Categories
वैदिक संपत्ति

वैदिक सम्पत्ति भाग- 351 जाति,आयु और भोग

(यह लेख माला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की पुस्तक वैदिक सम्पत्ति नामक से अपने सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।)
प्रस्तुति -देवेंद्र सिंह आर्य
चैयरमेन- ‘उगता भारत’

गतांक से आगे ….
यदि गीता के कर्मयोग के अनुसार कर्म से ही मोक्ष हो जाता, तो कर्मयोग के उपदेश करनेवाले स्वयं कृष्ण ही क्यों कहते कि बहूनि में व्यतीतानि जन्मानि अर्थात् मेरे बहुतसे जन्म बीत गये ? इससे तो यही ज्ञात होता है कि वे-अभी मुक्त नहीं हुए। यदि मान लें कि कृष्ण भगवान पर यह कानून चस्पा नहीं होता तो उन अर्जुन की ही दशा को देखना चाहिये, जिनको कर्म योगका उपदेश दिया गया और जिन्होंने उसे कर्म योग के अनुसार युद्ध किया। महाभारत में ही लिखा है कि मरने के बाद नरकयातना से वे भी चिल्ला रहे थे और उस यातना में उनको उस युधिष्ठिर ने बचाया था, जिसको कभी कर्मयोग का उपदेश नहीं हुआ था। कहने का मतलब यह कि अकेले कर्म से भी मोक्ष नहीं हो सकता ।

अब रही उपासना । जो लोग कहते हैं कि यही मोक्ष की साधक है, वे भी भूलते हैं। जिस प्रकार अकेला ज्ञान और अकेला कर्म मोक्ष साधन में असमर्थ है। किन्तु मोक्ष साधन का एक एक अङ्ग पूरा करता है, उसी तरह उपासना भी है। उपासना भी अकेली मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकती। क्योंकि उपासना से शरीर का अत्यन्ताभाव नहीं हो सकता पर वह मोक्ष के एक अङ्ग की पूर्ति करती है। जिस प्रकार ज्ञान से विवेक उत्पन्न होता है और कर्म से शरीर का अत्यन्ताभाव हो जाता है, उसी तरह उपासना से परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है। क्योंकि ज्ञान, कर्म और उपासना में एक उपासना ही ऐसी है, जो परमात्मा को अन्तःकरण में अवि र्भूत करा सकती है। जिस समय ज्ञान से विवेक और वैराग्य उत्पन्न करके मनुष्य छोटे-बड़े सत्कर्मों को करता हुआ समाधि में पहुँचता है और स्थिरचित्त होता है, उस समय उपासना के ही द्वारा वह परमात्मा को आत्मा में प्रकट होने की प्रार्थना करता है। यदि उपासना से द्रवीभूत होकर परमात्मा दर्शन न दें, तो मनुष्य ज्ञान और कर्मसे कुछ भी नहीं कर सकता। जिस तरह आख में पढ़ा हुआ तिनका आँख को दिखलाई नहीं पड़ता, उसी तरह आात्मा में समाया हुआ परमात्मा भी नहीं सूझता । किन्तु जिस प्रकार आँख का तिनका अपनी तिलमिलाहट से आँख को अपना अनुभव स्वयं करा देता है, उसी तरह समाधिस्थ शान्त आत्मा में नित्य व्याप्त परमात्मा भी अपनी प्रेरणा से अपना अनुभव करा देता है। यह परमात्मा का अनुभव ही जीवन्मुक्त है और मोक्ष का प्रबल प्रमाण है। जब तक परमात्मा का अनुभव न हो तब तक मोक्ष में सन्देह ही समझना चाहिये। पर यह अनुभव उपर्युक्त ज्ञान, कर्म और उपासना के मिश्रित प्रयोग से ही प्राप्त हो सकता है। इसलिए मोक्ष का उपाय न केवल ज्ञान है, न कर्म है और न उपासना ही है, किन्तु तीनों का मिश्रण है, जो आर्यो के वर्णाश्रम धर्म में ओतप्रोत है। उपनिषद् कहते हैं कि-

आचार्यकुलाद्वेदमधीत्य यथाविधानं गुरोः कर्मातिशेषेणाभिसमावृत्य कुटुम्बे शुचौ देशे स्वाध्यायमधीयानो धार्मिकाम्विदषदात्मनि सर्वेन्द्रियाणि संप्रतिष्ठाणप्याहिसन्त्सर्वभूतानि अन्यत्र तीर्थेभ्यः स खल्वेव वर्तयन्यावदायुषं ब्रह्मलोकमभिसम्पद्यते न च पुनरावर्तते न च पुनरावर्तते। (छान्दोग्य उपनिषद् 8/15/1)

अर्थात् आचार्यकुल से वेदों को पढ़कर, गुरु की दक्षिणा को देकर, समानवर्तनद्वारा कुटुम्ब में आकर, स्वाध्याय में रत रहकर और धार्मिक बिद्वानों के सत्सङ्ग से सब इन्द्रियों को बश में करके, अहिसाबुद्धि से सब प्राणियों को देखता हुआ और आयुपर्यन्त इस प्रकार का व्यवहार करता हुआ विद्धान् ही ब्रह्मलोक मोक्ष को प्राप्त होता है, जहाँ से फिर वह वापस नहीं जाता, नहीं आता। यह है आर्यसभ्यतानुसार मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग। इस मार्ग में आरम्भ से अन्त तक ज्ञान, कर्म और उपासना का मिश्रण पाया जाता है। इसलिए मोक्ष प्राप्त करने का उपाय वही है और वही मोक्ष के स्वरूप, स्थान और उपाय का थोड़ा-सा दिग्दर्शन है। इस दिग्दर्शन से मोक्ष की महत्ता में अच्छा प्रकाश पड़ता है। किन्तु संसार में पदे पदे सृष्टि के पदार्थों को आवश्यक्ता होती है और प्राणियों की हानि लाभ का प्रश्न सामने आता है, इसलिए प्राणियों से सम्बन्ध रखनेवाले और मोक्ष के साथ उपयुक्त होनेवाले अर्थ, काम और धर्म का भी वर्णन होना आवश्यक है। अतएव हम पहिले मोक्ष के साधक और शरीर को स्थिर रखनेवाले अर्थ का वर्णन करते हैं।
क्रमशः

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
Runtobet Giriş
betpark giriş
betgaranti
Runtobet Giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
kolaybet
bettilt
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
runtobet 2026
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant
casinolevant
casinolevant
sahabet giriş
runtobet giriş
sahabet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betlivo giriş
betlivo giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
bettilt
celtabet giriş
celtabet giriş
casinolevant giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
casibom giriş
casibom giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
otobet giriş
otobet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
otobet giriş
otobet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
betsat giriş
betsat giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
otobet giriş
otobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betbox giriş
betbox giriş
betbox giriş
betbox giriş
restbet giriş
restbet giriş