मज़बूरी का फायदा उठाने की कला

24 मार्च 2015 को पोप फ्रांसिस ने ट्वीट किया था- ‘आपदा कन्वर्जन का आह्वान है।’

अप्रैल 2015 में नेपाल में बहुत बड़ा भूकम्प आया. लाखों लोग बेघर हो गए. नेपाली गांव रिचेट भी नष्ट हो गया। रिचेट में सबसे पहले चर्च का पुनर्निर्माण हुआ. राहत शिविरों में बड़ी संख्या में हिन्दूओं को ईसाई बनाया गया. पूरी दुनिया ने सहायता के नाम पर दवाइयां, भोजन सामग्री, तिरपाल, नमक, चीनी व कम्बल आदि भेजे. सहायता करने वालों में भारतीय सबसे आगे थे. उन्होंने बिना भेदभाव के सहायता की. कैथोलिक मिशनरियों ने बड़ी संख्या में बाइबल भेजी. मिशनरी का सेवा भाव केवल दिखावा है जबकि वह मरते हुए इंसान को भी ईसाई बनाने मे विश्वास करते है। नेपाल मे लोग मर रहे है और मिशनरी के लोग इस को एक मौके के रूप मे देख रहे है. उन का मानना है कि मरते हुए आदमी की हेल्प कर के लोगो को आसानी से ईसाई बना सकते है। नेपाल के भूकंप पीडि़तों में बांटने के लिए 1 लाख बाइबल लायी गयी.

नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने ईसाई मिशनरियों कहा है कि मैं आपसे आग्रह करता हूं कि उठें और वास्तव में कुछ करें। हमें अपने लोगों को बचाने के लिए राशन, पानी और टेंट चाहिए बाइबल की हमे कोई जरुरत नहीं हैं बिना किसी शर्म के बहुत से ईसाई नेपाल के भयंकर भूकम्प को एक मौका मानकर उसका उत्सव मना रहे हैं। वे मौत और तबाही में फायदा देख रहे हैं। जब बर्बादी के घाव ताजा हैं, तब ‘रिलीजन’ के व्यापारी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आये हैं और ईसाइयत बेच रहे हैं। अनेक ईसाई मिशनरी इस विपत्ति का पैसा उगाहने के लिए दोहन कर रहे हैं। पैसा, जो पीडि़तों के दुख दूर करने के स्थान पर नेपालियों तक जीसस का ‘शुभ समाचार’ पहुंचाने में खर्च किया जायेगाा. जब नेपाल में धरती हिली तो सोशल मीडिया में भी हलचल मची। सारी दुनिया में मानवीय संवदनाएं उमड़ रही थीं। परन्तु मिशनरियों का मजहबी उन्माद भी चरम पर था।

अमरीकी पास्टर टोनी मिआनो ने नेपालियों के घावों पर नमक छिड़कते हुए ट्वीट किया- ‘नेपाल के मृतकों के लिए प्रार्थना कर रहा हूं। प्रार्थना कर रहा हूं कि एक भी ध्वस्त मंदिर दोबारा नहीं बनाया जाए और लोग जीसस को स्वीकार करें।’ अनेक हिन्दुओं ने इस पर आपत्ति जताई, तो टोनी ने दूसरा ट्वीट किया-‘मुझे फर्क नहीं पड़ता।

जोशुआ एग्वीलर ने ट्वीट किया-‘1400 सोल्स मारी जा चुकी हैं, और ऊपर जा रही हैं। सोचता हूं उनमें से कितनों ने गॉस्पेल सुनी होगी।’
ब्रायन ई़फ्रेजर का ट्वीट था-‘नेपाल में 7. 8 तीव्रता का भयंकर भूकंप आया। जीसस के शीघ्र लौटने के चिन्ह दिखाई दे रहे हैं।’

क्रिस चौडविक ने लिखा-‘नेपाल के लिए प्रार्थना कर रहा हूं कि यह आपदा लोगों के लिए गॉस्पेल स्वीकार करने का दरवाजा बने।’

जेसन साइक्स ने लिखा-‘नेपाल के लिए प्रार्थना कर रहा हूं। आशा करता हूं कि काटने के लिए फसल तैयार मिले।’ इस आपदा के कारण नेपाल के दरवाजे क्राइस्ट के लिए खुल जाएं।’

नेपाल में बात बाइबिल और क्रॉस बांटने तक सीमित रहने वाली नहीं है। जब कन्वर्जन करना हो तो उसके लिए व्यक्ति की परंपरा से चली आ रही आस्था को भी खंडित करना आवश्यक होता है, तभी उसे फुसलाया जा सकता है। इसके लिए मिशनरी हिन्दू देवी-देवताओं के प्रति घृणा फैलाने वाला मुड़े-तुड़े तथ्यों और फरेब से भरा साहित्य स्थानीय भाषाओं में छापकर बांटतें हैं। छोटे-छोटे समूहों में ‘अविश्वासियो’ को ये साहित्य पढ़कर सुनाया जाता है।

1990 के दशक में नेपाल में इसाइयों की आबादी मात्र 20 हजार बताई गई थी, वहीं अब इन वर्षो में यह आबादी बढ़ कर 7 फीसदी यानी 21 लाख से अधिक हो गई है. पिछले 20 सालों में नेपाल में इसाई मिशपरियों का जाल बहुत तेजी से फैला है यह बीमारी नेपाल के तमाम अंचलों में तेजी से फैल गई हैं. नेपाल के बुटवल में कई चर्च बन चुके हैं. इसके अलावा नारायण घाट से बीरगंज के बीच कोपवा, मोतीपुर, आदि में हजारों लोगों ने इसाई धर्म स्वीकर कर छोटे छोटे चर्च स्थापित कर लिए हैं. जो अपना धार्मिक कारोबार इतना तेजी से विकसित कर रहे है कि आने वाले समय में नेपाल तो होगा किन्तु नेपाल का कुछ नहीं होगा.
भारत में कैथोलिक चर्चों के पास अति विशाल भूमि है. विदेशी कैथोलिक उद्योगपति द्वारा दान भी बहुत अधिक है. इनका उपयोग मिडिया और शासन/ प्रशासन को नियंत्रण में किया जाता है. इसलिए इनके विरूद्ध मिडिया चुप है और शासन/ प्रशासन अन्धा बहरा. इसलिए प्रत्येक हिन्दू का कर्त्तव्य है कि मिशनरी के मकडजाल से सावधान रहे. दूसरों को भी सावधान करे. इस वहम में ना रहें कि

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.
अफगानिस्तान तक थी बस्ती कभी तुम्हारी.

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