Categories
आओ कुछ जाने

जागरूकता से कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है

फ़िरोज़ा अंसारी
पुंछ, जम्मू

“मुझे करीब पांच साल पहले गले के कैंसर के बारे में पता चला. पहले मुझे कान के पास एक छोटी सी गांठ हो गई थी. जिस पर मैंने बहुत गंभीरता से ध्यान नहीं दिया. धीरे-धीरे मेरी भूख बंद हो गई. जब मैंने चेकअप करवाया तो पता चला कि मुझे कैंसर हो चुका है. मेरा इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है. परंतु जब मुझे कैंसर का पता चला तब यही लगा था कि अब मैं नहीं बच पाऊंगा, परंतु यह मेरी गलतफहमी थी. इस बीमारी का अगर इलाज समय रहते करवाया जाए तो इससे बचा जा सकता है. अब मैं पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका हूं और पिछले कुछ महीनों से अपना व्यवसाय भी कर रहा हूं.” यह कहना है जम्मू के गोरखा नगर के रहने वाले 25 वर्षीय प्रीत कुमार का, जिन्हें लगभग 20 साल की आयु में गले का कैंसर हो गया था.

दरअसल, कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर के किसी भी हिस्से की कोशिकाएं निरंतर रूप से विभाजित होने लगती हैं. यह शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलता है. यदि इसे शुरुआती लक्षण में ही पहचान लिया जाए, तो इसे खतरनाक स्थिति तक पहुंचने से रोका जा सकता है. लेकिन शुरू में लोग जागरूकता के अभाव में शरीर में होने वाले परिवर्तन को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो भविष्य में कैंसर का रूप ले लेता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में हर साल 8.8 मिलियन लोगों की कैंसर से मौत हो जाती हैं। “द लैंसेट जर्नल” पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में इसके बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सहित सात देशों में तंबाकू से होने वाले कैंसर के कारण हर साल 13 लाख से अधिक लोगों की जान चली जाती है। इन सात देशों में भारत, चीन, ब्रिटेन, ब्राजील, रूस, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिकी देश शामिल हैं।

यदि केवल भारत में कैंसर से पीड़ितों की बात करें तो यह आंकड़ा 13 लाख को पार कर चुका है। वहीं हर साल 12 फ़ीसदी की दर से केस बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि कैंसर के मामलों की संख्या 2025 तक 15 लाख को पार कर सकती है। वर्ष 2020 में जारी की गई “नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम” की रिपोर्ट पर नजर डालें तो वर्ष 2020 तक भारत में 679421 पुरुष कैंसर से ग्रसित थे। बढ़ते मामलों के आधार पर यह अनुमान लगाया गया कि वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 763575 तक पहुंच सकता हैं। वहीं कैंसर पीड़ित महिलाओं की संख्या वर्ष 2020 में 7127583 थी, जो 2025 तक 806218 तक पहुंचने का अनुमान है। बीते वर्ष 2023 में लोकसभा में कैंसर रोगियों के आधिकारिक संख्या पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के “राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम” के हवाले से बताया था कि देश में कैंसर के मामले की कुल संख्या साल 2022 में 1461427 रही थी।

वहीं अगर केंद्र प्रशासित जम्मू कश्मीर की बात करें तो यहां पर भी कैंसर के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है। “राष्ट्रीय कैंसर पंजीकरण” कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार जहां वर्ष 2011 में 4556 कैंसर पीड़ितों की संख्या दर्ज की गई थी, वहीं साल 2012 में 4848, 2013 में 5068, 2014 में 5568, 2015 में 6358, साल 2016 में 15652, 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 16480 और साल 2018 में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़कर 17351 तक पहुंच गई है। जम्मू में कैंसर रोगियों के पिछले 4 वर्षों में 51000 केस दर्ज हुए हैं। इनमें 25 प्रतिशत मैदे के कैंसर के मरीज हैं। 13.2 प्रतिशत लंग्स कैंसर के और 16 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर के मामले दर्ज किए गए हैं। कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों में पाए जाने वाले कैंसर के लक्षण और महिलाओं में पाए जाने वाले लक्षण थोड़े अलग हैं। मुंह,फेफड़े, पेट, और बड़ी आंत के कैंसर भारतीय पुरुषों में सबसे अधिक पाए जाते हैं, वहीं महिलाओं में मिलने वाले कैंसर के मामले में स्तन कैंसर आम है। हालांकि ग्रामीण महिलाओं में अब भी “सर्वाइकल और गर्भाशय” जैसे कैंसर के मामले सबसे अधिक मिलते हैं।

कुछ ऐसे भी मरीज हैं जो समय रहते इस बीमारी से छुटकारा पा चुके हैं। रेगुलर चेकअप के दौरान जो कैंसर मरीज ठीक हुए हैं, उनमें जम्मू के मिश्रीलाल इलाके के रहने वाले 67 वर्षीय सुखदेव राज भी हैं। जो पिछले कई सालों से छाती में कैंसर के मरीज रहे हैं। सुखदेव राज का कहना है “मैं काफी लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रहा हूं। पहले मेरा इलाज जम्मू चला। जब वहां कुछ खास आराम नहीं आया तो मैं चंडीगढ़ चला गया। वहां लगभग 3 महीने मेरी ट्रीटमेंट चली। इसके उपरांत मुझे अब थोड़ा आराम है। प्रारंभ में मुझे छाती में थोड़ी प्रॉब्लम नजर आई, मुझे कुछ रसौलियां बन गई थी। जिसमें धीरे धीरे दर्द रहने लगा। जब मेरा चेकअप हुआ तो पता चला कि मुझे कैंसर है।” वह कहते हैं कि यदि समय-समय पर चेकअप होती रहे तो यह बीमारी जल्द पकड़ी जा सकती है, जिसका इलाज भी संभव है। वहीं 60 वर्षीय बेबी देवी कहती हैं कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर हुआ था। जो पहली स्टेज में ही पकड़ा गया था। मेरा चंडीगढ़ में काफी लंबा इलाज चला। अब मैं बिल्कुल ठीक हूं। अगर समय रहते मैं अपना चेकअप ना करवाती तो मुझे मेरी बीमारी जानलेवा हो चुकी होती।

विशेषज्ञों का यह मानना है कि कैंसर के सभी रूपों का इलाज संभव है। लेकिन इसके लिए लोगों को स्वयं जागरूक होने की जरूरत है। उन्हें अपने शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को नज़रंदाज़ नहीं करनी चाहिए। समय समय पर चेकअप इस बीमारी को गंभीर होने से पहले समाप्त कर सकता है। वहीं व्यायाम, पौष्टिक भोजन और तंबाकू उत्पादों के सेवन से परहेज इसके खतरे को कम करने में मददगार साबित होता है। हालांकि हर वर्ष 4 फरवरी को कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व कैंसर दिवस भी मनाया जाता है। लेकिन इसके बावजूद यदि यह बीमारी फैल रही है तो सरकार, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संगठन और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का यह कर्तव्य बनता है कि वह जागरूकता की इस प्रकार की नीति बनाए जहां एक आम आदमी भी इस खतरे को आसानी से पहचान सके। (चरखा फीचर)

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
Casinolevant Giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş