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मॉरीशस अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन और मॉरीशस के लोग

 मुझे 9 फरवरी से 14 फरवरी 2024 तक मॉरिशस में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां पर कार्यरत आर्य महासभा द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती जी के जन्म के 200 वर्ष के उपलक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन  का आयोजन 10 से 12 फरवरी तक किया था। इस कार्यक्रम में एक अतिथि के रुप में उपस्थित होकर असीम आनंद की अनुभूति हुई। कार्यक्रम में पांच महाद्वीपों के आर्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 


कार्यक्रम का शुभारंभ 10 फरवरी को किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. चिरंजीव भारद्वाज आश्रम बेल मार में सम्पन्न किया गया। जिसके मुख्य अतिथि महामहिम पृथ्वीराज सिंह रुपन (मॉरिशस गणराज्य के राष्ट्रपति ) बनाये गए थे, परंतु किन्हीं विशेष कारणों से वह इस कार्यक्रम में उस दिन उपस्थित नहीं हो पाए। इस अवसर पर आयोजित किए गए बहुकुंडीय यज्ञ में बालक , बालिकाओं , युवाओं , महिलाओं , पुरषों , वृद्धों आदि सभी ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह आर्य महासभा मॉरीशस का विशेष परिश्रम और पुरुषार्थ ही था कि इस समय पर किशोरों और युवाओं की संख्या पर्याप्त थी। जिसे देखकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा।
पहले दिन के इस यज्ञ का संचालन विद्वान आचार्य श्री सुदेश बद्री, शिव शंकर रामखेलावन, आचार्य जितेंद्र पुरुषार्थी जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर आर्य सभा मॉरिशस की मान्य प्रधाना श्रीमती धनवंती रामचरण , आर्य युवक संघ के प्रधान रजनीश नबाब, आर्य सभा मॉरीशस के प्रधान राजेंद्र प्रसाद राम जी , आर्य नेता, वेदों के उद्भट विद्वान, लेखक और महान इतिहासकार डॉ उदय नारायण गंगू ( जी0ओ 0एस 0के0,) मेलबॉर्न ऑस्ट्रेलिया से उपस्थित रहीं श्रीमती मृदुल कीर्ति जी, लखनऊ (भारत) से उपस्थित रहे प्रोफेसर चंद्रमणि सिंह, डॉ राकेश कुमार आर्य ( दिल्ली , भारत ) अर्थात मेरा स्वयं का संबोधन हुआ। फ्लॉक आर्य जिला परिषद के प्रधान श्री विशाल भोला द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम सारी व्यवस्था सुचारु रुप से चलती रही। जिसे देखकर आत्मिक प्रसन्नता की अनुभूति हुई।
11 फरवरी का कार्यक्रम sports complex में आयोजित किया गया। जिसमें मॉरीशस गणतंत्र के प्रधानमंत्री माननीय प्रवीण कुमार जगनोथ मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित हुए। इस अवसर पर मॉरिशस के प्रधानमंत्री ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद जी महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके महान कार्यों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद जी महाराज वेदों के महान व्याख्याता थे। जिन्होंने मानवता के लिए महान कार्य किया। यह हमारा सौभाग्य है कि उनके आदर्शों पर चलते हुए आर्य सभा मॉरिशस देश के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने मॉरिशस के निर्माण में आर्य समाज की विशेष और सक्रिय भूमिका की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर बल दिया और इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि स्वामी दयानंद जी महाराज ने अबसे 150 वर्ष पहले महिलाओं की शिक्षा पर बल देकर आधी आबादी को उचित सम्मान दिया था। इस दिन मॉरिशस गणराज्य के कई मंत्री भी उपस्थित रहे। जिनमें यहां की उपप्रधानमंत्री की उपस्थिति विशेष रुप से उल्लेखनीय रही । कार्यक्रम में कई विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। मॉरिशस आर्य समाज के इतिहास पर आर्य नेता डॉ गंगू जी द्वारा जबकि भारत में आर्य समाज के क्रांतिकारी इतिहास पर स्वयं मेरे द्वारा, ब्रिटेन आर्य समाज की ओर से डॉ. अरुणा अजितसरिया जी और केन्या में आर्य समाज के इतिहास पर नैरोबी आर्य समाज के प्रधान श्री राजेंद्र सैनी द्वारा प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के अंत में आर्यसभा मॉरिशस की ओर से 6 प्रस्ताव भी पारित किए गए । जिनमें से एक प्रस्ताव स्वयं मेरे द्वारा भी तैयार किया गया। मैं आर्य नेता डॉ गंगू जी और आर्यसभा मॉरिशस का इस बात के लिए धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मेरे प्रस्ताव को इस अंतरराष्ट्रीय महासम्मेलन में स्थान दिया। इन प्रस्तावों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय महासम्मेलन में उपस्थित हुए आर्यजनों ने मांग की कि स्वामी8ही दयानंद जी महाराज के सिद्धांतों के अनुकूल विश्व की शिक्षा व्यवस्था को बनाया जाए।वसुधैव कुटुंबकम और कृण्वंतो विश्वमार्यम को विश्व संस्था संयुक्त राष्ट्र का सूत्रवाक्य घोषित करते हुए संस्कृत भाषा की स्थिति को सुधारने की दिशा में काम किया जाए। कार्यक्रम के समापन पर अपना भाषण देते हुए मॉरिशस गणराज्य की उप प्रधानमंत्री और शिक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्रीमती लीला देवी दुकन
द्वारा आश्वस्त किया गया कि वह इस सभा द्वारा पारित किए गए प्रस्तावों को उचित मंच तक पहुंचाने का काम करेंगी।
12 फरवरी का कार्यक्रम आर्य भवन पोर्ट लुई में आयोजित किया गया। जिसके मुख्य अतिथि मॉरिशस गणराज के स्वास्थ एवं स्वस्थता मंत्री कैलेश सिंह जगतपाल रहे। इस दिन का मुख्य विषय महर्षि दयानंद का व्यक्तित्व और कृतित्व रहा। इस दिन भी अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए और स्वामी जी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व को आज के वैश्विक परिवेश के लिए आवश्यक मानते हुए इस बात पर बल दिया कि संपूर्ण विश्व से प्रत्येक प्रकार की आपराधिक सोच,आपराधिक मानसिकता, शोषण, अत्याचार और अन्याय को समाप्त किया जाए और स्वामी दयानंद जी महाराज के सपनों का संसार बनाने की दिशा में सभी आर्य लोग कार्य करें।
मैं आर्य सभा मॉरिशस के परस्पर के समन्वय को देखकर अत्यंत अभिभूत हुआ। सभी लोगों के भीतर अपने देश मॉरीशस के साथ-साथ ऋषि दयानंद और उनके अपने पूर्वजों की जन्मभूमि भारत के प्रति भी गहरा लगाव है। कई पीढ़ियों के गुजर जाने के उपरांत भी उन लोगों के दिल में भारत बसता है। भारत को ये लोग पवित्र भूमि मानते हैं। वेदों की भूमि मानने के कारण भारत का कण कण इनके लिए पवित्र है। भारत से पहुंचने वाले लोगों के प्रति इनका सम्मान का भाव देखते ही बनता है। डॉ देबीदास, डॉ कविराज जैसे कई लोगों ने यहां के बारे में मुझे विशेष जानकारी दी। बहन डॉ माधुरी रामधारी जी (महासचिव विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस ) का नाम लेना भी आवश्यक समझता हूं जिनकी उदारता और आतिथ्य सत्कार ने सभी लोगों को गदगद कर दिया। उनकी माता जी श्रीमती विद्याधरी गंगू वृद्धावस्था में होकर भी प्रेम और करुणा की प्रतिमूर्ति दिखाई दीं। माधुरी जी के पतिदेव राजीव और बेटी अक्षिता व मितीशा के संस्कारों ने भी मुझे प्रभावित किया।
आर्य नेता डॉ उदयनारायण गंगू जी के बारे में मेरी मान्यता है कि वह सर शिवसागर रामगुलाम जी के बाद के मॉरीशस के समाज के इस समय और सबसे आदरणीय नेता हैं। सरकार और समाज के लोग उनकी निश्छल देशभक्ति की भावना, आर्य संस्कारो से बने व्यक्तित्व को सम्मान देते हैं । वे सदभाव से लोगों को अपने साथ लगा लेते हैं और सभी को एक दिशा में, एक सोच के साथ आगे बढ़ने की सहज प्रेरणा देते हुए अपने जीवन के 81 बसंत पूर्ण कर चुके हैं। उनके साथ रहकर बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
पहले दिन के कार्यक्रम के अपने संबोधन में मेरे भीतर विचारों का जो प्रवाह उठा था, उसने सहज ही इन पंक्तियों का दोहे के रूप में निर्माण कर दिया था: –

मॉरीशस से देश में, मची वेद की धूम।
वेद गीत संगीत पर लोग रहे है झूम।।

बाल वृद्ध सब गा रहे स्वस्ति मंगल गीत।
अतिथि देश विदेश के बढ़ा रहे है प्रीत।।

मृदुल जी की मिठास है गंगू जी का स्नेह।
नेरोबी के श्रेष्ठ जन, बरसा रहे हैं मेह।।

मेरी इन पंक्तियों को सभी ने प्रशंसित किया।

मॉरीशस हमारा भाई है। मॉरिशस के लोग हमारी आत्मा का एक अभिन्न भाग हैं। उनके इतिहास को मैंने डाक्टर गंगू जी की दृष्टि से देखने का प्रयास किया। जब भारत से अंग्रेजों के द्वारा जबरदस्ती कुछ मजदूरों को बहला फुसला कर अपना गुलाम बना कर मॉरिशस ले जाया गया था तो उस समय किसी ने भी नहीं सोचा था कि जिन लोगों को आज गुलाम बनाया जा रहा है वही एक दिन इस देश के स्वामी होंगे। वैसे , ईश्वर की न्याय व्यवस्था का परिणाम सदा ऐसा ही आता है कि जिनका दमन और शोषण किया जाता है , वही एक दिन ऊपर आते हैं,  और यही मॉरिशस के लोगों ने कर दिखाया है। जिन अंग्रेजों ने मॉरिशस के हिंदू समाज के लोगों को भारत से ले जाकर अपना गुलाम बनाये रखने के सपने संजोए थे आज उनके पास यहां कुछ भी नहीं है। जबकि यहां के सभी आर्थिक संसाधनों और सरकार तक पर भारत के मॉरिशस वासी लोगों का अधिकार है। यद्यपि वे सभी अन्य समुदायों का सम्मान करते हुए मिलजुल कर आगे बढ़ने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। मेरा मानना है कि स्वामी दयानंद जी के आर्य समाज के क्रांतिकारी आंदोलन से जन्मे संस्कारों ने मॉरिशस को शांतिप्रिय और ईमानदार लोगों का देश बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मॉरिशस के लोगों ने अपने आचरण और व्यवहार से वेद के मानवीय चिंतन को प्रकट करते हुए अपने देश के प्रति समर्पण दिखाया है। उनकी मानवता वादी सोच वेद के मंत्रों की प्रत्येक आहुति के साथ मॉरिशस के वायुमंडल को शुद्ध और पवित्र बनाती है। माना कि वेदो की पवित्र भूमि भारत है, परंतु वेदों की गूंज की पवित्र भूमि इस समय मॉरिशस बन चुका है । मॉरिशस के वेदभक्त हिंदू समाज को अपनी मान्यताओं, अपने तीज त्यौहारों और अपने महापुरुषों पर गर्व की अनुभूति होती है। अयोध्या में बने श्री राम जी के मंदिर पर इन लोगों को उतनी ही प्रसन्नता है जितनी भारत के आर्य लोगों को प्रसन्नता हुई है। यह लोग भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित होते देखना चाहते हैं । उनकी इच्छा है कि वेदों की पवित्र भूमि फिर से संसार का मार्गदर्शन करने के लिए आगे आए।

इसका कारण केवल एक है कि मॉरिशस के लोग भारत के इतिहास, भारत की परंपराओं और भारत के महापुरुषों के प्रति आज भी गहरी श्रद्धा भावना रखते हैं । उन्हें भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी के द्वारा लिए जा रहे उन निर्णयों पर भी आत्मिक प्रसन्नता की अनुभूति होती है हिंदू जिनसे हिंदू समाज की अस्मिता की रक्षा होना संभव है। विशेष रुप से धारा 370 को हटाने और अब समान नागरिक संहिता लागू करने जैसे निर्णयों पर ये लोग अपनी खुलकर अभिव्यक्ति देते हैं। अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि : –

मॉरीशस की पावन धरती गीत वेद के गाती है।
बड़ी मनोरम प्यारी प्यारी सबके मन को भाती है।।

युग युगों से भारत माता वेदों का संदेश लिए,
मानवता के हित से पूरित कितने ही उपदेश किए।
मॉरीशस चला उसी राह पर सभा यही बतलाती है….

डॉ राकेश कुमार आर्य

( लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है।)

डॉ राकेश कुमार आर्य भारत से चलकर अभी हाल ही में हमारे देश में संपन्न हुए अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में सम्मिलित हुए थे। उन्होंने तीन दिन तक कई सभाओं को यहां पर संबोधित किया । डॉ आर्य की राष्ट्रवादी चिंतन धारा से ओतप्रोत 75 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं ।उन्होंने यहां रहकर अपने अनुभव और अनुभूतियों को इस लेख के माध्यम से पिरोने का प्रयास किया है। जिसे हम यथावत यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।

  • डॉ उदयनारायण गंगू

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