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छाछ भी फूंक-फूंक कर पी रहे हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया*

( पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)

दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है…यह कहावत इन दिनों केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर सटीक बैठ रही है। वे चुनाव में इसी हालत से गुजर रहे हैं। इसी कारण वे लोकसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों में अपनी सक्रियता को समेट कर बैठे हैं। हालांकि वे जिस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उस सीट से उनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पिता माधवराव सिंधिया भी सांसद रह चुके हैं, लेकिन इस बार एक डर उन्हें इस सीट पर सता रहा है। इसी डर के कारण वे इस सीट से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में हमेशा ही ग्वालियर के राजपरिवार का अपना महत्व और प्रभाव रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने जहां भाजपा को शुरूआती दौर में देश भर में मजबूत करने के लिए अथक प्रयास किए थे। उनके प्रयासों का सम्मान भाजपा में आज भी है। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया का गुना क्षेत्र में अपना खासा प्रभाव रहा है। वे जब ग्वालियर लोकसभा सीट पर कम अंतर से जीते थे तो उन्होंने गुना लोकसभा सीट पर वापसी करते हुए चुनाव लड़ा था और रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया का गुना और ग्वालियर क्षेत्र से अपनत्व का भी नाता रहा है। वे यहां के महाराजा जरुर रहें, लेकिन उनके प्रति यहां की जनता में हमेशा सम्मान रहा। वहीं माधवराव सिंधिया की ही तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी राजनीतिक शुरूआत गुना लोकसभा से ही की। माधवराव सिंधिया नेअपना पहला चुनाव 1971 में गुना से ही लड़ा था। बाद में वे ग्वालियर से चुनाव लड़ने लगे थे। वहीं पिता माधवराव सिंधिया के निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस ने गुना सीट से चुनाव लड़वाया था।
सिंधिया वर्ष 2019 में गुना से कांग्रेस के उम्मीदवार थे और भाजपा ने यहां से केपी यादव को उम्मीदवार बनाया था। केपी यादव ने सिंधिया को यहां से चुनाव हरा दिया। यह पहला मौका था जब गुना लोकसभा सीट से सिंधिया परिवार के किसी सदस्य की हार हुई हो। इस चुनाव के करीब साल भर बाद सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए और उन्हें राज्यसभा में भेजा गया।
अब गुना लोकसभा सीट से केपी यादव का टिकट काटकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस ने इस बार इस सीट पर जातिगत समीकरण की नस पकड़ ली और उन्होंने यहां से यादवेंद्र सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया । यादवेंद्र के पिता राव देशराज सिंह यादव इस क्षेत्र की राजनीति में बड़ा नाम थे। वे भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी जीते थे।
अब एक बार फिर से यदुवंशी समाज के उम्मीदवार से सिंधिया का मुकाबला हो रहा है। यहां पर यादव समाज की संख्या अच्छी खासी है।अपनी पिछली हार से सबक लेकर इस बार सिंधिया कोई भी चूक नहीं करना चाहते हैं। न ही वे अपने इस चुनाव को हल्के में ले रहे हैं। वे चुनाव जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। इसके चलते ही वे गुना लोकसभा क्षेत्र से बाहर ही नहीं निकल रहे। बल्कि इस बार के चुनाव में उनकी पत्नी और बेटा भी चुनाव प्रचार में डटे हुए हैं। सिंधिया के सभी समर्थक नेता और मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री भी यहां पर अधिक से अधिक समय दे रहे हैं। सिंधिया भाजपा के स्टार प्रचारक होते हुए भी फिलहाल दूसरे लोकसभा क्षेत्रों में सभा एवं चुनाव प्रचार करने से परहेज कर रहे हैं। इस सीट पर तीसरे चरण में सात मई को मतदान होना है,तब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया सिर्फ और सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र में ही व्यस्त रहेंगे ।(विनायक फीचर्स)

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