पाकिस्तान की राह पर चलता कनाडा

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अंजनी सक्सेना – विनायक फीचर्स
नई दिल्ली में जी20 के भव्यतम आयोजन के चंद दिनों बाद ही भारत एवं कनाडा के रिश्तों में आयी तल्खी को देखकर लग रहा है कि अब कनाडा भी पाकिस्तान की राह पर चल पड़ा है। पाकिस्तान की तो अपने जन्म से ही भारत विरोधी तत्वों को प्रश्रय देने की नीति रही है। अब यही नीति कनाडा ने भी अपना ली है। पाकिस्तान के सत्ताधारियों ने सत्ता में बने रहने के लिए दाऊद इब्राहिम, यासीन मलिक, असिया अंद्राबी से लेकर दस-दस रुपये लेकर पत्थर फेंकने वालों तक को राजनैतिक प्रश्रय और संरक्षण दिया। पाकिस्तान के नेताओं ने अपने देश में भारत के विरुद्ध जमकर जहर उगला और वहां की जनता ने भावनाओं में बहकर ऐसे नेताओं ने सिर माथे पर बिठा लिया। यही कुछ अब कनाडा में भी चलने लगा है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत से भागे अपराधियों को अपने देश में पनाह देकर उन्हें प्रश्रय दिया और अब वे उन्हें खालिस्तान समर्थक बताकर राजनैतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं।
वस्तुत: कनाडा में इन दिनों महंगाई और घर की समस्या विकराल होती जा रही है। इस सबसे ध्यान हटाने और अपने खिसकते राजनीतिक धरातल को बनाए रखने के लिए जस्टिन ट्रूडो भारत विरोधी बयान दे रहे हैं। कनाडा में भारतवंशी लोगों की संख्या काफी है। इनमें अधिकतर वे लोग हैं जो भारत के पंजाब प्रांत से वहां पहुंचे हैं। इनमें सिख और गैर सिख दोनों शामिल हैं, लेकिन इनमें भी अधिक संख्या सिख अप्रवासियों की है, जो अब वहां सत्ता निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं सिख अप्रवासियों में कुछ ऐसे भी तत्व वहां अपनी जड़े जमा चुके हैं जो खालिस्तान का समर्थन कर रहे हैं। ट्रूडो सरकार चुनाव जीतने के लिए ऐसे लोगों का सपोर्ट कर रही है।
भारत में ऑपरेशन ब्लू स्टार में जनरैल सिंह भिंडरावाले के मारे जाने के बाद खालिस्तानी आंदोलन का लगभग सफाया हो गया था। गिने-चुने लोग ही बचे थे जो चोरी-छिपे खालिस्तान का समर्थन कर रहे थे, लेकिन सरकार के कड़े रवैये और सख्ती के चलते इन्हें यहां पैर पसारने का मौका नहीं मिला। ऐसे में ये लोग पंजाब में रंगदारी, ड्रग्स और फर्जी पासपोर्ट का धंधा करने लगे। इन पर भी जब प्रशासन ने सख्ती की तो ये फर्जी पासपोर्ट पर भागकर कनाडा जा पहुंचे। ऐसे ही भारत के फरार कई अपराधी जिन्हें भारत सरकार आतंकवादी मानती है कनाडा में रह रहे हैं।
वर्तमान में भारत-कनाडा तकरार की वजह जून माह में कनाडा के सर्रे शहर में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मामला है। हरदीप सिंह की कनाडा में गुरुद्वारे के बाहर हत्या कर दी गयी थी। अब तीन माह बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसकी हत्या का आरोप भारत की गुप्तचर एजेंसी रा पर लगाया है। भारत ने इस आरोप पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। इसी बीच कनाडा में ही 21 सितम्बर को सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुरके की हत्या उसी के फ्लैट में ही कर दी गई। निज्जर और सुक्खा दोनों ही भारत से भागे हुए अपराधी थे और कनाडा में खुद को खालिस्तान समर्थक बता रहे थे।
जी 20 में शामिल होकर कनाडा लौटते ही ट्रूडो ने निज्जर की हत्या का आरोप भारत की गुप्तचर एजेंसी रा पर लगा दिया और ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन तथा अमेरिका से भी इस मामले में दखल देने की बात कर डाली लेकिन ट्रूडो का यह आरोप तब ढीला पड़ गया जब सुक्खा की हत्या के तुरंत बाद उसकी हत्या का जिम्मा आतंकवादी गोल्डी बराड गुट के लारेंस विश्नोई ने ले लिया। लारेंस विश्नोई ने दावा किया है कि सुक्खा रंगदारी, अड़ीबाजी और नशे की तस्करी में लगा था। निज्जर और सुक्खा दोनों ही पंजाब के रहने वाले थे। ये दोनों ही फर्जी पासपोर्ट से कनाडा भाग गए थे। दोनों ही आतंकवादी और अनैतिक गतिविधियों में लिप्त थे। सुक्खा पर गैंगस्टार गोल्डी बराड़ के भाई की हत्या का आरोप लगा था और वह खालिस्तान समर्थक बंबीना ग्रुप का इंचार्ज था।
जस्टिन ट्रूडो के भारत पर आरोप लगाए जाने के बाद लारेंस विश्नोई के इस मामले में कूद पडऩे पर यह सारा मामला आपसी गैंगवार का लगने लगा है लेकिन अपराधियों की आपसी लड़ाई में एक देश के प्रधानमंत्री का दूसरे देश पर आरोप लगाना आश्चर्य करने वाला है। पर विश्व राजनीति के पटल पर ट्रूडो की अपनी जनता को बहकाने की कोशिश मात्र लग रहा है।
भारत में इसकी कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो ट्रूडो के इन आरोपों को सिरे से ही खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह हत्या कनाडा में गुरुनानक सिख गुरुद्वारा और सर्रे के प्रबंधन के बीच गुटीय झगड़ों के कारण हुई। कैप्टन का कहना है कि दुर्भाग्य से ट्रूडो वोट बैंक की राजनीति में फंस गए हैं और भारत तथा कनाडा के बीच राजनीतिक संबंधों को दांव पर लगा दिया है। कैप्टन का कहना है कि कनाडा प्रशासन ने अपने देश में भारत विरोधी ताकतों को खुली छूट दे रखी है और वहां भारतीय मिशनों पर हमला किया गया लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की।
वैसे कनाडा की राजनीति में भारत विरोधी तत्वों का हमेशा से जमावड़ा रहा है। यहां खालिस्तानी उग्रवादियों ने सिख वोटों को अपने काबू में कर रखा है और यहां की राजनीति में अपनी गहरी पैठ बना ली है। यहां ये आतंकवादी और उग्रवादी राजनीतिक पार्टियों को जमकर आर्थिक सहयोग भी दे रहे है। खालिस्तान समर्थक उग्रवादियों का यहां की राजनीति में इतना प्रभाव है कि 2018 में कनाडा का रक्षा मंत्री भी उस हरजीत सिंह सज्जन को बनाया गया जो विश्व सिख संगठन से जुड़ा था। यह संगठन सदैव से ही भारत के विरुद्ध कार्य करता रहा है।
खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद प्रधानमंत्री ट्रूडो का इस मामले में अपनी संसद में बयान देना खालिस्तानी उग्रवादियों के कनाडा की राजनीति में बढ़ते प्रभाव को ही दर्शाता है। वैसे कनाडा में भारत के समर्थकों की भी कमी नहीं है और इनमें सिख और गैर सिख दोनों शामिल हैं। यहां के सारे के सारे सिख खालिस्तान समर्थक नहीं है बल्कि ऐसे भी अनेक सिख हैं जो जस्टिन ट्रूडो के इस कदम को दोनों देशों के रिश्तों के लिए घातक मानते हैं। कुल मिलाकर वोटों की राजनीति और धन बल के चलते जस्टिन ट्रूडो भी अब पाकिस्तान की राह पर चल पड़े है, ट्रूडो की इस नीति का परिणाम ट्रूडो को चाहे जो भी मिले पर इससे कनाडा और भारत के राजनयिक और व्यापारिक संबंध अवश्य प्रभावित होंगे। (विनायक फीचर्स)

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