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आज का चिंतन

यह संसार किसने और क्यों बनाया ?

सुप्रभातम।
शुभ दिवस की मंगल कामनाएं।
प्रश्न-तीन पदार्थ नित्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर आत्मा, परमात्मा और प्रकृति तीनों अनादि अजर अमर हैं।
प्रश्न -इन तीनों में से हम कौन हैं?
उत्तर-हम आत्माएं हैं।
प्रश्न- यह संसार किसने बनाया?
उत्तर- यह संसार ईश्वर ने बनाया।
प्रश्न-ईश्वर ने संसार क्यों बनाया? किसके लिए बनाया?
उत्तर- ईश्वर ने यह संसार आत्माओं (जीवों) के लिए बनाया।
प्रश्न -आत्माओं के लिए क्यों बनाया?
उत्तर- पहले जन्मों के कर्मों का भोग भोगने के लिए और नए कर्म करने के लिए।
प्रश्न -ईश्वर को क्या आवश्यकता पड़ी थी संसार को बनाने की?
उत्तर-ईश्वर को कोई आवश्यकता नहीं थी, आत्मा के कहने पर उन्हीं के अनुरोध पर संसार की रचना की। जो आत्मा में मोक्ष से लौटकर प्रकृति का आनंद लेना चाहती है। इस प्रकार आत्मा के लिए आत्मा के कहने पर ईश्वर ने संसार बनाया।
प्रश्न- ईश्वर ने यह संसार किससे बनाया?
उत्तर- ईश्वर ने यह संसार प्रकृति से बनाया।
प्रश्न-प्रकृति क्या है?
उत्तर-प्रकृति जड़ है।
प्रश्न- प्रकृति से ईश्वर ने क्या-क्या लेकर संसार की रचना की?
उत्तर-ईश्वर ने प्रकृति जड़ से सत, रजस,और तमस लेकर।
प्रश्न -सत,रजस, और तमस से ईश्वर ने और क्या बनाया?
उत्तर-आत्माओं का शरीर और पूरा ब्रह्मांड।
प्रश्न- संसार में आकर आत्माएं दुख क्यों भोंगती हैं?
उत्तर- कर्म फल के अनुसार।
प्रश्न- कर्म फल से छुटकारा कैसे हो सकता है?
उत्तर -अत्यंत दुख निवृत्ति के लिए मोक्ष का प्रयास करना चाहिए।
प्रश्न-दुख कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर-आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक तीन प्रकार के दुख (त्रिविध दुख सांख्य दर्शन में) होते हैं।
प्रश्न-इन तीन दुखों से कैसे छूटे?
उत्तर -निष्काम कर्म करने से।
प्रश्न -निष्काम कर्म क्या है?
उत्तर-निष्काम कर्म ईश्वर का ध्यान, उपासना, ईश्वरप्राणिधान एवं मोक्ष की प्राप्ति?
प्रश्न-मोक्ष की प्राप्ति भी तो एक इच्छा है वह निष्काम कर्म कैसे कैसा कहा जा सकता है?
उत्तर -यह कहना बिल्कुल ठीक है कि निष्काम कर्म का मतलब सारे कर्मों की इच्छा समाप्त हो जाना नहीं है ।बल्कि केवल मोक्ष की इच्छा रखने और ईश्वर का ध्यान करना यह निष्काम कर्म है।
प्रश्न-आत्मा बार-बार जन्म क्यों लेता है?
उत्तर- सकाम कर्म करने के कारण बार-बार मरना और जन्म लेना पड़ता है।

प्रश्न -सकाम कर्म किसको कहते हैं?
उत्तर- प्रकृति के सुख भोगने के लिए जो इच्छा होती है वह सकाम कर्म कही जाती है ।यही इच्छा आत्मा की समाप्त नहीं होती। इसलिए बार-बार जीना मरना पड़ता है।
प्रश्न-हमारे शरीर में सत,रज, और तम का कितना अनुपात है?
उत्तर- तीनों का बराबर बराबर अनुपात है।
प्रश्न- सत का क्या प्रभाव है हमारे शरीर में और ब्रह्मांड में?
उत्तर -सात्विक गुण प्रदान करता है सात्विकता उत्पन्न करता है।
प्रश्न -रज क्या करता है हमारे शरीर में?
उत्तर सुख भोगने की इच्छा।
प्रश्न तम की क्या भूमिका है हमारे शरीर में अथवा ब्रह्मांड में?
उत्तर- मूर्खता, अंधकार पैदा करना होता है।
सत्, रज और तम तीनों का सम्मिश्रण यह संसार अथवा शरीर है। सत्य राज और तम तीनों का बराबर अनुपात होने के कारण रज और तम की मात्रा 67 प्रतिशत हमारे शरीर में होती है। जिससे हम अंधकार में, अज्ञानता में मूर्खता में, सुख भोग की इच्छा में जीते हैं। यही हमारे दुखों का कारण है। यदि हम दुखों से छूटना चाहते हैं तो हमको बार-बार जन्म लेने से छूटना होगा। बार-बार जन्म लेने से छुटकारा तब मिलेगा जब हम सकाम कर्म करना बंद कर देंगे। सकाम कर्म केवल असंप्रज्ञात समाधि अथवा निर्विज समाधि में ही समाप्त होंगे।
इसलिए योग के आठ अंगों को अपनाना चाहिए।
देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट
अध्यक्ष उगता भारत समाचार पत्र, ग्रेटर नोएडा।
चलभाष 98 1183 8317

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