राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए मैं फिर लौट कर आऊंगा : हरि बल्लभ आरसी

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जमशेदपुर ( विशेष संवाददाता) श्री कृष्ण सिन्हा संस्थान के संस्थापक सचिव वयोवृद्ध 94 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार और भारतीय संस्कृति के प्रति पूर्णत: समर्पित श्री हरि बल्लभ आरसी ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में उपस्थित लोगों का आवाहन करते हुए कहा कि वे तन मन धन से समर्पित होकर राष्ट्र रक्षा के अपने पुनीत कार्य में जुट जाएं । उन्होंने कहा कि हमें सरकारों की ओर ही नहीं देखना चाहिए बल्कि जो काम हम अपने स्तर पर कर सकते हैं, उसे करके राष्ट्र सेवा और समाज सेवा का आदर्श उदाहरण स्थापित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह संस्थान गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए पूर्णतया संकल्पित है। जिन परिवारों की बेटियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है हम उन्हें शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रति वचनबद्ध हैं । श्री आरसी ने कहा कि हम पूरी ईमानदारी से शिक्षा को देश सेवा के साथ जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं। हमारा उद्देश्य पैसा कमाना या शिक्षा के माध्यम से लूट मचाना नहीं है बल्कि हम राष्ट्र निर्माण के लिए मानव निर्माण करने के शिक्षा के मौलिक संस्कार में विश्वास रखते हैं।


उगता भारत के साथ एक विशेष बातचीत में श्री रसी ने कहा कि हम प्रारंभ से ही उन गरीब लोगों की अधिवक्ता के रूप में भी काम करते रहे हैं जिनकी प्राथमिक की को लेने से पुलिस प्रशासन बना कर देता है या प्रशासन में बैठे अधिकारी लोग जिनकी बात को सुनने से इनकार कर देते हैं। हमारा विश्वास है कि जब तक एक आम आदमी की पीड़ा को सुनने के प्रति शासन प्रशासन संवेदनशील नहीं होगा, तब तक हम वास्तविक आजादी मनाने के अधिकारी नहीं बन सकते। वास्तविक आजादी तभी मनाई जा सकती है जब प्रत्येक व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकार प्राप्त हो जाएंगे और वह आजादी की खुली हवाओं में सांस लेते हुए अपने आप को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत अनुभव करे।
उन्होंने कहा कि भारत संपूर्ण संसार को स्वराज और स्वतंत्रता के सही अर्थ प्राचीन काल से समझाना आया है हमारी शिक्षा का आधार स्वराज और स्वतंत्रता के ऐसे विचार रहे हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकार उपलब्ध कराने के प्रति संकल्पित होते हैं भारत की इसी चेतना से हिंदुत्व का निर्माण होता है हिंदुत्व पर प्रत्येक व्यक्ति को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी कारण से समाज में पीछे रह जाता है तो समझो शिक्षा में कहीं ना कहीं कमी है यही कारण है कि यह संस्थान शिक्षा के मौलिक उद्देश्यों के प्रति समर्पित होकर आगे बढ़ रहा है उन्होंने कहा कि जब इस संस्थान का शताब्दी समारोह आयोजित किया जाएगा तो मैं उस समय फिर जवान होकर लौट चुका होऊंगा और इस संस्थान के माध्यम से फिर राष्ट्र सेवा के अपने महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम दे रहा हूंगा। मेरा दोबारा लौटना अर्थात दूसरा जन्म होना राष्ट्र और धर्म की सेवा के लिए ही होगा।

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