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भ्रूण हत्या : परमात्मा को चुनौती

दीपचन्द्र निर्मोही- विभूति फीचर्स
वस्तुओं को ज्यों का त्यों देखना ही ज्ञान है।
ज्ञान के अभाव में अज्ञान का अंधेरा खूब पनपता है, तब भ्रम, अंधविश्वास और अंधपरम्पराओं का उपज आना स्वाभाविक है। इनकी उपस्थिति जब किसी समाज की गति को रोकने में समर्थ होती है, तब सुख और समृद्धि ऐसे समाज के लिए कल्पना के लोक में ही विचरण करती दिखाई देती है। अत: अज्ञान का अंधेरा नहीं पनपे इसके लिए निरन्तर तार्किक और जागरूक बने रहने की अनिवार्यता नहीं भूलना चाहिए। महाभारत काल से हिन्दू समाज इस धारणा को धारण किए हुए हैं कि जब भी धर्म की हानि होती है तब ही परमात्मा अवतार लेकर पापियों को नष्टï कर धर्म की रक्षा करता है। इसलिए समय-समय पर भारतवर्ष में परमात्मा अवतार लेता रहा है। जहां तक पापों और अपराधों का प्रश्न है, सम्भवत: मानव इतिहास में वर्तमान समय से अधिक भ्रष्टïाचार कभी नहीं होते रहे होंगे। दिन दहाड़े बेकसूरों की हत्या, लूटपाट, डकैती, बलात्कार और करोड़ों रुपयों के घपलों की पुनरावृत्ति नित्य ही होती है।
आदमी का ऐसा आचरण सम्पूर्ण समाज में आज कहीं भी देखने को मिल सकता है।
यह भी सत्य है कि आज की तरह आदमी पहले कभी परमात्मा को सीधी चुनौती नहीं देता होगा। परमात्मा एक जीव को धरती पर उतारना चाहता है और आदमी उसे धरती पर उतरने से पहले ही निर्दयतापूर्वक कत्ल कर देता है।
यह जीव वह है, जिसे कन्या कहकर आदमी उसे पूजने का निरन्तर नाटक भी करता है। उस अजन्मी कन्या के कत्ल में पिता कहा जाने वाला आदमी और धरती पर दूसरे भगवान के नाम से संबोधित किए जाने वाले डॉक्टर सम्मिलित होते हैं। कन्या भ्रूण-हत्या में मां की सहमति उसकी विवशता ही होती है। कन्या को जन्म देने पर परिवारजनों द्वारा तिरस्कार एवं निरन्तर क्रूर यातनाओं से बचने के लिए वह इस पीड़ा को सह लेने की हामी भर देती है।
कन्या भ्रूणहत्या के परिणाम स्वरूप आने वाला कल कितना भयावह हो सकता है, इसकी कल्पना ही जोड़-जोड़ में सिहरन पैदा कर देती है। कल को सुरक्षित करने के लिए क्या परमात्मा के आने की प्रतीक्षा करें? क्या तब तक कन्या भ्रूण हत्या की प्रक्रिया को जारी रहने दें? (विभूति फीचर्स)
दोस्त
उषा जैन ‘शीरीं’- विभूति फीचर्स

छिन गए दोस्त कितने सफर में
उदासियों का ‘शीरीं’ अब साथ है
बनी अदावत दोस्ती उनकी ‘शीरीं’
करम उनका हर, सितम बन गया
दोस्त ऐसा मिले जहां में
बेजुबां की जो जुबां बने
इस दर्जा भी न खफा हो ए दोस्त
कि दुआ सलाम भी न रह जाए
जब आना है तसव्वुर सामने मिलता है सुकूं
है कोई चाहने वाला खुशियों पे मेरी कुर्बान
(विभूति फीचर्स)

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