार सौ से ऊपर ही रहता था। उनके भाई स्वयं इंदौर में जाने माने ओस्टियो सर्जन है, उन्होंने उनके लिए शल्य क्रिया ही एक मात्र रास्ता है बतलाया और दो तीन दिन बाद ही उनका आपरेशन होना तय था।
पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। रोगिणी के पति के एक मित्र जो हमारे भी मित्र थे, ने एक बार हमें दिखलाने की सलाह दी, चूंकि वह तीव्र पीड़ा के कारण बिस्तर से नहीं उठ पाती थीं, अत: हमारे मित्र ने घर चल कर उन्हें देखने का आग्रह किया।
समुचित परीक्षण के उपरांत हमने कहा कि हम पूर्ण चिकित्सा का आश्वासन तो नहीं दे सकते किंतु प्रयास अवश्य कर सकते है,उनकी सारी रिपोट्र्स आदि उनके चिकित्सक भाई के पास ही थीं, हमने उनसे फोन पर ही चर्चा की, उन्होंने बड़े ही अनमने ढंग से बात की और कहा कि इसमें तो अब सर्जरी ही अंतिम मार्ग है और परसों या उसके अगले दिन इनकी सर्जरी करना है। हमने उनसे पूछा कि क्या हम सर्जरी दो तीन सप्ताह के पश्चात करें तो कोई दिक्कत तो नहीं है, उन्होंने कहा कोई दिक्कत नहीं, अब तक रोगिणी के पति को भी थोड़ा आत्मविश्वास आ गया और उन्होंने अपने सर्जन साले साहब को कहा कि अभी आपरेशन नहीं करवायेंगे, बाद में विचार करेंगे।
हमने उनका आयुर्वेद उपचार जिसमें औषधियों के साथ साथ पंचकर्म भी था, प्रारंभ किया। लगभग चौदह दिनों के उपचार से उन्हें आशातीत लाभ हुआ एवं वह पूर्ण स्वस्थ हो गई। हमने लगातार दो वर्षों तक उनका निरंतर फालोअप भी लिया, उसमें भी उन्होंने कोई विशेष तकलीफ नहीं बतलाई। कुछ समय पहले हमें उनके बेटे के विवाह का आमंत्रण प्राप्त हुआ। विवाह में वह हमसे अत्यधिक प्रसन्नता से मिली और बतलाया कि वैद्यजी बेटे की शादी के लिए सारे गेहूं मैंने ही धोये और जरा भी दर्द नहीं हुआ।
वहां शादी में जाने का एक मुख्य कारण यह भी था कि हम उनके सर्जन भाई से मिलेंगे और संभव हुआ तो उनके स्वस्थ होने के विषय पर कुछ सकारात्मक चर्चा करेंगे, पर यह क्या वह तो इस विषय पर कोई बात करने को तैयार ही नहीं, उल्टा यह बोले कि कभी कभी ऐसा हो जाता है। हमारा विचार था कि उन्हें जिज्ञासा होगी कि आयुर्वेद से यह रोग बिना सर्जरी के कैसे ठीक हुआ, पर वह तो इसे एक संयोग मान रहे थे। अपने चिकित्सकीय जीवन का अनुभव यह है कि स्लिप डिस्क, सायटिका या स्पांडिलाइटिस जैसे स्पाईनल रोगों के अधिकांश रोगी आयुर्वेद से पूरी तरह से ठीक हो जाते है ।
आप सभी से अनुरोध है कि यदि आपके परिवार, नाते रिश्तेदारों या मित्रों में कोई भी इन रोगों से पीडित हों और सर्जरी का विचार कर रहे हों तब सर्जरी के पूर्व आयुर्वेद को अवश्य ही मौका देवें। पता करें कि आसपास कोई अच्छा वैद्य है अथवा सरकारी अस्पताल के आयुष विंग में जायें, जहाँ पंचकर्म की सुविधा हो एवं चिकित्सा लाभ लेवें, आयुर्वेद चिकित्सा के सभी विकल्पों पर विचार करें, तब भी यदि लाभ न हो तभी सर्जरी के विकल्प को अपनायें।

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