हर्षोल्लास के साथ मनाई गई स्वामी दयानंद जी की 202 वीं जयंती

hawan dayanand jayanti

ग्रेटर नोएडा। (12 फरवरी 2026) यहां पर गुरुकुल मुर्शदपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती जी की 202 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्वामी दयानंद जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि स्वामी जी का जीवन देशप्रेम, वेद प्रेम और ईश्वर प्रेम पर आधारित रहा है। यही कारण रहा कि उनके अनुयाई लोगों ने देश के राष्ट्रवादी क्रांतिकारी आंदोलन में भी बढ़ चढ़कर भाग लिया। आज 32 देशों में स्वामी दयानंद जी के मिशन पर काम किया जा रहा है। ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी, टोक्यो, सिंगापुर जैसी यूनिवर्सिटीज में बड़े स्तर पर संस्कृत पर शोध कार्य हो रहा है। इसके अतिरिक्त भारतवर्ष में 4500 और विश्व के अन्य देशों में 400 गुरुकुल स्वामी जी के मिशन पर काम कर रहे हैं। इसके उपरांत भी हमको आलस्य या प्रमाद नहीं दिखाना है, निरंतर जागते रहना है और देश के सामने खड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए स्वामी जी के दिखाये मार्ग का अनुकरण करना होगा।

डॉ आर्य ने कहा कि सृष्टि प्रारंभ से ही वेद के अनुकूल सारी व्यवस्थाएं चलती रहीं। मनु महाराज ने मनुस्मृति के माध्यम से इस प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करके आगे बढ़ाने का काम किया। परंतु महाभारत के बाद कई प्रकार के पाखंड देश में फैल गए। जिनका विनाश करने के लिए आदि शंकराचार्य जी ने भगीरथ प्रयास किया। उसके बाद स्वामी दयानंद जी महाराज ने इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। यदि हम किसी भी प्रकार से सोते रह गए तो यह फिर हमारे लिए खतरनाक सिद्ध होगा। स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा कि हमें आर्य समाज को एक क्रांतिकारी योजना के अनुसार फिर से खड़ा करना होगा।

इस अवसर पर भाषा प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि स्वामी जी महाराज ने यज्ञ की कर्मकांड की जटिल प्रक्रिया को सरल करते हुए 16 गायत्री मंत्रों से यज्ञ करने की सरल विधि बता कर संसार के गृहस्थ लोगों के लिए एक विशेष संदेश दिया, जिसे अपनाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर लगभग 80 दैनिक अग्निहोत्र करने वाले परिवारों को भी सम्मानित किया गया।
जिनमें देव मुनि जी महाराज, गिरीश मुनि जी महाराज, आचार्य दशरथ, महावीर सिंह आर्य, किशन लाल आर्य, पंडित धर्मवीर आर्य, प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य, मूलचंद शर्मा, महेंद्री देवी, माता भगवती देवी, श्रीमती ऋचा आर्या, श्रीमती संगीता आर्या, विक्रम आर्य, राकेश शर्मा , बाबूराम आर्य, रविंद्र आर्य, राकेश यादव , राजेंद्र सिंह आर्य, जीतराम आर्य, प्रधान बलबीर सिंह आर्य आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।
उन्होंने कहा कि दैनिक अग्निहोत्र करना प्रत्येक गृहस्थी का पवित्र कार्य है। पंच महायज्ञ विधि को अपनाकर हम सामाजिक सुव्यवस्था स्थापित कर सकते हैं। कार्यक्रम में मेजर वीर सिंह आर्य, जलजीत आर्य, ओमप्रकाश आर्य, सुदेश आर्य, गिरिराज आर्य, अमन आर्य, रविंद्र सिंह आर्य, बाबूराम आर्य,महेंद्र सिंह आर्य , पूरन सिंह आर्य, रंगीलाल आर्य, गजराज आर्य, हेम सिंह आर्य, पंडित धर्मवीर आर्य, वीरेश आर्य, ओमवीर सिंह आर्य, इंजीनियर श्यामवीरआर्य, विजेंद्र सिंह आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य जन उपस्थित रहे।

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